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देवरिया में किसानों का जेल भरो आंदोलन:कर्जमाफी से MSP की कानूनी गारंटी तक उठाईं मांगें; राष्ट्रपति के नाम DM को सौंपा मांगपत्रअनुग्रह नारायण शाही | देवरियाकुछ ही क्षण पहले
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देवरिया में संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के आह्वान पर सोमवार को किसानों ने राष्ट्रव्यापी जेल भरो आंदोलन के तहत प्रदर्शन किया। भारत छोड़ो दिवस की 84वीं वर्षगांठ पर दोपहर 12 से 3 बजे तक चले प्रदर्शन में किसानों ने कृषि, श्रमिकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे उठाए।
प्रदर्शन के बाद किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम जिलाधिकारी को मांगपत्र सौंपा। इसमें केंद्र सरकार से किसानों और मजदूरों की समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई।
किसानों ने किसानों और दिहाड़ी मजदूरों की व्यापक कर्जमाफी की मांग रखी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती ऋणग्रस्तता किसानों और मजदूर परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रही है।
मांगपत्र में किसान आत्महत्या से पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपए मुआवजा देने के साथ पूर्ण पुनर्वास की मांग की गई। इसके अलावा 60 वर्ष से अधिक उम्र के सभी किसानों को 10 हजार रुपए प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने की मांग भी की गई।
सभी फसलों पर C2+50% MSP और सरकारी खरीद की मांग
किसानों ने सभी फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी देने की मांग की। साथ ही MSP पर सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की बात कही।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का लागत के आधार पर उचित मूल्य मिलने से खेती को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने ग्रामीण ऋणग्रस्तता खत्म करने के लिए व्यापक कर्जमाफी की मांग भी दोहराई।
चारों श्रम संहिताएं रद्द करने की मांग
SKM ने चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने और सभी श्रमिकों के लिए 42 हजार रुपए प्रतिमाह वैधानिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की मांग की। मनरेगा को मजबूत करने की मांग करते हुए किसानों ने प्रत्येक परिवार को साल में 200 दिनों के रोजगार की गारंटी देने की बात कही। इसके लिए न्यूनतम 700 रुपए प्रतिदिन मजदूरी तय करने की मांग रखी गई।
भूमि अधिग्रहण रोकने और अधिकारों की रक्षा पर जोर
किसानों ने जबरन भूमि अधिग्रहण और कॉरपोरेट समर्थित भूमि पूलिंग पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन कानून-2013, वन अधिकार अधिनियम-2006 और PESA कानून के तहत मिले अधिकारों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की।
इसके अलावा विद्युत निजीकरण विधेयक-2025 और बीज विधेयक-2025 को वापस लेने की मांग भी की गई। किसानों ने कहा कि नीतियां बनाते समय खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े लोगों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
खाद-डीजल की कीमत नियंत्रित करने और FCI मजबूत करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने उर्वरकों की कमी और कालाबाजारी खत्म करने की मांग की। साथ ही खाद, पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने की बात कही।
भारतीय खाद्य निगम (FCI) को मजबूत करने और साइलो के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई। किसानों ने हर खेत तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने और सार्वजनिक क्षेत्र की फसल एवं पशुधन बीमा योजना लागू करने की मांग रखी।
बाढ़-सूखा प्रभावित किसानों को समयबद्ध राहत की मांग
किसानों ने बाढ़ और सूखे से प्रभावित किसानों को समयबद्ध राहत देने की मांग की। उनका कहना था कि प्राकृतिक आपदाओं से फसल बर्बाद होने के बाद किसानों को राहत और मुआवजा मिलने में देरी नहीं होनी चाहिए।
SKM ने राष्ट्रपति से अपील की कि वे किसानों और मजदूरों की इन मांगों पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करें और संबंधित मामलों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित कराएं।
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