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नोएडा में पहली बार नई तकनीक से हटाया ब्लॉकेज:76 साल की महिला को मिली राहत, कैल्शियम से बंद हो गई थी धमनी, शॉकवेव से जमाव हटाकर लगाया स्टेंटनोएडा3 मिनट पहले
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मेट्रो अस्पताल में सर्जरी के दौरान डाक्टर व टीम।
नोएडा के सेक्टर-11 स्थित मेट्रो हार्ट इंस्टीट्यूट में 76 साल की महिला के हार्ट की नस में गंभीर ब्लॉकेज का इलाज नई तकनीकी से किया गया। अस्पताल के अनुसार, भारत में पहली बार इंट्रावैस्कुलर लिथोट्रिप्सी IVL तकनीक का इस्तेमाल कर यह सर्जरी की गई। महिला के
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इस प्रक्रिया को मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के कार्डियक कैथ लैब के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और ग्रुप डायरेक्टर डॉ. समीर गुप्ता के नेतृत्व में किया गया।
शॉकवेव से कैल्शियम के कठोर जमाव को किया नरम डॉ समीर गुप्ता ने बताया कि महिला के हार्ट की बाईं मुख्य धमनियों में से एक लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग (LAD) आर्टरी के शुरुआती हिस्से में कैल्शियम का काफी जमाव था। इस वजह से नस सिकुड़ गई थी। ऐसे मामलों में बैलून को पूरी तरह फैलाना मुश्किल होता है। इससे स्टेंट भी सही तरीके से नहीं फैल पाता।
इस समस्या के समाधान के लिए डॉक्टरों ने इंट्रावैस्कुलर लिथोट्रिप्सी (IVL) तकनीक का इस्तेमाल किया। इसमें नस के अंदर नियंत्रित शॉकवेव पहुंचाई जाती हैं, जो कैल्शियम के कठोर जमाव को तोड़ने और उसे संशोधित करने में मदद करती हैं। इससे स्टेंट लगाने के लिए नस को तैयार किया जाता है।
स्टेंट की स्थिति जांचने के लिए की गई OCT जांच इस उपचार में InnvoLith के 150-पल्स डुअल-एमिटर सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। इसमें एक कैथेटर के जरिए नस के कैल्शियम प्रभावित हिस्से तक शॉकवेव पहुंचाई जाती हैं। इसके बाद संकुचित हिस्से में स्टेंट लगाया गया।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (OCT) जांच की गई। इससे नस के अंदर स्टेंट की स्थिति और उसके फैलाव को देखा गया। अस्पताल के अनुसार, जांच में स्टेंट का अच्छा फैलाव और नस की दीवार के साथ उसका बेहतर संपर्क पाया गया।
जटिल मामलों में मददगार हो सकती है तकनीक डॉ. समीर गुप्ता ने बताया कि नस में कैल्शियम का अत्यधिक जमाव होने पर एंजियोप्लास्टी और स्टेंट लगाने में मुश्किल आ सकती है। इस मामले में नई तकनीक से कैल्शियम को संशोधित करने में मदद मिली और स्टेंट लगाने की प्रक्रिया सफल रही।
मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन डॉ. पुरुषोत्तम लाल ने कहा कि अस्पताल में इस तकनीक का सफल इस्तेमाल गंभीर ब्लॉकेज वाले मरीजों के इलाज में आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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