सतलज के लिए दिलजीत ने 45 सेकेंड में हामी भरी:OTT से फिल्म हटाए जाने के बीच डायरेक्टर हनी त्रेहान बोले- फिल्म बनाने से बड़ा चैलेंज रिलीज करना

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सतलज के लिए दिलजीत ने 45 सेकेंड में हामी भरी:OTT से फिल्म हटाए जाने के बीच डायरेक्टर हनी त्रेहान बोले- फिल्म बनाने से बड़ा चैलेंज रिलीज करना2 घंटे पहलेलेखक: अमित कर्ण

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मावधिकार कार्यकर्ता पर बनी दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलज विवादों से घिर गई है। सेंसर विवाद के चलते इसे 2 जुलाई को OTT प्लेटफॉर्म जी 5 पर रिलीज किया गया था, हालांकि रिलीज के महज 3 दिन बाद ही इसे अचानक ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। इसी बीच फिल्म के डायरेक्टर हनी त्रेहान ने दैनिक भास्कर से फिल्म और विवाद पर बात की। उनका कहना है कि दिलजीत ने कहानी सुनते ही महज 45 सेकेंड में फिल्म करने के लिए हामी भर दी थी।

पढ़िए, ‘सतलज’ के निर्देशक हनी त्रेहान से हुई दैनिक भास्कर की एक्सक्लूसिव बातचीत-

‘फिल्म बनाना मुश्किल नहीं था, लेकिन उसका रिलीज होना सबसे बड़ा संघर्ष बन गया’- हनी त्रेहान

फिल्म सतलज का पहले नाम पंजाब 95 रखा गया था, हालांकि सेंसर बोर्ड ने इस नाम पर आपत्ति जताई। 2023 में ही फिल्म बन चुकी थी, लेकिन सेंसर बोर्ड ने कई कट्स का सुझाव देने के बावजूद इसे पास नहीं किया। इस पर डायरेक्टर हनी त्रेहान ने कहा, ‘मेरे लिए ‘सतलज’ (पहले पंजाब 95) बनाना बड़ी चुनौती नहीं था। असली संघर्ष तब शुरू हुआ, जब इसे दर्शकों तक पहुंचाने की बारी आई। शूटिंग से लेकर पोस्ट-प्रोडक्शन तक ऐसा कोई मौका नहीं आया, जब मुझे लगा हो कि इस कहानी को बनाने से कोई रोक रहा है। हमने पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत पूरी की। जहां-जहां शूटिंग हुई, वहां स्थानीय प्रशासन का पूरा सहयोग मिला। लेकिन फिल्म पूरी होने के बाद थिएटर रिलीज के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया और यही इंतजार धीरे-धीरे सबसे बड़ा संघर्ष बन गया।’

दिलजीत दोसांझ के साथ हनी त्रेहान।दिलजीत दोसांझ के साथ हनी त्रेहान।

‘करीब साढ़े तीन साल तक यह फिल्म रिलीज का इंतजार करती रही। इतने लंबे समय में कई बार लोगों ने मुझसे पूछा कि आखिर दिक्कत क्या है। सच कहूं तो आज भी मेरे पास उसका कोई निश्चित जवाब नहीं है। मैं इसे कभी व्यक्तिगत या वैचारिक विरोध के तौर पर नहीं देखता। मुझे हमेशा लगा कि शायद उनकी अपनी कुछ प्रक्रियाएं या मजबूरियां रही होंगी। लेकिन एक फिल्मकार के तौर पर इतना जरूर महसूस हुआ कि जब कोई कहानी इतने लंबे समय तक दर्शकों से दूर रह जाती है, तो उसके साथ जुड़े सभी लोगों की परीक्षा होती है।’

‘दिलजीत दोसांझ ने 45 सेकेंड में मिलने के लिए हामी भर दी’- हनी त्रेहान

फिल्म में दिलजीत को कास्ट करने पर हनी कहते हैं, ‘कोविड का दौर था। मैंने दिलजीत दोसांझ को सिर्फ एक छोटा-सा संदेश भेजा कि वह भारत में हैं या अमेरिका। पता चला कि उसी रात उनकी कैलिफोर्निया की फ्लाइट थी। मैंने सोचा था कि शायद मुलाकात नहीं हो पाएगी, लेकिन कुछ ही सेकेंड में उनका जवाब आया कि अगर समय निकला तो जरूर मिलेंगे। शाम को वह एयरपोर्ट जाते हुए सीधे मेरे पास पहुंचे। उनके पास बहुत कम समय था, लेकिन उन्होंने बिना किसी जल्दबाजी के पूरी बात सुनी। उस मुलाकात में मुझे एक बड़े सितारे से ज्यादा एक संवेदनशील इंसान दिखाई दिया, जो कहानी को समझना चाहता था।’

‘मैंने सबसे पहले यही स्पष्ट किया कि यह फिल्म 1984 की घटनाओं पर नहीं है। मैंने उनसे कहा कि दुनिया अक्सर पंजाब को सिर्फ उसी एक घटना के संदर्भ में याद करती है, जबकि उसके बाद भी वहां बहुत कुछ हुआ, जिसके बारे में बहुत कम बात हुई और सिनेमा ने तो लगभग चुप्पी ही साध ली।’

‘मैं चाहता था कि वह समझें कि यह फिल्म किसी राजनीतिक बहस का हिस्सा नहीं है। यह उन लोगों की कहानी है, जिन्होंने सच और इंसाफ की कीमत अपनी जिंदगी देकर चुकाई। यहीं से मैंने जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष के बारे में विस्तार से बात करनी शुरू की।’

फिल्म सतलज का पहले टाइटल पंजाब 95 रखा गया था।फिल्म सतलज का पहले टाइटल पंजाब 95 रखा गया था।

‘दिलजीत की पहली प्रतिक्रिया मैं कभी नहीं भूल सकता’- हनी

आगे हनी त्रेहान ने कहा, ‘मेरे पास रिसर्च की एक फाइल थी, जिसके कवर पर जसवंत सिंह खालड़ा की तस्वीर लगी थी। दिलजीत ने जैसे ही वह तस्वीर देखी, उन्होंने फाइल उठाई, उसे अपने माथे से लगाया, हाथ जोड़कर प्रणाम किया और कुछ पल बिल्कुल शांत रहे।’

‘उसके बाद उन्होंने मेरी तरफ देखा और सिर्फ इतना कहा- “पाजी, कब आना है? कहां आना है?” उस एक वाक्य ने मुझे यकीन दिला दिया कि उन्होंने इस फिल्म को सिर्फ एक अभिनय परियोजना की तरह नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी की तरह स्वीकार किया है। एक निर्देशक के तौर पर इससे बड़ा भरोसा शायद किसी कलाकार से नहीं मिल सकता।’

‘दिलजीत ने इस किरदार के लिए कभी पैसों की बात नहीं की’

हनी ने बताया है कि दिलजीत का फोकस फीस पर नहीं सिर्फ फिल्म पर था, उन्होंने कहा, ‘आज के समय में फिल्मों की पहली बातचीत अक्सर फीस, तारीखों और अनुबंध से शुरू होती है। लेकिन इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं हुआ। हमारी पूरी चर्चा सिर्फ कहानी, किरदार और उसके उद्देश्य पर केंद्रित रही। दिलजीत ने एक बार भी यह नहीं पूछा कि उन्हें कितना पारिश्रमिक मिलेगा या फिल्म का व्यावसायिक पक्ष क्या होगा।’

‘उन्होंने सिर्फ यह जानना चाहा कि हम यह कहानी क्यों कह रहे हैं और इसे किस ईमानदारी से पर्दे पर उतारना चाहते हैं। मेरे लिए यह एक कलाकार की सबसे बड़ी खूबी है। जब कोई अभिनेता कहानी को अपने आर्थिक हितों से ऊपर रखता है, तो निर्देशक का विश्वास भी कई गुना बढ़ जाता है।’

‘सतलज का उद्देश्य बहस नहीं, संवाद शुरू करना है’- हनी

हनी आगे कहते हैं, ‘मैं हमेशा मानता हूं कि सिनेमा का काम सिर्फ मनोरंजन करना नहीं है। कई बार वह समाज से ऐसे सवाल भी पूछता है, जिन पर लंबे समय से चुप्पी रही हो। ‘सतलज’ भी मेरे लिए वैसी ही फिल्म है। इसका उद्देश्य किसी पक्ष या विचारधारा के समर्थन में खड़ा होना नहीं, बल्कि इंसाफ, मानवाधिकार और मानवीय संवेदना पर संवाद शुरू करना है।’

‘मेरी सबसे बड़ी इच्छा यही है कि दर्शक इस फिल्म को खुले मन से देखें। अगर फिल्म खत्म होने के बाद लोग पंजाब के उस दौर, जसवंत सिंह खालड़ा के संघर्ष और न्याय की अहमियत पर नए सिरे से सोचें, तो मुझे लगेगा कि हमारी मेहनत सफल हुई। मेरे लिए किसी भी फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि पुरस्कार या कमाई नहीं, बल्कि दर्शकों के भीतर पैदा हुआ वह सवाल है, जो उन्हें थिएटर या स्क्रीन बंद होने के बाद भी लंबे समय तक सोचने पर मजबूर करे।’

‘पंजाब में शूटिंग के दौरान हर स्तर पर सहयोग मिला’- हनी

‘कई लोगों को लगता है कि इतनी संवेदनशील कहानी की शूटिंग के दौरान हमें विरोध का सामना करना पड़ा होगा, लेकिन मेरा अनुभव बिल्कुल उलटा रहा। हमने पंजाब की वास्तविक लोकेशनों पर शूटिंग की। पुलिस स्टेशन, सरकारी इमारतें और कई सार्वजनिक स्थानों पर काम किया। हर दिन जरूरी अनुमति ली गई और प्रशासन ने पूरा सहयोग दिया।’

‘कभी ऐसा नहीं लगा कि कोई हमारी कहानी सुनने से पहले ही उसे रोकना चाहता है। इसी वजह से जब बाद में प्रमाणन की प्रक्रिया लंबी होती चली गई, तो मेरे लिए वह और भी हैरानी की बात थी। क्योंकि जिस माहौल में फिल्म बनी, वहां हमें कभी असहज स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा।’

‘यह पंजाब के जख्म कुरेदने वाली नहीं, उन पर मरहम रखने वाली फिल्म है’

‘शुरुआत से मेरी कोशिश रही कि यह फिल्म किसी पुराने घाव को फिर से हरा करने का माध्यम न बने। मैं चाहता था कि लोग इसे एक मानवीय कहानी की तरह देखें। जब पंजाब में लोगों ने फिल्म देखी, तो उनकी प्रतिक्रिया ने मेरा भरोसा और मजबूत किया।’

‘कई लोगों ने कहा कि पहली बार किसी ने इस दौर को सनसनी की तरह नहीं, बल्कि संवेदनशीलता के साथ दिखाने की कोशिश की है। मेरे लिए यही सबसे बड़ी उपलब्धि है। अगर कोई फिल्म लोगों को अपने इतिहास पर शांत मन से सोचने का अवसर देती है, तो वह अपना उद्देश्य पूरा कर चुकी होती है।’

जानिए क्यों है फिल्म पर विवाद-

मानवाधिकार कार्यकर्ता पर आधारित, 2022 में बननी शुरू हुई: मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के नाम पर 2022 में फिल्म बनाने की घोषणा की। फिल्म का शुरुआती नाम ‘घल्लूघारा’ रखा गया था, जिसका अर्थ ‘नरसंहार’ होता है। फिल्म की शूटिंग पंजाब के विभिन्न हिस्सों, खासकर अमृतसर में पूरी हुई। अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाने के लिए अपने लुक और शारीरिक बनावट में बदलाव किया।

सेंसर बोर्ड ने नाम बदलवाया: साल 2023 में फिल्म बनकर तैयार हो गई। इसके बाद इसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास मंजूरी के लिए भेजा गया, तो बोर्ड ने फिल्म के टाइटल पर आपत्ति जताई और कई बदलाव तथा कट्स सुझाए। इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘पंजाब 95’ रखा गया।

127 कट लगाने को भी कहा: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CBFC ने फिल्म में 127 कट्स और कई बदलाव सुझाए। इनमें कुछ ऐतिहासिक संदर्भों, स्थानों और पात्रों के नामों में बदलाव की मांग भी शामिल थी। हालांकि, CBFC ने सार्वजनिक रूप से इन सभी प्रस्तावित बदलावों का विस्तृत आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया। भारत में सेंसर बोर्ड की मंजूरी नहीं मिलने के कारण फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी।

विदेशों में रिलीज नहीं हो सकी: इसके बाद 7 फरवरी 2025 को इसे चुनिंदा देशों में रिलीज किया गया। इसके बाद साल 2023 में फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जहां इसकी कहानी और दिलजीत दोसांझ के अभिनय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।

सिर्फ OTT पर रिलीज करने की छूट मिली: इसके बाद इसे OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने की छूट मिली। उसमें किसी तरह के कट नहीं लगाए गए थे। 2 दिन के भीतर पंजाब में इस फिल्म को खूब देखा गया। जिसके बाद अचानक OTT प्लेटफॉर्म से फिल्म हट गई। इसके बारे में सिर्फ इतना कहा गया कि अगले आदेश तक फिल्म हटा दी गई है।

अब पढ़िए, फिल्म हटाने पर दिलजीत दोसांझ ने क्या कहा-

इंसानियत होती है, जो मर गई: फिल्म को हटाए जाने पर दिलजीत ने कहा कि मैं लोगों के मुंह की तरफ देखता हूं। एक इंसानियत होती है, लेकिन वह इंसानियत मर गई। कमाल है। फिल्म इंटरनेट से हट गई, इसलिए मैं उदास नहीं हूं। फिल्म तो लोगों तक पहुंच ही गई। अब वह कहीं नहीं जाने वाली। एक प्यार, इत्तेफाक और इंसानियत होती है, लेकिन लोगों का रवैया कमाल का है। बस इसी बात का थोड़ा दुख है।

मुझे पहले पता था ऐसा होना है: दिलजीत ने कहा- मुझे पहले से ही पता था कि ऐसा होना है। मैंने सोचा था कि अगर फिल्म दो-तीन दिन भी चल जाए तो हमारा काम हो जाएगा। इंटरनेट पर एक बार कोई चीज आ जाए, तो उसे पूरी तरह हटाना आसान नहीं होता। इनके सलाहकार ठीक नहीं हैं।

प्रोजेक्ट आया था, जो बैन हो गया, यूरोप टूर पर जाएंगे: एक प्रशंसक ने जब दिलजीत से उनके अपकमिंग प्रोजेक्ट के बारे में पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया- एक प्रोजेक्ट आया था, जो अब बैन हो गया है। इसके बाद अब हम यूरोप टूर पर जाएंगे। पहला शो बर्लिन में होगा।

फिल्म हटाए जाने पर कई सेलेब्स ने जाहिर की नाराजगी-

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