किशोर कुमार की बायोग्राफी पर विवाद:2 साल पहले मिला नेशनल अवॉर्ड वापस लेने की मांग, कोर्ट का सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस

  • Hindi News
  • Entertainment
  • Bollywood
  • Patna High Court Notice Over Kishore Kumar Biography National Award Controversy

किशोर कुमार की बायोग्राफी पर विवाद:2 साल पहले मिला नेशनल अवॉर्ड वापस लेने की मांग, कोर्ट का सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस13 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

किशोर कुमार की बायोग्राफी ‘किशोर कुमार: द अल्टीमेट बायोग्राफी’ को नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट सिनेमा बुक चुने जाने पर विवाद हो गया। पटना हाईकोर्ट ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय और NFDC से पूछा कि आखिर यह किताब भारतीय सिनेमा पर कैसे है।

पटना के हिंदी लेखक और साहित्यिक आलोचक अनंत प्रसाद सिन्हा ने इस बुक को अवॉर्ड दिए जाने के खिलाफ याचिका दायर की है। वह ‘अनंत’ नाम से लिखते हैं। सिन्हा ने याचिका में 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘बेस्ट सिनेमा बुक’ का अवॉर्ड रद्द करने की मांग की है। यह पुरस्कार अनिरुद्ध भट्टाचार्जी और पार्थिव धर की किताब ‘किशोर कुमार: द अल्टीमेट बायोग्राफी’ को मिला था।

मंत्रालय, NFDC और लेखकों को नोटिस

मामला जस्टिस अजीत कुमार की अदालत में सुना गया। कोर्ट ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय, NFDC, जूरी सदस्यों और किताब के दोनों लेखकों को नोटिस जारी किया है। किताब हार्पर कॉलिन्स ने प्रकाशित की है। पुरस्कार की घोषणा 16 अगस्त 2024 को हुई थी। इसे 8 अक्टूबर 2024 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में दिया गया था।

याचिका में सिन्हा ने कहा कि पुरस्कारों की देखरेख करने वाले मंत्रालय ने अपनी पात्रता शर्तों का पालन नहीं किया। कोर्ट के मौखिक आदेश में कहा गया कि याचिकाकर्ता के वकील के अनुसार, 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ पुस्तक के नामांकन के लिए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हुआ। ये दिशा-निर्देश सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी भारत के राजपत्र में 07.10.2024 की अधिसूचना में दिए गए हैं।

केंद्र सरकार के वरिष्ठ पैनल वकील ने याचिकाकर्ता की शिकायतों पर जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने यह मांग दर्ज की। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।

अनंत सिन्हा ने दो आधारों पर पुरस्कार को चुनौती दी

सिन्हा ने याचिका में दो मुख्य आधार बताए हैं। उनका कहना है कि पुरस्कार समिति ने उन नियमों का उल्लंघन किया, जिनके तहत सम्मान भारत में किसी भी भाषा में प्रकाशित भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक को दिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी किताब ‘दो गुलफामों की तीसरी कसम’ सभी दिशा-निर्देशों को पूरा करती है। इसलिए यह पुरस्कार उनकी किताब को मिलना चाहिए था।

सिन्हा ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, “मेरा तर्क सीधा है। अगर किशोर कुमार की बायोग्राफी को भारतीय सिनेमा पर किताब कहा जा सकता है, तो क्या बीआर अंबेडकर की बायोग्राफी को भारतीय संविधान पर किताब कहा जा सकता है?”

उन्होंने कहा कि अदालत जाने से पहले उन्होंने यह तर्क सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सामने रखा था। हालांकि, वहां उनकी बात नहीं मानी गई।

किशोर कुमार की बायोग्राफी के बारे में-

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सर्वश्रेष्ठ सिनेमा पुस्तक के विजेता को स्वर्ण कमल और 1 लाख रुपए का नकद पुरस्कार मिलता है। 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2022 के बीच प्रकाशित किताबें अवॉर्ड पाने के योग्य थीं।

अनिरुद्ध भट्टाचार्जी और पार्थिव धर की ‘किशोर कुमार: द अल्टीमेट बायोग्राफी’ में भारत के सबसे अलग अंदाज वाले और बहुमुखी कलाकार किशोर कुमार की जिंदगी, संगीत और जटिल व्यक्तित्व को बताया गया है। वहीं, ‘दो गुलफामों की तीसरी कसम’ में सिन्हा ने फणीश्वर नाथ रेणु की चर्चित हिंदी कहानी ‘मारे गए गुलफाम’ को 1966 की बॉलीवुड फिल्म ‘तीसरी कसम’ में ढालने के पीछे की छह साल की यात्रा का वर्णन किया है।

मलेशियाई PM ने BRICS डिनर में किशोर कुमार का गाना गाया

मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने पिछले शनिवार को नई दिल्ली में किशोर कुमार का मशहूर गाना ‘ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत…’ गाया। इब्राहिम BRICS समिट के डिनर में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने मुकेश का गीत दोस्त दोस्त ना रहा… भी गुनगुनाया।

किशोर कुमार के सिनेमाई सफर के बारे में-

अभिनेता, संगीतकार, गायक, लेखक, निर्देशक और निर्माता किशोर कुमार अपने आप में एक बहुआयामी शख्सियत थे। उन्हें एक ऐसे शख्स के तौर पर याद किया जाता है, जो हमेशा अपनी शर्तों पर जिया और जो भी किया, वो इतिहास बन गया।

किशोर का असली नाम आभास कुमार गांगुली था। उनका जन्म 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ था। किशोर कुमार जितना एक गायक के तौर पर जाने जाते हैं, उतना ही एक अभिनेता के तौर पर भी।

किशोर कुमार के करियर की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में फिल्म शिकारी (1946) से हुई। इस फिल्म में उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने लीड रोल निभाया था। उन्हें पहली बार गाने का मौका मिला 1948 में बनी फिल्म जिद्दी में। इसमें किशोर ने देव आनंद के लिए गाना गाया। किशोर कुमार केएल सहगल के जबर्दस्त प्रशंसक थे, इसलिए उन्होंने यह गीत उन की शैली में ही गाया। उन्होंने राजेश खन्ना के लिए 92 फिल्मों में रिकॉर्ड 245 गाने गाए। 1997 में मध्य प्रदेश सरकार ने उनके नाम पर अवॉर्ड शुरू किया।

किशोर कुमार से जुड़े ये किस्से भी पढ़िए-

चोट लगने पर चिल्ला-चिल्लाकर रोते थे, सुरीली हो गई आवाज

किशोर कुमार का असली नाम था आभास कुमार गांगुली। उनके पिता कुंजालाल गांगुली वकील थे। वहीं नामी बंगाली परिवार से ताल्लुक रखने वालीं उनकी मां गौरी देवी हाउसवाइफ थीं। 4 भाई-बहन अशोक, सीता देवी, अनूप में किशोर कुमार सबसे छोटे थे। किशोर कुमार के बड़े भाई अशोक कुमार ने एक इंटरव्यू में बताया था कि किशोर दा बचपन से सुरीले नहीं थे। उनकी आवाज बैठी हुई थी। जब कभी गुनगुनाते थे तो बेसुरे सुनाई पड़ते थे।

एक दिन बचपन में मां किचन में सब्जियां काट रही थीं। नन्हे से किशोर दौड़ते हुए मां के पास जा ही रहे थे कि वहां रखा धारदार हंसिया उनके पैर में लग गया। पैर कट गया और तेजी से खून बहने लगा। कम उम्र के किशोर दर्द नहीं सह पाए और जोर-जोर से रोने लगे। ऐसे ही जब तक चोट में आराम नहीं मिला, तब तक किशोर दा रोज रोते रहे। घंटों रोने से उनके वोकल कॉर्ड्स पर इतना असर पड़ा कि वो सुरीले हो गए। किशोर दा भी उस हादसे को ही अपनी आवाज का श्रेय देते हैं।

क्लासरूम में टेबल पर तबला बजाया तो टीचर ने कहा- गाने-बजाने से कुछ नहीं होगा

किशोर दा को कभी भी पढ़ाई में ज्यादा रुचि नहीं थी। एक दिन वो क्लासरूम में बैठकर टेबल पर तबला बजा रहे थे। सिविक्स की क्लास थी। टीचर ने जैसे ही आवाज सुनी तो जोरदार फटकार लगा दी।

कहा- पढ़ाई-लिखाई में ध्यान दो, ये गाने-बजाने से कुछ नहीं होगा।

ये सुनकर किशोर कुमार ने जवाब दिया- देखना एक दिन इसी गाने-बजाने से मेरा नाम होगा। सालों बाद अपने हुनर से किशोर कुमार ने वो बात सच कर दिखाई।

बड़े भाई अशोक कुमार के गानों में कोरस सिंगर थे किशोर

किशोर कुमार के बड़े भाई अशोक कुमार 40 के दशक में हिंदी सिनेमा का बड़ा नाम बन चुके थे। अशोक मुंबई में रहते थे तो परिवार का आना-जाना भी मुंबई होने लगा। बड़े भाई की मदद से किशोर भी बॉम्बे टॉकीज में कोरस सिंगर बन गए। गाने गाते हुए उन्होंने अपना नाम आभास से किशोर कुमार कर लिया। एक दिन उनकी परफॉर्मेंस से खुश होकर डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश ने उन्हें फिल्म जिद्दी (1948) के गाने मरने की दुआएं क्यों मांगू गाने का मौका दिया। गाना हिट हुआ और किशोर कुमार को लगातार हिंदी सिनेमा में गाने और अभिनय का मौका मिलने लगा। 1949 में वो भी बड़े भाई के साथ रहने मुंबई आ पहुंचे।

एस.डी. बर्मन ने पहचाना हुनर, तो नकल करना छोड़ बनाई पहचान

किशोर कुमार हमेशा से ही के.एल. सहगल, अमेरिकन सिंगर डैनी के और रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े प्रशंसक थे। अपनी दीवानगी जगजाहिर करने के लिए उन्होंने घर में तीनों की तस्वीरें टांग रखी थीं और रोज सुबह उनका नमन किया करते थे। जब रियाज की बारी आती तो के.एल. सहगल के गाने दोहराते रहते थे। एक दिन फिल्म मशाल (1950) के लिए एस.डी. बर्मन, अशोक कुमार से मिलने उनके घर पहुंचे। देखा तो उनके छोटे भाई किशोर दा बैठकर रियाज कर रहे थे।

एस.डी. बर्मन उनके पास गए और कहा अगर बड़ा सिंगर बनना है तो अपना स्टाइल ढूंढो, न कि किसी और की नकल करो। जब किशोर कुमार ने उन्हें योडलिंग सुनाई तो खुश होकर उन्होंने किशोर दा को देव आनंद की आवाज बना दिया। लगातार हिट देते हुए किशोर कुमार हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन सिंगर में गिने जाने लगे। उन्होंने अपने करियर में 1198 फिल्मों में 2678 गाने गाए।

किशोर दा अपनी फीस को लेकर काफी पाबंद थे। वो नो मनी, नो वर्क की पॉलिसी फॉलो करते थे। वो तब तक गाने की रिकॉर्डिंग शुरू नहीं करते थे जब तक उनका असिस्टेंट आकर ये न बता दे कि उनकी फीस पूरी मिल चुकी है। जब-जब उन्हें आधी-अधूरी फीस मिली, तब-तब उन्होंने अलग-अलग पैतरों से प्रोड्यूसर की नाक में दम किया।

पढ़िए उनके कारनामों के कुछ किस्से-

5 हजार रुपए कम मिले तो गुलाटी खाते हुए सेट से भागे

किशोर दा हमेशा से ही सिंगर बनना चाहते थे, लेकिन उन्हें अभिनय के भी कई ऑफर मिलते थे। जब भी कोई उनके पास फिल्म लेकर आता तो वो कोई-न-कोई बहाना करके उसे भगा देते थे।

1956 की बात है जब अशोक कुमार ने छोटे भाई को फिल्म भाई-भाई में काम दिलवा दिया। फिल्म के डायरेक्टर एम.वी.रमन ने उन्हें 5 हजार रुपए कम दिए थे। ऐसे में जब शूटिंग शुरू हुई और एक्शन कहा गया तो किशोर कुमार दो कदम चले, चिल्लाया 5 हजार रुपए और गुलाटी खाते हुए सेट से भाग गए। जब कुछ दिनों बाद किशोर दा को दोबारा सेट पर लाया गया तो वो कभी भागने की कोशिश करते, डायलॉग भूलने का बहाना बनाते, तो कभी बीमारी का, लेकिन बड़े भाई उनसे भी दो कदम आगे थे। जैसे ही सीन शूट होने लगा तो अशोक कुमार ने अपने दोनों पैर किशोर दा के पैरों पर रख लिए। भाई की सख्ती देखकर किशोर को शूटिंग करनी ही पड़ी।

प्रोड्यूसर ने आधी फीस दी तो आधा सिर मुंडवाकर सेट पर पहुंचे

एक बार किशोर कुमार को एक फिल्म में कास्ट किया गया, लेकिन प्रोड्यूसर ने उन्हें ये कहते हुए आधी फीस दी कि आधी फीस फिल्म पूरी होने के बाद मिलेगी। किशोर दा ने उस वक्त तो कुछ नहीं कहा, लेकिन जैसे ही शूटिंग शुरू हुई तो वो आधा सिर और आधी मूंछे मुंडवाकर पहुंच गए। डायरेक्टर अपने हीरो की ऐसी बिगड़ी हालत देखकर डर गया। उन्होंने इस हालत का कारण पूछा, तो जवाब मिला- आधी फीस मिली है तो गेटअप भी आधा ही होगा, जब पूरे पैसे मिल जाएंगे, तो गेटअप पूरा हो जाएगा।

फीस रोकने वाले प्रोड्यूसर के घर के बाहर चिल्लाते रहे

किशोर कुमार ने जब प्रोड्यूसर आर.सी. तलवार के साथ काम किया तो उन्हें 8 हजार रुपए कम मिले थे। प्रोड्यूसर ने वादा किया था कि वो जल्द ही ये रकम चुका देंगे, लेकिन ऐसा करने में देर हो गई। ऐसे में किशोर दा रोज उनके घर के बाहर जाते और चिल्लाते- हे तलवार, दे दे मेरे आठ हजार। हे तलवार, दे दे मेरे आठ हजार।

किशोर दा रोज सुबह तब तक उनके घर के बाहर चिल्लाते रहे, जब तक उन्हें पैसे नहीं दिए गए।

किशोर दा भले ही अपनी फीस को लेकर पाबंद थे, हालांकि दरियादिली में उन्होंने कई बार मुफ्त में भी काम किया। राजेश खन्ना और डैनी डेन्जोंगपा के प्रोडक्शन में बनी फिल्मों के लिए उन्होंने मुफ्त में काम किया, जबकि उन्हें फीस दी जा रही थी। ऐसे ही कई जवानों के लिए और कैंसर हॉस्पिटल में फंड इकट्ठा करने के लिए उन्होंने कई बार मुफ्त में परफॉर्म किया था।

शूटिंग के कुछ मजेदार किस्से ये भी हैं-

जबरदस्ती एक्टिंग करवाई तो देव आनंद को सेट पर गाली देकर भाग गए थे

एक फिल्म में अशोक कुमार, देव आनंद के साथ काम कर रहे थे। फिल्म के एक सीन के लिए देव आनंद के साथ एक लड़का चाहिए था तो पास खड़े अशोक कुमार ने कह दिया कि किशोर कुमार ये रोल कर लेंगे। लहरें रेट्रो के मुताबिक डायरेक्टर ने किशोर दा को समझाया कि जैसे ही देव आनंद साहब कमरे में दाखिल होते हैं वैसे ही तुम उन्हें खरी-खोटी सुनाते हो।

किशोर कुमार ने सिर हिलाकर इशारों में जवाब दिया कि वो समझ गए, लेकिन जैसे ही एक्शन की आवाज आई तो कुछ ऐसा हुआ, जिससे हर कोई दंग रह गया। देव आनंद के कमरे में आते ही किशोर कुमार ने उन्हें असल में गंदी-गंदी गालियां दीं और सेट से भाग गए। डायरेक्टर उन्हें पीछे से चिल्लाता रहा कि अभी सीन पूरा नहीं हुआ वापस आ जाओ, लेकिन वो नहीं लौटे।

कोर्ट से मांगी थी डायरेक्टर ने मदद

किशोर कुमार की इन्हीं शरारतों से डरकर एक डायरेक्टर ने कोर्ट से मदद मांगी। उन्होंने ऐसा एग्रीमेंट तैयार करवाया कि किशोर शूटिंग के दौरान उनकी हर बात मानें। कोर्ट के आदेश के बाद किशोर कुमार ने न चाहते हुए भी डायरेक्टर की हर बात मानी, लेकिन अलग अंदाज में।

किशोर कुमार का कार में एक सीन शूट होना था। शॉट पूरा हुआ, लेकिन किशोर कुमार गाड़ी से नहीं उतरे। कई घंटे बीते तो उनसे पूछा गया कि आप उतर क्यों नहीं रहे। इस पर किशोर दा ने कहा, क्योंकि डायरेक्टर ने मुझे उतरने को नहीं कहा।

शूटिंग करते हुए खंडाला निकल गए थे किशोर दा

एक फिल्म की शूटिंग के दौरान किशोर कुमार को कार में बैठकर कुछ मीटर का फासला पूरा करना था और उतरना था। जैसे ही एक्शन बोला गया तो किशोर कुमार ने कार चलानी शुरू की। डायरेक्टर ने कट नहीं बोला तो किशोर दा कार चलाते-चलाते खंडाला पहुंच गए।

बदला लेने के लिए फाइनेंसर को कर दिया था अलमारी में बंद

60 के दशक की बात है, फिल्म हाफ टिकट की शूटिंग के दौरान किशोर दा सबको अपनी जिद से तंग करते थे। इस बात से नाराज होकर फाइनेंसर कालिदास बटवाब्बल ने उनकी शिकायत इनकम टैक्स में कर दी। शिकायत पर किशोर दा के घर पर रेड पड़ी। कुछ समय बाद किशोर दा ने कालिदास को खाने पर अपने घर बुलाया।

कुछ समय बाद उसका भरोसा जीतने के बाद किशोर दा ने उनसे कहा कि वो कपड़ों की अलमारी में बैठकर कुछ जरूरी बात करेंगे। जैसे ही कालिदास अलमारी में बैठे तो उन्होंने बाहर से अलमारी बंद कर दी। उन्होंने 2 घंटों तक कालिदास को अलमारी में बंद रखा और फिर निकालकर घर से बाहर कर दिया। कहा कि आज के बाद मेरे घर में आने की हिम्मत मत करना।

किस्से किशोर कुमार की जिद के-

जब बी.आर. चोपड़ा से लिया बदला

बी.आर. चोपड़ा और अशोक कुमार अच्छे दोस्त थे। एक बार किशोर कुमार को काम की जरूरत पड़ी तो वो भाई की दोस्ती के चलते बी.आर. चोपड़ा के पास पहुंच गए। उस समय चोपड़ा ने किशोर दा के सामने कुछ शर्तें रख दीं। किशोर ने वो गाना ठुकरा दिया और कहा- आज मेरा वक्त बुरा है तो आप शर्त रख रहे हैं, देखना जब मेरा वक्त आएगा तो मैं भी शर्त रखूंगा।

समय बदला, लेकिन किशोर दा ये बात नहीं भूले। कुछ समय बाद बी.आर. चोपड़ा एक गाने का ऑफर लेकर किशोर दा के घर पहुंचे। ये उनके लिए बदले का समय था। उन्होंने कह दिया, मुझसे गाना गंवाना है तो जाइए पहले धोती, पैरों में जूते-मोजे पहनकर आइए। पान भी खाना। आपका मुंह लाल-लाल दिखना चाहिए और मुंह से लार टपक रही होनी चाहिए।

ये शर्त सुनकर बी.आर. चोपड़ा ने किशोर दा के भाई अशोक कुमार से कहा कि आप ही अपने भाई को समझाइए, लेकिन वो किशोर दा के मिजाज से वाकिफ थे। उन्होंने मामले में टांग नहीं अड़ाई। आखिरकार बी.आर.चोपड़ा को शर्त माननी ही पड़ी।

अमिताभ से गुस्सा होकर उनकी आवाज बनने से किया था इनकार

1981 में किशोर कुमार फिल्म ममता की छांव डायरेक्ट कर रहे थे। वो चाहते थे कि अमिताभ इस फिल्म में गेस्ट अपियरेंस में दिखें, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इस बात से किशोर दा इतना नाराज हुए कि उन्होंने अमिताभ पर फिल्माए गानों को आवाज देने से इनकार कर दिया। ठुकराई हुई फिल्मों में नसीब, कुली, मर्द, देश प्रेमी शामिल थीं। फिल्म ममता की छांव में रिलीज होने से पहले ही किशोर दा का 1987 में निधन हो गया। ऐसे में राजेश खन्ना ने उनके बेटे अमित की मदद कर 1989 में फिल्म रिलीज करवाई थी।

पत्नी ने तलाक लेकर मिथुन से शादी की तो उनके लिए गाना छोड़ा

किशोर ने पहली शादी रूमा गुहा ठाकुरता उर्फ रूमा घोष से 1951 में की, लेकिन ये शादी 1958 में टूट गई। बाद में उन्होंने दूसरी शादी एक्ट्रेस मधुबाला से 1960 में की। मधुबाला के दिल में छेद था, जिससे उनकी मौत हो गई। मधुबाला के बाद किशोर का दिल एक्ट्रेस योगिता बाली पर आ गया। दोनों ने 1976 में शादी कर ली, लेकिन दो साल बाद ये शादी टूट गई।

योगिता बाली ने किशोर दा से तलाक लेने के बाद मिथुन से शादी कर ली। इस बात से परेशान होकर किशोर कुमार ने मिथुन के लिए गाना छोड़ दिया था। बता दें कि योगिता बाली के बाद 51 साल की उम्र में किशोर दा ने लीना चंदावरकर से चौथी शादी की थी। किशोर के दो बेटे सिंगर अमित कुमार (पहली पत्नी रूमा गुहा से) और सुमित कुमार (अंतिम पत्नी लीना चंदावरकर से) हैं।

घर के आंगन से निकले थे कंकाल

किशोर कुमार को एक्सपेरिमेंट का बेहद शौक था। एक बार वेनिस की नहरों से प्रेरित होकर किशोर दा ने ठान ली कि वो अपने वॉर्डन रोड, मुंबई स्थित घर के चारों ओर नहर बनवाएंगे। ये उनका सपना बन गया। फिर क्या था उन्होंने अपने सपने पर काम करना शुरू कर दिया। रोज म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का कर्मचारी उनके घर आकर बैठता और वो अपने मजदूरों से खुदाई करवाते।

एक दिन खुदाई करते हुए एक मजदूर को पहले हाथ की हड्डी मिली फिर कुछ दिनों में वहां कंकाल निकलने लगे। मजदूर डर गए और खुदाई रुक गई।

हर कोई समझ चुका था कि जिस जगह किशोर दा का घर है वो जगह पहले कभी कब्रिस्तान हुआ करती थी। उनके बड़े भाई अनूप वहां गंगाजल लेकर आए और पूरी जमीन का शुद्धिकरण करवाया गया। इसी के साथ किशोर दा का घर को वेनिस की तरह बनाने का सपना अधूरा रह गया।

मोहम्मद रफी के पैर पकड़कर रोते रहे

हिंदी सिनेमा में एक दौर ऐसा था जब दो ही सिंगर मशहूर थे। पहले मोहम्मद रफी और दूसरे किशोर कुमार। एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी होने के साथ-साथ दोनों पक्के दोस्त भी थे। दोनों ने साथ में पर्दा है पर्दा, यादों की बारात जैसे कई बेहतरीन गानों को आवाज दी।

फिल्म रागिनी, शरारत और बागी शहजादा में जब किशोर कुमार हीरो बने तो उनके लिए रफी साहब ने ही आवाज दी। किशोर दा के बेटे अमित कुमार ने आरजे राहुल को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि जब 31 जुलाई 1980 को मोहम्मद रफी का निधन हुआ तो किशोर दा उनके शव के पास जाकर बैठ गए। कुछ देर बार उनके पैर पकड़े और जोर-जोर से रोने लगे।

सरकार के लिए गाने से इनकार किया तो गानों पर लग गया बैन

जब 1975 में इमरजेंसी लगी तो संजय गांधी ने किशोर कुमार से मुंबई में होने वाली एक रैली में गाने को कहा था, लेकिन इमरजेंसी का विरोध कर रहे किशोर दा ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इस बात से नाराज होकर कांग्रेस ने ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन में उनके गाने बजाने पर प्रतिबंध लगा दिया।

कुछ समय बाद मोहम्मद रफी ने इंदिरा गांधी से मुलाकात की। दोनों के अच्छे ताल्लुकात थे। ऐसे में रफी साहब ने इंदिरा गांधी से गुजारिश की कि किशोर दा के गानों पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया जाए। इंदिरा गांधी ने उनकी बात मान ली और गाने फिर से बजाए जाने लगे। जब प्रतिबंध हटा तो किशोर दा इसकी वजह जानना चाहते थे। कई जगह हाथ-पैर मारने के बाद उन्हें पता चला कि मोहम्मद रफी ने बिना किसी को बताए ये मदद की है, जबकि दोनों प्रतिद्वंद्वी थे।

पता लगते ही किशोर दा उनसे मिलने पहुंचे और शुक्रिया अदा किया। रफी साहब ने उन्हें कसम दे दी कि ये बात किसी को मत बताना। जब कुछ सालों बाद मोहम्मद रफी का इंतकाल हुआ तो उन्होंने कसम तोड़ते हुए सबको उनके बड़प्पन का ये किस्सा सुनाया था।

दोस्त नहीं थे तो पेड़ों के नाम रखकर करते थे बातें

1985 में प्रीतीश नंदी को दिए इंटरव्यू में किशोर कुमार ने बताया था कि उनके कोई दोस्त नहीं हैं। लोग उन्हें पागल समझते हैं और उनके घर आने से डरते हैं। ऐसे में उन्होंने अपने घर में कई पेड़ लगाकर उन्हें नाम दिए हैं। वो अकेलेपन में उन्हीं पेड़ों से बातें करते हैं।

1987 तक नए गानों और उनकी ट्यून से नाखुश होकर किशोर दा ने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी। वो रिटायर होकर अपने गांव खंडवा में बसने का प्लान बना रहे थे।

अशोक कुमार के 76वें जन्मदिन पर तोड़ा दम

बड़े भाई अशोक कुमार के 76वें बर्थडे पर 13 अक्टूबर 1987 को किशोर कुमार ने हार्ट अटैक से दम तोड़ दिया। 58 साल के किशोर कुमार की मौत हिंदी सिनेमा के म्यूजिकल दौर का अंत थी। मौत के एक दिन पहले ही उन्होंने आशा भोसले के साथ फिल्म वक्त की आवाज (1988) का गाना गुरू गुरू रिकॉर्ड किया था।

मौत के दिन पत्नी को डराने के लिए कर रहे थे मरने की एक्टिंग

किशोर दा की मौत के दिन उनकी पत्नी लीना चंदावरकर घर पर ही थीं। 13 अक्टूबर की सुबह जब वो उन्हें उठाने गईं, तो देखा चेहरे का रंग उतरा हुआ था। वो घबराकर जैसे ही पास पहुंची तो किशोर दा ने तुरंत आंखें खोलीं और कहा- क्या तुम डर गईं। आज मेरी छुट्टी है। किशोर कुमार जानबूझकर पत्नी को डराने के लिए सांस रोककर लेटे थे।

उस दिन उनकी कई मीटिंग्स थीं, जो घर पर ही होने वाली थीं। लंच करते हुए उन्होंने पत्नी से कहा- आज मैं फिल्म रिवर ऑफ नो रिटर्न देखूंगा। कुछ समय बाद पत्नी लीना ने सुना कि किशोर दा दूसरे कमरे में कुछ फर्नीचर खिसकाकर उनकी जगह बदल रहे हैं। जब वो देखने पहुंचीं तो वो बिस्तर पर गिरे हुए थे। लीना को देखकर उन्होंने कहा- मुझे बहुत कमजोरी लग रही है। लीना डॉक्टर बुलाने के लिए जैसे ही भागते हुए टेलीफोन के करीब गईं तो उन्होंने गुस्से में रोक दिया और कहा, अगर तुम डॉक्टर को बुलाओगी तो मुझे हार्ट अटैक आ जाएगा। लीना को लगा कि वो मजाक कर रहे हैं, लेकिन कुछ पलों बाद ही उनके दिल की धड़कनें रुक गईं। किशोर कुमार का अंतिम संस्कार खंडवा में हुआ था।

.दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔Google Preferred Source CTA

    Source link

    dp

    Related Posts

    'रामायण' के सेट पर बेटी राहा संग दिखे रणबीर:एक्शन सीन की शूटिंग के बीच मस्ती करते नजर आए; आलिया बोलीं- मुझे तुम पर गर्व है

    Hindi News Entertainment Bollywood Ramayan Set Photos: Ranbir Kapoor Fun Moments With Daughter Raha & Alia ‘रामायण’ के सेट पर बेटी राहा संग दिखे रणबीर:एक्शन सीन की शूटिंग के बीच…

    नाबालिग से रेप के दोषी को 10 साल की सजा:बाराबंकी कोर्ट ने 40 हजार रुपए जुर्माना लगाया; 9 साल बाद आया फैसला

    Hindi News Local Uttar pradesh Barabanki Barabanki Court Convicts Minor Rape Accused | 10 Years Jail Sentence नाबालिग से रेप के दोषी को 10 साल की सजा:बाराबंकी कोर्ट ने 40…

    You Missed

    'रामायण' के सेट पर बेटी राहा संग दिखे रणबीर:एक्शन सीन की शूटिंग के बीच मस्ती करते नजर आए; आलिया बोलीं- मुझे तुम पर गर्व है

    • By dp
    • November 5, 2026
    • 0 views
    'रामायण' के सेट पर बेटी राहा संग दिखे रणबीर:एक्शन सीन की शूटिंग के बीच मस्ती करते नजर आए; आलिया बोलीं- मुझे तुम पर गर्व है

    Powerball Winner – Louisiana Ticket Wins $50,000 in Monday’s Drawing

    • By dp
    • November 5, 2026
    • 4 views
    Powerball Winner – Louisiana Ticket Wins ,000 in Monday’s Drawing

    नाबालिग से रेप के दोषी को 10 साल की सजा:बाराबंकी कोर्ट ने 40 हजार रुपए जुर्माना लगाया; 9 साल बाद आया फैसला

    • By dp
    • November 5, 2026
    • 4 views
    नाबालिग से रेप के दोषी को 10 साल की सजा:बाराबंकी कोर्ट ने 40 हजार रुपए जुर्माना लगाया; 9 साल बाद आया फैसला

    Scarlett Johansson Breaks Silence on ‘The Batman Part II’ Role: “It Was Very Hard to Figure Out”

    • By dp
    • November 5, 2026
    • 5 views
    Scarlett Johansson Breaks Silence on ‘The Batman Part II’ Role: “It Was Very Hard to Figure Out”

    पत्नी से विवाद के बाद युवक ट्रेन के आगे पहुंचा:मेरठ में यूपी-112 के पुलिसकर्मियों ने पटरी से खींचकर बचाया

    • By dp
    • November 5, 2026
    • 6 views
    पत्नी से विवाद के बाद युवक ट्रेन के आगे पहुंचा:मेरठ में यूपी-112 के पुलिसकर्मियों ने पटरी से खींचकर बचाया

    DC weather: Cool, cloudy and dry Monday before rain returns later in the week

    • By dp
    • November 5, 2026
    • 6 views
    DC weather: Cool, cloudy and dry Monday before rain returns later in the week