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भक्तों की लगती थी भीड़, गंगा कटान से गिरा वायरल-आश्रम:माघ मेला में होता था विशाल भंडारा, दूर-दूर से आते हैं भक्त, 60 घंटे से शिष्य का नहीं मिला सुरागप्रयागराज | अभिषेक सिंह4 मिनट पहले
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प्रयागराज के झूंसी इलाके में गंगा की बीच धारा में बना संत बजरंग दास बाबा का तीन मंजिला से अधिक ऊंचा आश्रम ढहकर नदी में समा गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका करीब 50 फीट ऊंचा यह आश्रम कभी भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र हुआ करता था। हादसे को 60 घंटे से
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दैनिक भास्कर की टीम जब इस आश्रम तक जाने के लिए पहुंची तो काफी दूर से वहां तक जाने का कोई मार्ग नहीं था। आश्रम गिरने के बाद पूरी तरह जलमग्न हो गया था। आसपास के रास्ते भी दलदल होने की वजह से बंद थे, वहां तक पहुंचना मुश्किल था। एनडीआरएफ की टीम को भी रेस्क्यू करने में दिक्कत हो रही है।
स्थानीय लोगों से बातचीत में पता चला कि बाबा करीब 20 से 25 साल पहले नागवासुकी मंदिर के पास रहते थे। लेकिन घरेलू कुछ विवाद की वजह से वह दूसरी तरफ झूसी तरफ गंगा की बीच धारा में जाकर रहने लगे। उन्होंने अपना आश्रम बनाया और धीरे-धीरे यहां भक्तों के आने-जाने का केंद्र बन गया। उनके काफी भक्त दूर-दूर से आते हैं।
स्थानीय निवासी प्रेमचन्द्र निषाद ने बताया की शाम तक हम लोग बैठे थे आश्रम खड़ा था. फिर रात को पता चला बाबा का आश्रम गिर गया।
भक्तों की लगती थी भीड़, होता था भंडारा
लोगों ने बताया आश्रम तक पहुंचने के लिए नाव की व्यवस्था रहती थी आने और जाने के लिए भी। बाबा जब भी आते और जाते थे नाव से आते-जाते थे और वह नाविक को पैसा भी देते थे। माघ मेले और महाकुंभ के दौरान यहां हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते थे। बड़े स्तर पर भंडारे का आयोजन भी होता था। लोगों ने बताया कि महाराज जी के भक्त उन्हें बहुत शक्तिशाली मानते थे। महाराज जी अपने पैसों से वहां तक पहुंचने के लिए सारी व्यवस्था करते थे। भक्तों के लिए लाइट, बिजली, पानी सब कुछ वहां उपलब्ध हुआ करता है।
स्नेथानीय निवासी दादा निषाद ने बताया की बाबा के भक्त इनको बहुत शक्तिशाली मानते थे, मेला के समय बहुत भक्त आते थे भीड़ लगी रहती थी भंडारा होता था।
तेज बहाव के कारण नहीं हटाया जा सका मलबा
हादसे के बाद से ही बचाव टीमें लापता व्यक्ति की तलाश कर रही हैं। घटनास्थल पर गंगा का बहाव तेज होने के कारण मलबा हटाने में परेशानी हो रही है। इसी वजह से आश्रम के मलबे के नीचे दबे व्यक्ति तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। बचाव दल नदी में आसपास के इलाकों में भी लगातार तलाश कर रहे हैं।
2 तस्वीरें देखिए…
आश्रम ढहने से उसमें रखा सामान नदी में बह गया।
ये संत बजरंग दास हैं। बाढ़ के दौरान आश्रम के ऊपर जाने के लिए सीढ़ी लगाई गई थी।
शुक्रवार शाम 7 बजे हुआ था हादसा
शुक्रवार शाम करीब 7 बजे संत बजरंग दास का तीन मंजिला आश्रम अचानक ढहकर गंगा नदी में समा गया था। हादसे के समय तीन शिष्य आश्रम में सामान लेने गए थे। इनमें दो शिष्य मलबे में दबकर घायल हो गए, जबकि 40 वर्षीय हरीश सिंह लापता हो गया। पुलिस और NDRF की टीम ने दोनों घायल शिष्यों को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया था। इसके बाद से हरीश सिंह की तलाश जारी है।
20 साल पहले गंगा की रेती पर बनवाया था आश्रम
संत बजरंग दास करीब 5 दशक से साधना कर रहे हैं। करीब 20 साल पहले प्रयागराज के झूंसी क्षेत्र में बदरा सनौटी गांव के सामने गंगा की रेती पर आश्रम बनवाया था। गंगा का जलस्तर बढ़ने और जमीन का कटान होने से आश्रम की नींव कमजोर हो गई थी। खतरे को देखते हुए बजरंगदास आश्रम छोड़कर मोटरबोट में रहने लगे थे।
यह तस्वीर पुरानी है। आश्रम को कटान से बचाने के लिए प्रशासन ने इंतजाम किए थे।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था आश्रम
करीब 70 वर्षीय संत बजरंग दास ‘मचान वाले बाबा’ के नाम से मशहूर हैं। गंगा नदी के बीच करीब 50 फीट ऊंचाई पर बना उनका आश्रम सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। संत इसी आश्रम में रहते थे। हालांकि, बीते दिनों गंगा में बाढ़ आने के बाद प्रशासन ने उन्हें वहां से दूसरी जगह शिफ्ट करा दिया था। इसके बावजूद आश्रम में सामान लेने पहुंचे उनके शिष्य हादसे का शिकार हो गए।
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