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श्रीकृष्ण जन्मभूमि- ईदगाह मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई:हिंदू पक्ष के 18 वादों पर पेश हो रहीं दलीलें, दो माह बाद हियरिंगप्रयागराज3 मिनट पहले
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मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दोपहर दो बजे सुनवाई होगी। कोर्ट हिंदू पक्ष की तरफ से दाखिल 18 वादों पर एक साथ सुनवाई कर रही है।
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विवादित परिसर की पूरी 13.37 एकड़ भूमि श्रीकृष्ण जन्मभूमि को सौंपने की मांग की गई है। जस्टिस अवनीश सक्सेना की सिंगल बेंच में मामले की सुनवाई होगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई चलने की वजह से इलाहाबाद हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई टल रही है।
19 अप्रैल को मस्जिद पक्ष अर्जी खारिज हुई थी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े मुकदमों की सुनवाई करते हुए मस्जिद पक्ष द्वारा अपने लिखित कथन में संशोधन की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने यह आदेश लिखित कथन में तकनीकी खामियों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन न होने के कारण दिया है। मस्जिद पक्ष ने अर्जी दाखिल कर अपने लिखित कथन में दो नए पैराग्राफ जोड़ने की अनुमति मांगी थी। इन संशोधनों के जरिए मस्जिद पक्ष यह तर्क देना चाहता था कि वादी पक्ष ने आस्था के अस्तित्व के संबंध में कोई ठोस सामग्री रिकॉर्ड पर नहीं रखी है। बिना आस्था के प्रमाण के इस वाद का कोई वाद-कारण नहीं बनता इसलिए इसे खारिज किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि मस्जिद पक्ष द्वारा पूर्व में दाखिल किए गए लिखित कथन कानूनी रूप से पूर्ण नहीं थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लिखित कथन पर अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के हस्ताक्षर नहीं थे। सीपीसी के आदेश छह नियम 14 और 15 के तहत आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई थी। कोर्ट ने कहा कि मूल लिखित कथन ही कानून के अनुरूप नहीं है इसलिए उसमें संशोधन की मांग करना फिलहाल गलत और विचारहीन है। गौरतलब है कि इस मामले में कई अन्य महत्वपूर्ण अर्जियां भी लंबित हैं, जिनमें शाही ईदगाह के सर्वे, आधिकारिक भाषा अधिनियम का पालन और विभिन्न पक्षों द्वारा पूजा की अनुमति से जुड़ी याचिकाएं शामिल हैं।
क्या है पूरा मामला जानिये
श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह के बीच जमीन को लेकर विवाद है। श्री कृष्ण जन्मस्थान की कुल 13.37 एकड़ भूमि है। जिसमें से 2.37 एकड़ भूमि पर शाही ईदगाह बनी है। इसी को लेकर विवाद है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान का मालिकाना हक श्री कृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट पर है। इसकी देखभाल श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान करता है। संस्थान मंदिर की व्यवस्थाएं, प्रबंधन आदि के काम देखता है। 1968 में श्री कृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के अधीन काम करने वाले श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ने ईदगाह कमेटी से समझौता किया था। लेकिन बाद में श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ को हटाकर श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान बना दिया गया।
शाही ईदगाह पर कहा जाता है कि यह मूल गर्भ है। यहां एक कूप भी है जो शीतला अष्टमी पर पूजा होती है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान शाही ईदगाह मामले में पहला केस हरिशंकर जैन,रंजना अग्निहोत्री ने मथुरा सिविल कोर्ट में सितंबर 2020 में दाखिल किया था। जिसे खारिज कर दिया। इसके बाद इसे रिवीजन के लिए दाखिल किया जिसे स्वीकार कर लिया गया। मांग थी कि समझौता गलत हुआ है उसे रद्द किया जाए और भगवान की भूमि वापस ली जाए। अभी तक 17 वाद दाखिल हैं जिसकी एक साथ सुनवाई हाई कोर्ट में चल रही है।
वहीं भगवान श्री कृष्ण की मूल प्रतिमाएं आगरा जामा मस्जिद में दबी होने का भी दावा किया गया है जिसको लेकर आगरा सिविल कोर्ट में देवकी नंदन महाराज और महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा वाद दाखिल किए गए हैं,जिसमें सुनवाई चल रही है।
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