शबाना बोलीं-मुझ पर लिखी कविता जावेद साहब को याद नहीं:अख्तर बोले- कामयाबी पर इतराना नहीं और नाकामी को मेडल नहीं बनाना चाहिए

  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Jaipur
  • Javed Akhtar & Shabana Azmi At Jaipur Poetry Event | Literary Evening

शबाना बोलीं-मुझ पर लिखी कविता जावेद साहब को याद नहीं:अख्तर बोले- कामयाबी पर इतराना नहीं और नाकामी को मेडल नहीं बनाना चाहिएजयपुर5 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

अभिनेत्री शबाना आजमी ने मशहूर लेखक-शायर जावेद अख्तर की ओर से उनके लिए लिखी गई एक कविता का जिक्र किया और कहा कि जावेद साहब को वह कविता अब याद नहीं है। वहीं जावेद अख्तर ने कामयाबी और नाकामी को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सफलता पर इतराना नहीं चाह

.

जयपुर में मशहूर लेखक-शायर जावेद अख्तर और अभिनेत्री शबाना आजमी रविवार को एक खास साहित्यिक शाम का हिस्सा बने। सीतापुरा स्थित इंटरकॉन्टिनेंटल जयपुर में आयोजित ‘पोएट्री एंड कन्वर्सेशन’ में जावेद अख्तर ने अपनी कविताएं, शायरी और गीतों को अपने अंदाज में पेश किया, वहीं शबाना आजमी ने उनके शब्दों का अंग्रेजी में अनुवाद करते हुए उनकी भावनाओं और विचारों को दर्शकों तक पहुंचाया।

कार्यक्रम में जावेद अख्तर की रचनात्मक यात्रा, संघर्ष, लेखन और निजी जिंदगी से जुड़े कई किस्से भी सामने आए।

यह आयोजन दिल्ली के मशहूर रेस्तरां ‘चोर बाजार’ के जयपुर आगमन के मौके पर ईएचवी इंटरनेशनल की ओर से किया गया था। साहित्य, सिनेमा और कला से जुड़े लोगों के लिए यह शाम जावेद अख्तर और शबाना आजमी को करीब से सुनने का खास अवसर रही।

पहले, यहां देखिए इवेंट के PHOTO’S…

शबाना आजमी ने जावेद साहब की कविताओं का अनुवाद किया।शबाना आजमी ने जावेद साहब की कविताओं का अनुवाद किया।जावेद अख्तर ने 10 से ज्यादा नज्म और कविताओं को यहां सुनाया।जावेद अख्तर ने 10 से ज्यादा नज्म और कविताओं को यहां सुनाया।जावेद अख्तर के फैंस ने उन्हें तोहफे भी दिए।जावेद अख्तर के फैंस ने उन्हें तोहफे भी दिए।शबाना जब मंच से नीचे उतरी तो वे अपने परिचितों से मिलने पहुंचीं।शबाना जब मंच से नीचे उतरी तो वे अपने परिचितों से मिलने पहुंचीं।जावेद अख्तर की किताब के अंश पढ़ती हुई नजर आई शबाना आजमी।जावेद अख्तर की किताब के अंश पढ़ती हुई नजर आई शबाना आजमी।जावेद अख्तर और शबाना आजमी ने यहां मंच साझा किया।जावेद अख्तर और शबाना आजमी ने यहां मंच साझा किया।ऑडियंस में काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।ऑडियंस में काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।

‘अनुवाद में खुशबू कहीं न कहीं उड़ जाती है’

कार्यक्रम में शबाना आजमी ने जावेद अख्तर की शायरी के अनुवाद को लेकर दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा कि अनुवाद किसी परफ्यूम को एक शीशी से दूसरी शीशी में डालने जैसा है। ऐसा करते समय उसकी कुछ खुशबू उड़ ही जाती है। इसलिए किसी शायर की रचना को दूसरी भाषा में पेश करना आसान काम नहीं है।

इसके बावजूद शबाना ने जावेद की कविताओं और शायरी का अंग्रेजी में ऐसा भावानुवाद किया कि दर्शक मूल रचना के भाव और अर्थ से जुड़े रहे। एक तरफ जावेद अख्तर अपनी रचनाएं पढ़ते रहे तो दूसरी तरफ शबाना आजमी उनके शब्दों को अंग्रेजी में समझाती रहीं।

दोनों की बातचीत और संवाद ने कार्यक्रम को सिर्फ कविता पाठ न रखकर एक साहित्यिक अनुभव में बदल दिया। जावेद अख्तर ने कहा कि अपनी कामयाबी पर किसी को इतराना नहीं चाहिए और अपने दुख या नाकामी को मेडल नहीं बनाना चाहिए। सिर्फ जिंदगी का धन्यवाद देना चाहिए, जो हमें यह मिली है।

‘इनके शरीर की एक हड्डी में भी रोमांस नहीं है’

जावेद अख्तर के रोमांटिक गीतों और शायरी की चर्चा के दौरान शबाना आजमी ने अपने खास अंदाज में मजेदार किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग उनसे, खासकर महिलाएं, यह कहती हैं कि जावेद साहब इतनी रोमांटिक बातें लिखते हैं तो असल जिंदगी में भी काफी रोमांटिक होंगे। शबाना ने मजाकिया अंदाज में कहा कि इनके शरीर की एक हड्डी में भी रोमांस नहीं है।

इस पर जावेद अख्तर ने भी तुरंत जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो इंसान सर्कस में उल्टा लटकता है, जरूरी नहीं कि वह घर जाकर भी उल्टा ही लटके। जावेद और शबाना की इस नोकझोंक पर दर्शकों के बीच खूब ठहाके गूंजे। शबाना ने कहा कि आप देखिए इन्होंने इतनी सारी नज्में बिना किताब देखें यहां पढ़ी और जो मेरे लिए ‘शबाना’ कविता लिखी है, वह तक याद नहीं है।

19 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे थे जावेद अख्तर

कार्यक्रम के दौरान शबाना आजमी ने जावेद अख्तर की जिंदगी के संघर्ष को भी दर्शकों के सामने रखा। उन्होंने बताया कि 4 अक्टूबर 1964 को एक 19 साल का नौजवान बॉम्बे सेंट्रल स्टेशन पहुंचा था। उसकी जेब में सिर्फ 27 पैसे थे, लेकिन आंखों में बड़े-बड़े सपने थे।

शबाना ने बताया कि जावेद अख्तर ने मुंबई में संघर्ष के दौरान कई मुश्किलें देखीं। उन्होंने फुटपाथ, रेलवे स्टेशनों और कई स्टूडियो के परिसरों में रातें गुजारीं। एक दौर ऐसा भी आया जब उनके पास लगातार तीन दिन तक खाने के लिए कुछ नहीं था और शरीर पर पहने कपड़े भी फटे-पुराने थे।

उन्होंने कहा कि निराशा के उस दौर में जब कोई व्यक्ति हार मान सकता था, जावेद अख्तर ने खुद से कहा कि वह यूं ही मरने के लिए पैदा नहीं हुए हैं। ये दिन बदलेंगे। शबाना ने कहा कि समय बदला भी। 4 अक्टूबर 1964 का वह 19 साल का नौजवान, जिसके पास लगभग कुछ नहीं था। दशकों बाद ऐसी जिंदगी जी रहा था, जिसने भारत को कुछ सबसे यादगार शब्द दिए। आज वही 4 अक्टूबर का दिन है।

‘गुलजार और जावेद के अंदाज-ए-बयां में फर्क’

शबाना आजमी ने जावेद अख्तर और गुलजार के लेखन के अंदाज का भी दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने गुलजार और जावेद अख्तर दोनों से रोमांटिक कुछ लिखने के लिए कहा था।

उन्होंने बताया कि गुलजार साहब ने लिखा- ‘जा जा रे पिया मोरे पिया मोरे, मोरा लागे ना जिया।’ वहीं, उसी धुन पर जावेद अख्तर ने लिखा- ‘बातों से नहीं बोलूं, ओ जा रे जा रे, तू ना मेरा सनम, तू ना मेरा पिया।’

शबाना ने कहा कि यही दोनों के अंदाज-ए-बयां का अंतर है। एक ही भाव को दो अलग रचनाकार किस तरह अपनी-अपनी शैली में सामने रखते हैं, इसका यह बेहतरीन उदाहरण है।

‘मेरा आंगन, मेरा पेड़’ से यादों के आंगन में लौटे जावेद

कार्यक्रम में जावेद अख्तर ने अपनी चर्चित कविता ‘मेरा आंगन, मेरा पेड़’ भी सुनाई। बचपन के घर, आंगन और उस पेड़ के बहाने उन्होंने उम्र के साथ बदलती नजर और यादों को शब्द दिए।जावेद अख्तर ने ‘वो कमरा याद आता है’ कविता भी सुनाई। इसमें उन्होंने उस कमरे को याद किया, जो जिंदगी की धूप, थकान और संघर्ष से लौटे व्यक्ति को अपनी मां की तरह अपने भीतर छुपा लेता है।

जावेद अख्तर ने ‘ये खेल क्या है’ कविता के जरिए जिंदगी और जीत-हार को भी अलग नजरिए से देखा। काले-सफेद मोहरों को देखते हुए वह सवाल करते हैं कि अगर ये सिर्फ लकड़ी के खिलौने हैं तो फिर जीतना क्या और हारना क्या।

दादर का किस्सा और एक हजार रुपए की उम्मीद

जावेद अख्तर ने अपनी जिंदगी के संघर्ष से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि संघर्ष के दिनों में एक बार वह एक हजार रुपए की फीस लेने के लिए दादर गए थे। जेब में बहुत कम पैसे थे और जिस निर्माता के दफ्तर में जाना था, वहां पहुंचने पर पता चला कि दफ्तर पर ताला लगा है।

उस समय उनके सामने बड़ा सवाल था कि बचे हुए पैसों से घर लौटने के लिए ट्रेन का टिकट लें या कुछ खा लें। भूख लगी थी, इसलिए उन्होंने रास्ते में चने खरीदे और दादर से बांद्रा तक पैदल लौटने का फैसला किया। इसी दौरान उन्होंने खुद से एक संकल्प लिया कि एक दिन वह इसी रास्ते से अपनी कार में गुजरेंगे। संघर्ष के दौर में देखा गया यह सपना बाद में सच हुआ।

जावेद अख्तर ने बताया कि करीब चार दशक बाद जब वह अपनी बेटी जोया अख्तर के साथ उसी इलाके से गुजर रहे थे, तो उन्होंने जोया को अपने संघर्ष के दिनों का वही किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि किस तरह कभी उनके पास पैसे नहीं थे और उन्होंने दादर से बांद्रा तक पैदल जाने का फैसला किया था। उनकी बात सुनने के बाद जोया ने मजाकिया अंदाज में ऐसा जवाब दिया कि वह खुद भी निरुत्तर हो गए। जोया ने उन्हें कहा कि उस समय 20 पैसे के चने भी खूब आते होंगे। ::::::::::::::::::: मेरा आंगन, मेरा पेड़

मेरा आंगन कितना कुशादा, कितना बड़ा था

जिसमें मेरे सारे खेल समा जाते थे

और आंगन के आगे था वो पेड़ कि जो मुझसे काफी ऊंचा था

लेकिन मुझको इसका यकीं था

जब मैं बड़ा हो जाऊंगा इस पेड़ की फुंगी भी छू लूंगा

बरसों बाद मैं घर लौटा हूँ

देख रहा हूँ ये आंगन कितना छोटा है

पेड़ मगर पहले से भी थोड़ा ऊंचा है

वो कमरा याद आता है

मैं जब भी ज़िंदगी की चिलचिलाती धूप में तपकर

मैं जब भी दूसरों के और अपने झूठ से थककर

मैं सबसे लड़ के खुद से हार के

जब भी उस एक कमरे में जाता था

वो हल्के और गहरे कत्थई रंगों का इक कमरा वो बेहद मेहरबां कमरा

जो अपनी नर्म मुट्ठी में मुझे ऐसे छुपा लेता था

जैसे कोई मां बच्चे को आंचल में छुपा ले

प्यार से डांटे ये क्या आदत है

जलती दोपहर में मारे-मारे घूमते हो तुम ::::::::::::::::::::::::::

वो कमरा याद आता है

दबीज और खासा भारी कुछ जरा मुश्किल से खुलने वाला

वो शीशम का दरवाजा कि जैसे कोई अक्खड़ बाप

अपने खुरदुरे सीने में शफकत के समुंदर को छुपाए हो

वो कुर्सी और उसके साथ वो जुड़वां बहन उसकी

वो दोनों दोस्त थीं मेरी

वो इक गुस्ताख, मुंहफट आईना जो दिल का अच्छा था

वो बेढंग सी अलमारी जो कोने में खड़ी

इक बूढ़ी अन्ना की तरह आईने को तंबीह करती थी

वो इक गुलदान नन्हा सा बहुत शैतान

उन दिनों पे हंसता था

दरीचा या ज़ेहानत से भरी इक मुस्कुराहट

और दरीचे पर झुकी वो बेल कोई सब्ज़ सरगोशी

किताबें ताक में और शेल्फ पर

संजीदा उस्तानी बनी बैठीं मगर सब मुंतज़िर इस बात की।

LockIconContent blocker

अधूरा नहीं! पढ़िए पूरा! पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर ऐप पर

DB QR Codeएप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंDownload android app - Dainik BhaskarDownload ios app - Dainik Bhaskarपूरी खबर पढ़ें ऐप परप्रीमियम मेंबरशिप है तो लॉगिन करें

Source link

dp

Related Posts

प्रधानाचार्य चयन के खिलाफ 115 याचिकाएं खारिज:हाईकोर्ट का प्रधानाचार्य पदों पर घोषित सूची की याचिका में हस्तक्षेप से इंकार

Hindi News Local Uttar pradesh Prayagraj Allahabad High Court Dismisses 115 Petitions Against Principal Selection प्रधानाचार्य चयन के खिलाफ 115 याचिकाएं खारिज:हाईकोर्ट का प्रधानाचार्य पदों पर घोषित सूची की याचिका…

इनकम टैक्स रेड की खबरों पर भड़कीं रकुल प्रीत सिंह:बोलीं- मेरे ठिकानों पर नहीं हुई छापेमारी; 20 साल की उम्र से भर रही हूं टैक्स

Hindi News Entertainment Bollywood Rakul Preet Singh Denies IT Raid Reports | Official Statement इनकम टैक्स रेड की खबरों पर भड़कीं रकुल प्रीत सिंह:बोलीं- मेरे ठिकानों पर नहीं हुई छापेमारी;…

You Missed

Nuts & Bolts: Matching up with the Flyers | Tampa Bay Lightning

  • By dp
  • October 5, 2026
  • 3 views
Nuts & Bolts: Matching up with the Flyers | Tampa Bay Lightning

प्रधानाचार्य चयन के खिलाफ 115 याचिकाएं खारिज:हाईकोर्ट का प्रधानाचार्य पदों पर घोषित सूची की याचिका में हस्तक्षेप से इंकार

  • By dp
  • October 5, 2026
  • 2 views
प्रधानाचार्य चयन के खिलाफ 115 याचिकाएं खारिज:हाईकोर्ट का प्रधानाचार्य पदों पर घोषित सूची की याचिका में हस्तक्षेप से इंकार

Justin Timberlake, Jessica Biel Share Never-Before-Seen Photos on 14th Wedding Anniversary

  • By dp
  • October 5, 2026
  • 3 views
Justin Timberlake, Jessica Biel Share Never-Before-Seen Photos on 14th Wedding Anniversary

इनकम टैक्स रेड की खबरों पर भड़कीं रकुल प्रीत सिंह:बोलीं- मेरे ठिकानों पर नहीं हुई छापेमारी; 20 साल की उम्र से भर रही हूं टैक्स

  • By dp
  • October 5, 2026
  • 3 views
इनकम टैक्स रेड की खबरों पर भड़कीं रकुल प्रीत सिंह:बोलीं- मेरे ठिकानों पर नहीं हुई छापेमारी; 20 साल की उम्र से भर रही हूं टैक्स

Michigan Lottery’s Excellence in Education award honors state educators

  • By dp
  • October 5, 2026
  • 5 views
Michigan Lottery’s Excellence in Education award honors state educators

सुप्रीम कोर्ट ने एक्टर राजपाल से कहा-आपकी जगह जेल में:घमंड को सही जगह दिखानी होगी, पता होना चाहिए कब मुंह खोलना है

  • By dp
  • October 5, 2026
  • 5 views
सुप्रीम कोर्ट ने एक्टर राजपाल से कहा-आपकी जगह जेल में:घमंड को सही जगह दिखानी होगी, पता होना चाहिए कब मुंह खोलना है