- Hindi News
- Local
- Uttar pradesh
- Ayodhya
- Ayodhya Ram Mandir Trust Meeting Live Updates Champat Rai Anil Mishra Resignation Srjbtk SIT Fraud Photo Video
राम मंदिर चढ़ावा चोरी- ट्रस्ट की बड़ी बैठक आज:चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर फैसला होगा; जानिए 5 बड़े एजेंडेअयोध्या6 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आज, 6 जुलाई को पहली बैठक है। दोपहर 3 बजे मंदिर परिसर में ही बैठक होगी। ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास इसकी अध्यक्षता करेंगे और कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि
.
ट्रस्ट के सदस्य बहुमत के आधार पर फैसला लेंगे कि चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर किया जाए या नहीं? सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर होना तय है। 5 फरवरी 2020 को बने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हर बैठक को महासचिव चंपत राय ही लीड करते थे।
बैठक बुलाने की अधिकृत सूचना देने से लेकर एजेंडा तक की जानकारी वही देते थे। श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों में घिरे चंपत राय ने 26 जून को महासचिव पद से इस्तीफा दिया था। उनके साथ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दिया था। दोनों इस्तीफों की पुष्टि कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने की थी। इसी आपात स्थिति को लेकर ट्रस्ट ने बैठक बुलाई है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच पूरी होने पर SIT 15 जुलाई के बाद FIR दर्ज करा सकती है। मुकदमे में चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी बनाया जा सकता है।
बैठक में ट्रस्टी दिनेंद्र दास शामिल नहीं होंगे
ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्टी दिनेंद्र दास शामिल नहीं होंगे। उन्होंने बताया- वह बाहर रहेंगे, लेकिन बैठक में सभी से संपर्क में रहेंगे। राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों का मामला है और बैठक में सदस्य जो भी निर्णय लेंगे, वही सभी को मान्य होगा।
गोविंद देव गिरी बोले- घटना से लज्जित हूं, न्यास से एक रुपया भी नहीं लिया
बैठक से दो दिन पहले शनिवार देर शाम ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी अयोध्या पहुंचे। रविवार को उन्होंने पदाधिकारियों, संत-महात्माओं और अन्य लोगों से मुलाकात की। गोविंद देव ने चिट्ठी जारी कर चढ़ावा चोरी मामले पर सफाई दी है।
- चोरी की घटना से आहत, दुखी और लज्जित हूं। खर्च सीधे बैंक के माध्यम से किए जाते थे। मैं कथा के लिए बाहर रहता था। मेरा निवास पुणे में है। मैं अयोध्या महीने-डेढ़ महीने में ही आता था।
- मैंने कभी भी ट्रस्ट में न्यासी या कोषाध्यक्ष बनने का प्रयास या आग्रह नहीं किया। दानपात्र की राशि गिनने की प्रक्रिया से मेरा कभी कोई संबंध नहीं रहा।
- चोरी कितनी हुई, कब और कैसे हुई, यह जांच का विषय है। अपराधी चाहे कितना भी बड़ा व्यक्ति क्यों न हो, उसके नाम या पद की परवाह किए बिना कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
मोजे में नोट छिपाकर ले जाते थे आरोपी, डिलीट CCTV पुलिस ने रिकवर किए
चढ़ावा चोरी मामले में आरोपी मोजों और जेब में नोट छिपाकर ले जाते थे। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने IT एक्सपर्ट की मदद से डिलीट किए गए CCTV फुटेज रिकवर कर लिए हैं। फुटेज में आरोपी चोरी करते दिखे हैं। हालांकि, आरोपियों के चेहरे साफ नहीं दिख रहे हैं। पुलिस फुटेज की क्वालिटी बेहतर कराने में जुटी है।
ट्रस्ट में नए सदस्य को शामिल करने या हटाने का क्या है नियम
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नए सदस्य को शामिल करने या हटाने के मुख्य नियम ट्रस्ट डीड, बायलॉज और Indian Trusts Act, 1882 के प्रावधानों पर आधारित हैं। ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हो सकते हैं। इनमें 3 पदेन और 12 आजीवन सदस्य थे। आजीवन ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र का अगस्त, 2025 में निधन हो चुका है। इसके चलते एक पद पहले से खाली है। महासचिव चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा इस्तीफा दे चुके हैं।
ट्रस्टी को हटाने के लिए दो तिहाई बहुमत जरूरी
कोई ट्रस्टी, अगर ट्रस्ट के हितों के खिलाफ काम करता है, तो उसे दो-तिहाई बहुमत से हटाया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए पहले ट्रस्टी को कारण बताओ नोटिस देना अनिवार्य है। उन्हें ट्रस्ट सदस्यों के सामने अपना पक्ष रखने का मौका देना होगा। फिर ट्रस्ट इस पर अपना निर्णय लेता है।
इसी तरह किसी ट्रस्टी के इस्तीफा देने का भी नियम तय है। ट्रस्टी कम से कम 1 महीने का लिखित नोटिस देकर इस्तीफा दे सकता है। सिर्फ इस्तीफा भर देने से पद समाप्त नहीं होता। ट्रस्ट इसे रिकॉर्ड करता है और अगली बैठक में विचार करके स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है।
मतलब 6 जुलाई को होने वाली बैठक में ट्रस्टी चंपत राय और डॉ अनिल मिश्रा के इस्तीफे को स्वीकार या अस्वीकार दोनों किया जा सकता है। वर्तमान में बचे हुए 12 ट्रस्टी मिलकर इस पर निर्णय लेंगे। दो-तिहाई बहुमत के लिए 8 सदस्यों का किसी एक बिंदु पर सहमत होना जरूरी होगा।
नए ट्रस्टी को शामिल करना, ये ट्रस्ट बोर्ड का अधिकार
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में किसी नए सदस्य को शामिल करने का भी प्रावधान तय है। इस पर भी निर्णय ट्रस्ट बोर्ड को लेना होगा। सिर्फ केंद्र और राज्य सरकार की ओर से नामित सदस्यों पर ही बोर्ड की अधिक भूमिका नहीं रहती है।
सिर्फ एक शर्त है कि स्थायी या नामित सदस्य हिंदू धर्मावलंबी हो। नए सदस्य का चयन ट्रस्ट डीड और Indian Trusts Act (धारा 73-74) के अनुसार दो-तिहाई बहुमत के आधार पर ही हो सकता है।
कब बुला सकते हैं ट्रस्ट की बैठक
ट्रस्ट की बैठक बुलाने का प्रावधान भी महासचिव को सौंपा गया है। सिर्फ विशेष स्थिति में अन्य जिम्मेदार सदस्य को ये जिम्मेदारी सौंपने का प्रावधान जोड़ा गया है। इसके तहत महासचिव चंपत राय की बजाय कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि को ये जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बोर्ड को ट्रस्ट डीड में संशोधन करने का भी अधिकार है, हालांकि मूल ढांचे को सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले और कानूनों के अनुरूप ही रखना होगा।
बैठक में शामिल होने के लिए स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती रविवार दोपहर अयोध्या पहुंचे।
ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और डॉ अनिल मिश्रा को भी आमंत्रण
ट्रस्ट बोर्ड से भले ही चंपत राय और डॉ अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। लेकिन, इस्तीफा स्वीकार होने तक वे तकनीकी रूप से ट्रस्टी माने जाएंगे। यही कारण है कि ट्रस्ट की बैठक में उन्हें भी बुलावा भेजा गया है।
ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास भी इलाज कराकर लखनऊ से अयोध्या लौट चुके हैं। उनकी सेहत में सुधार है। बैठक की अध्यक्षता वे ही करेंगे।
बीमार होने के चलते संस्थापक ट्रस्ट सदस्य के. परासरण शायद ही अयोध्या आ सकें। ऐसे में उनके ऑनलाइन बैठक में शामिल होने की बात सामने आई है। इसी तरह यदि किसी कारण दूसरे सदस्य भी अयोध्या नहीं पहुंच पाएंगे तो, वे भी ऑनलाइन इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। —————————-
यह खबर भी पढ़ें –
राम मंदिर चढ़ावा चोरी, RSS बोला-दोषियों को कड़ी सजा मिले: करोड़ों भक्तों का भरोसा बचाना जरूरी
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने शुक्रवार को पहली बार बयान दिया। सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने वीडियो जारी कर कहा- रामलला मंदिर में रखे दानपात्रों में जमा राशि की चोरी दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे रामभक्तों की भावनाओं और श्रद्धा को आघात पहुंचा है। उनका भरोसा बचाना जरूरी है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें कठोर दंड मिलना चाहिए। पढ़ें पूरी खबर…
अधूरा नहीं! पढ़िए पूरा! पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर ऐप पर
एप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करें
पूरी खबर पढ़ें ऐप परप्रीमियम मेंबरशिप है तो लॉगिन करें
Source link



