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खेत में धान बिछा, मंडी में 50 हजार बोरी अटकी:अलीगढ़ में 65-70% कटाई योग्य धान अभी खेतों में, धनीपुर मंडी में 50 हजार बोरी की आवक, पर तौल-बिक्री ठपअलीगढ़2 मिनट पहले
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बारिश ने किसानों की खेत से मंडी तक चिंता बढ़ा दी है। शनिवार को दिनभर रिमझिम और तेज हवाओं के बीच कटाई के लिए तैयार खड़ी धान की फसल खेतों में बिछ गई। जिले में अभी करीब 65 से 70 प्रतिशत कटाई योग्य धान खेतों में खड़ा था। बारिश में भीगे और जमीन पर गिरे धा
.खेत में बिछी फसल
खेत में बिछी फसल, दाने की गुणवत्ता पर असर का डर धान की कटाई का समय चल रहा है। किसानों ने बताया कि बारिश से पहले जितनी फसल कट चुकी थी, उसका हिस्सा करीब 25 से 30 प्रतिशत ही है। शेष बड़ी मात्रा में धान कटाई के लिए तैयार खेतों में खड़ा था। तेज हवा और बारिश के चलते पौधे जमीन पर गिर गए। अब इस फसल की कटाई में भी परेशानी होगी। खेत में पड़े धान में नमी बढ़ने से दाने की चमक और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे दाने को मंडी में अपेक्षित भाव मिलना मुश्किल हो सकता है। अलीगढ़ में 1.65 लाख हेक्टेयर में धान कुल 6,54,694 हेक्टेयर कृषि रकवा वाले अपने जिले में वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार जिले में 1,65,247 हेक्टेयर में धान बोया गया था। इसका उत्पादन 4,91,610 मीट्रिक टन और उत्पादकता 29.75 कुंतल प्रति हेक्टेयर रही। इस समय बारिश का असर इसलिए बड़ा है क्योंकि फसल कटाई के दौर में है। धान के अलावा 69,931 हेक्टेयर में बाजरा और 3,996 हेक्टेयर में मक्का भी बोया गया था। इन फसलों में भी जहां कटाई योग्य फसल खेतों में खड़ी थी, वहां बारिश और हवा से पौधे गिरने और दाने में नमी बढ़ने का खतरा है।
तनिष्क प्रताप सिंह, आढ़ती
धनीपुर मंडी में आज भी करीब 50 हजार बोरी धान आया था, जिसमें से काफी नीचे उतर गया और काफी ट्रालियों में खड़ा है। तिरपाल आदि से ढक दिया गया है। पल्लेदारों ने बारिश में काम नहीं किया। संकेत हैं कि आज रविवार को मौसम साफ रहा तो अवकाश में मंडी खोलकर इस माल की तुलाई व बिक्री की जाएगी। ताकि किसानों व आढ़तियों को ज्यादा नुकसान न हो।-तनिष्क प्रताप सिंह, आढ़ती धनीपुर गल्ला मंडी
मंडी में तिरपाल से ढककर रखा गया धान।
50 हजार बोरी मंडी पहुंची, लेकिन नहीं चला काम धनीपुर मंडी में शनिवार को करीब 50 हजार बोरी धान की आवक का अनुमान है। बारिश के कारण पल्लेदारों ने काम नहीं किया। इससे किसानों का धान ट्रॉलियों में ही खड़ा रहा। मंडी प्लेटफॉर्म और आढ़तियों के यहां उतरी उपज को तिरपाल से ढका गया, लेकिन रुक-रुककर होती बारिश के बीच नमी से बचाना चुनौती बना रहा। आढ़तियों का कहना है कि जो धान उनकी दुकानों पर उतर चुका है, उसमें नमी बढ़ने से उन्हें नुकसान हो सकता है। वहीं ट्रॉलियों में खड़े धान को लेकर किसानों की चिंता है। रविवार को मौसम की स्थिति देखते हुए सुबह करीब 10 बजे मंडी खोलने और तौल-बिक्री शुरू करने पर फैसला होने की उम्मीद है। आढ़ती मंडी खोलकर रुका हुआ कारोबार शुरू कराने का प्रयास कर रहे हैं। 72 घंटे में देनी होगी फसल नुकसान की सूचना कृषि विभाग ने अतिवृष्टि और जलभराव से प्रभावित किसानों को फसल नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर देने को कहा है। संयुक्त कृषि निदेशक श्रवण कुमार के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बीमित किसान टोल-फ्री नंबर 14447 पर नुकसान की सूचना दर्ज करा सकते हैं। संबंधित फसल बीमा कंपनी को भी सूचना दी जा सकती है। सूचना देते समय किसान का नाम, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, केसीसी/बैंक खाता, बीमा पॉलिसी नंबर, गांव-तहसील, फसल का नाम, प्रभावित क्षेत्रफल और नुकसान का विवरण उपलब्ध रखना होगा। किसान अपने क्षेत्र के कृषि विभाग के कर्मचारी या अधिकारी को भी नुकसान की जानकारी दे सकते हैं। इधर, बारिश थमने का इंतजार: खेत में बिछी फसल और मंडी में अटकी उपज के बीच अब किसानों की नजर मौसम पर है। रविवार को मंडी में कारोबार शुरू होता है या नहीं और खेतों में बिछी फसल से कितना नुकसान होता है, यह अगले एक-दो दिन में और साफ होगा।
सुमित प्रताप सिंह, किसान
गांव-गांव धान की फसल के साथ-साथ मक्का व बाजरा की फसल पकी हुई कटने को तैयार खड़ी है। मगर इस बारिश ने सब नुकसान कर दिया। जो फसल बारिश में बिछ गई है, उसमें दाना अब बेहद कमजोर निकलेगा और उसका मूल्य भी बाजार में गिरेगा।-सुमित प्रताप सिंह, किसान सिकंदरपुर माछूआ, हरदुआगंज
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