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भाजपा संगठन और विधायकों में टिकट को लेकर मारामारी:बुलंदशहर में विधानसभा चुनावों के लिए कई पदाधिकारियों ने ठोकी तालप्रदुमन कौशिक | बुलंदशहर7 मिनट पहले
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आगामी विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट के बीच बुलंदशहर जिले की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। जिले की सभी सातों विधानसभा सीटों पर मौजूदा विधायकों के सामने भाजपा संगठन के पदाधिकारियों ने ही एक बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। वर्तमान जिलाध्यक्ष से लेकर तमाम जिला और क्षेत्रीय स्तर के पदाधिकारी इन सीटों से विधानसभा चुनाव के लिए टिकट की मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं, जिससे कई विधायकों की नींद उड़ गई है।
बुलंदशहर सदर सीट पर दो पूर्व जिलाध्यक्षों हिमांशु मित्तल और अनिल सिसोदिया ने अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है, जिससे वर्तमान विधायक प्रदीप चौधरी की टेंशन काफी बढ़ गई है। वहीं, सिकंदराबाद विधानसभा सीट पर वर्तमान जिलाध्यक्ष विकास चौहान के साथ-साथ पूर्व जिला मंत्री ठाकुर अर्जुन सिंह ने भी ताल ठोक दी है, जिससे विधायक लक्ष्मीराज सिंह के खेमे में हलचल मची हुई है।
बुलंदशहर सदर सीट पर दो पूर्व जिलाध्यक्षों हिमांशु मित्तल और अनिल सिसोदिया ने अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है।
अनूपशहर विधानसभा सीट पर भाजपा जिला महामंत्री दीपक दुल्हेरा और आरएसएस सह प्रभारी प्रोफेसर अरुण शर्मा कौन्दू ने विधायक संजय शर्मा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शिकारपुर विधानसभा सीट पर पूर्व प्रदेश प्रवक्ता डॉ. चन्द्रमोहन, पूर्व जिलाध्यक्ष डीके शर्मा और जिला महामंत्री ऋषि शर्मा मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
चूंकि इस सीट से वर्तमान विधायक अनिल शर्मा का हाल ही में निधन हो चुका है, ऐसे में उनके बेटे कुश शर्मा भी यहाँ से अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। इसके अलावा, खुर्जा विधानसभा सीट से जिला महामंत्री संतोष बाल्मीकि और पूर्व प्रदेश मंत्री अमित वाल्मीकि की सक्रियता से विधायक मीनाक्षी सिंह के खेमे में खलबली मची है।
अन्य सीटों पर भी संगठनात्मक पदाधिकारियों का जोर देखा जा रहा है। डिबाई विधानसभा सीट से जिला उपाध्यक्ष पवन लोधी मैदान में हैं, जबकि स्याना विधानसभा सीट से सांसद भोला सिंह के प्रतिनिधि धर्मेंद्र काली ने अपनी स्थिति मजबूत की है।
जिलाध्यक्ष विकास चौहान का कहना है कि चुनाव में टिकट मांगना हर पार्टी कार्यकर्ता का लोकतांत्रिक और मौलिक अधिकार है। कोई भी कार्यकर्ता टिकट की मांग कर सकता है। पार्टी हाईकमान सर्वे और रणनीति के आधार पर जिसे भी अपना उम्मीदवार बनाएगा, पूरा संगठन और सभी कार्यकर्ता मिलकर उसे मजबूती के साथ चुनाव लड़ाएंगे।
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