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रॉकेट्री कप में निरमा यूनिवर्सिटी और एमजीआर इंस्टीट्यूट विजेता:चार दिन में 43 कैनसैट और 18 मॉडल रॉकेट लॉन्च; 17 राज्यों की 76 छात्र टीमों ने लिया हिस्सासूर्य प्रकाश राय | कुशीनगरकुछ ही क्षण पहले
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कुशीनगर के सेवरही क्षेत्र के पिपराघाट जंगलीपट्टी में नारायणी नदी के तट पर आयोजित इन-स्पेस नारायणी रॉकेट्री कप 2026 का मंगलवार शाम 5 बजे समापन हो गया। मॉडल रॉकेट्री प्रतियोगिता में अहमदाबाद की निरमा यूनिवर्सिटी ने पहला स्थान हासिल किया।
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वहीं, कैनसैट इंडिया स्टूडेंट कंप्टीशन में चेन्नई के डॉ. एमजीआर एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की टीम विजेता रही। 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक चली प्रतियोगिता में देश के 17 राज्यों की 76 छात्र टीमों ने हिस्सा लिया।
कैनसैट में भुवनेश्वर और बेंगलुरु की टीम दूसरे-तीसरे स्थान पर
कैनसैट प्रतियोगिता में भुवनेश्वर की सीवी रमन ग्लोबल यूनिवर्सिटी दूसरे और बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग तीसरे स्थान पर रहा। मॉडल रॉकेट्री में कोयंबटूर के करुण्या इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज ने दूसरा और दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
चार टीमों को मिले विशेष अवार्ड
कैनसैट प्रतियोगिता में जम्मू की सेंट्रल यूनिवर्सिटी को बेस्ट टीम और बिट्स पिलानी के हैदराबाद कैंपस को बेस्ट डिजाइन अवार्ड मिला। मॉडल रॉकेट्री में मुंबई के द्वारकादास जे. संघवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को बेस्ट टीम और पुणे के पिंपरी चिंचवड़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को बेस्ट डिजाइन अवार्ड दिया गया।
दोनों प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान हासिल करने वाली टीमों को ईवी सोसाइटी बेंगलुरु की ओर से पुरस्कृत किया गया। आईटेलीमैटिक्स सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड प्रतियोगिता का उद्योग साझेदार रहा।
43 कैनसैट और 18 मॉडल रॉकेट लॉन्च किए
इन-स्पेस की तीसरी कैन-7यूसेट इंडिया स्टूडेंट कंप्टीशन और दूसरी नेशनल मॉडल रॉकेट्री इंडिया स्टूडेंट कंप्टीशन में विद्यार्थियों ने उपकरणों के डिजाइन, निर्माण और परीक्षण की प्रक्रिया में हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के दौरान कुल 43 कैनसैट और 18 मॉडल रॉकेट लॉन्च किए गए। इनके प्रदर्शन का मूल्यांकन इसरो, डीआरडीओ, इन-स्पेस, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञों की समितियों ने किया।
इन-स्पेस के निदेशक (प्रमोशन निदेशालय) डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों के समर्पण और सालभर की मेहनत से प्रतियोगिता का यह संस्करण सफल रहा। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी क्षमता परखने और व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर मिलता है।
इसरो के पूर्व एसोसिएट निदेशक और मॉडल रॉकेट्री मूल्यांकन समिति के प्रमुख रॉय एम. चेरियन ने विद्यार्थियों को डिजाइन में लगातार सुधार करने और उसके व्यावहारिक पहलुओं पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि रॉकेट्री और उपग्रह प्रणालियां जटिल इंजीनियरिंग प्रणालियां हैं। इनमें गाइडेंस, संचार और नियंत्रण जैसे कई तकनीकी विषयों का समन्वय जरूरी होता है।
क्षेत्र में स्थायी अंतरिक्ष प्रयोग केंद्र बनाने की जताई आकांक्षा
देवरिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद और कार्यक्रम के मुख्य आयोजक शशांक मणि त्रिपाठी ने क्षेत्र में स्थायी अंतरिक्ष प्रयोग केंद्र स्थापित करने की आकांक्षा जताई। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय युवाओं को पूरे साल रॉकेट्री और वैज्ञानिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल सकेगा।
सांसद की पहल पर कुशीनगर में इस प्रतियोगिता का आयोजन 2025 से किया जा रहा है। पिछले साल 24 कैनसैट और 13 मॉडल रॉकेट लॉन्च किए गए थे। इस साल इनकी संख्या बढ़कर क्रमशः 43 और 18 हो गई। यानी एक साल में कैनसैट लॉन्च 19 और मॉडल रॉकेट लॉन्च 5 बढ़े हैं।
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