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बहराइच में दहशत फैलाने वाली मादा तेंदुआ पिंजरे में कैद:कई बकरियों का कर चुकी थी शिकार; अब जंगल लौटेगी ‘शिकारी’विशाल अवस्थी | सेमरी मलमला (मोतीपुर), बहराइच4 मिनट पहले
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बहराइच में कई दिनों से गांव में दहशत का पर्याय बनी युवा मादा तेंदुआ आखिरकार वन विभाग के लगाए पिंजरे में कैद हो गई। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के ककराहा रेंज स्थित देवनपुरा गांव में शुक्रवार तड़के करीब चार बजे हुए इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन ने ग्रामीणों को बड़ी राहत दी।
बकरियों और मवेशियों का लगातार शिकार कर रही मादा तेंदुआ को बिना किसी चोट के सुरक्षित पकड़ा गया। स्वास्थ्य परीक्षण में उसके पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने के बाद अब उसे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की गाइडलाइन के अनुसार उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।
लगातार हमलों से सहमे थे ग्रामीण
देवनपुरा गांव में पिछले कई दिनों से तेंदुए की लगातार आवाजाही दर्ज की जा रही थी। ग्रामीणों के मुताबिक, तेंदुआ रात के अंधेरे में गांव के आसपास पहुंचकर बकरियों और अन्य पालतू मवेशियों का शिकार कर रहा था। लगातार हो रहे हमलों के कारण ग्रामीणों में दहशत का माहौल था। शाम ढलते ही लोग घरों में कैद हो जाते थे और बच्चों को अकेले बाहर भेजना भी बंद कर दिया गया था। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद वन विभाग ने पूरे इलाके की निगरानी तेज कर दी थी।
रणनीति काम आई, तड़के पिंजरे में फंसी मादा तेंदुआ
वन विभाग ने आवश्यक प्रशासनिक अनुमति मिलने के बाद गांव में रणनीतिक स्थान पर पिंजरा लगाया था। शुक्रवार तड़के करीब चार बजे तेंदुआ उसी पिंजरे में फंस गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में लेकर रेस्क्यू अभियान पूरा किया। ऑपरेशन के दौरान तेंदुए को किसी प्रकार की चोट नहीं आई और पूरे अभियान को सुरक्षित तरीके से अंजाम दिया गया।
2 से 3 साल की स्वस्थ मादा तेंदुआ
रेस्क्यू के बाद वन विभाग के पशु चिकित्सक ने तेंदुए का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में उसकी उम्र लगभग दो से तीन वर्ष आंकी गई। चिकित्सकों ने बताया कि मादा तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ, सक्रिय और जंगल में छोड़ने के लिए उपयुक्त है। इसके बाद विभाग ने उसे सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
NTCA की गाइडलाइन के तहत जंगल में होगी वापसी
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार तेंदुए को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और विभागीय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। विभाग का कहना है कि रेस्क्यू का उद्देश्य वन्यजीव को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करते हुए दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसी नीति के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।
वन विभाग की अपील- तेंदुआ दिखे तो खुद न करें पीछा
रेस्क्यू के बाद वन विभाग ने क्षेत्र के लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी भी गांव या खेत के आसपास वन्यजीव दिखाई दे तो लोग उसे घेरने, भगाने या पकड़ने की कोशिश न करें।
ऐसी स्थिति में तुरंत निकटतम वन चौकी या वन विभाग को सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित टीम समय रहते सुरक्षित रेस्क्यू कर सके। विभाग का कहना है कि जागरूकता और त्वरित सूचना ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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