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टक्कर रोकने को रामगढ़ताल में बनाएंगे कई रूट:बोट, फेरी व क्रूज के लिए किया जाएगा डिमार्केशनगोरखपुर2 घंटे पहले
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रामगढ़ताल में किसी तरह की टक्कर न होने पाए, इसके लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) ताल में डिमार्केशन कराएगा। क्रूज, स्पीड बोट, साधारण बोट और भविष्य में चलने वाली फेरी के लिए अलग-अलग रूट होगा। इससे लोग सुरक्षित और निश्चिंत होकर ताल में रोमांच का अनुभव
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वर्तमान में रामगढ़ताल में करीब आधा दर्जन प्लेटफार्म से स्पीड मोटर बोट का संचालन हो रहा है। इसके अलावा क्रूज भी पर्यटकों को सैर करा रहा है। अब फेरी सेवा शुरू होने पर ताल में जल परिवहन की गतिविधियां और बढ़ जाएंगी। ऐसे में सभी जलयानों के लिए एक ही जलक्षेत्र में बिना निर्धारित व्यवस्था के संचालन करना जोखिम भरा हो सकता है। GDA इसी समस्या को देखते हुए ताल का सीमांकन कराने जा रहा है।
रामगढ़ताल में बोटिंग आदि के लिए डिमार्केशन किया जाएगा।
सीमांकन के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्रूज किस निर्धारित मार्ग पर चलेगा, अलग-अलग प्लेटफार्म से संचालित होने वाली स्पीड मोटर बोट के लिए कौन सा रूट रहेगा और फेरी का संचालन किस रास्ते से होगा। इसके लिए जलक्षेत्र को चिह्नित किया जाएगा, ताकि हर जलयान निर्धारित मार्ग पर ही चले। इससे एक-दूसरे के रास्ते में आने और अचानक टकराने की आशंका कम होगी। GDA की योजना केवल रूट निर्धारित करने तक सीमित नहीं है। सीमांकन की व्यवस्था लागू होने के बाद इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का भी प्रविधान किया जाएगा। यानी कोई भी बोट संचालक अपनी सुविधा के अनुसार निर्धारित मार्ग से अलग संचालन नहीं कर सकेगा। इससे अलग-अलग प्लेटफार्म से संचालित होने वाली बोटों पर भी नियंत्रण रखने में आसानी होगी।
बोट, क्रूज एवं फेरी को लेकर अलग-अलग रूट बनाए जाएंगे।
बोट हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर बढ़ी गंभीरता
करीब दो महीने पहले रामगढ़ताल में हुए बोट हादसे के बाद ताल में जलयानों के संचालन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई। अभी बोट और क्रूज के संचालन के बीच फेरी सेवा भी शुरू होने जा रही है। ऐसे में भविष्य में जलक्षेत्र में भीड़ बढ़ने की संभावना है।
प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने बताया कि रामगढ़ताल में पर्यटन और जल परिवहन की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में शुरुआत से ही इनके संचालन की स्पष्ट व्यवस्था बनाना जरूरी है। सीमांकन से न केवल पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि जल परिवहन भी व्यवस्थित होगा।
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