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युवती के दिल में था 14 MM का बड़ा छेद:कानपुर में डॉक्टरों ने बिना सर्जरी ‘प्लान-B’ से किया सफल इलाजदीपेंद्र द्विवेदी | कानपुर2 मिनट पहले
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शहर के डॉक्टरों ने एक बार फिर अपनी सूझबूझ और मेडिकल कला का बेहतरीन नमूना पेश किया है। डॉक्टरों ने 24 वर्षीय युवती के दिल में पैदा हुए जटिल और बड़े छेद (पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस – PDA) का बिना किसी बड़ी सर्जरी के सफल इलाज कर दिया।
आमतौर पर जन्मजात पाई जाने वाली इस बीमारी का वयस्कों में इलाज करना डॉक्टरों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता।
नसों की बनावट बनी पहली रुकावट, फेल हुआ पारंपरिक रास्ता
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ.अवधेश कुमार ने बताया कि,24 साल की मरीज के दिल में पीडीए (दिल की दो मुख्य धमनियों को जोड़ने वाली नली) का आकार 14 मिमी था, जो वयस्कों में काफी बड़ा माना जाता है।
इलाज के दौरान डॉक्टरों के सामने पहली चुनौती तब आई जब पारंपरिक तरीके यानी वीनस साइड (पल्मोनरी आर्टरी के रास्ते) से तार (टेरुमो वायर) डालकर छेद तक पहुंचने की कोशिश की गई। नसों की जटिल बनावट के कारण स्ट्रेट-टिप वायर बार-बार नाकाम हो रहा था और रास्ता नहीं मिल पा रहा था।
प्लान-A भी हुआ फेल, बड़े साइज की डिवाइस नहीं थी उपलब्ध
पहला रास्ता बंद देख डॉक्टरों ने ‘प्लान-A’ के तहत एओर्टा (मुख्य धमनी) की तरफ से उलटे रास्ते (रेट्रोग्रेड) से तार डालकर छेद बंद करने की सोची।
लेकिन यहां समस्या यह आ गई कि मरीज के दिल के छेद का आकार बहुत बड़ा (14 mm) था। उस साइज की स्पेशल कोनार डिवाइस (KONAR MFO) बाजार में उपलब्ध ही नहीं थी, जिसके चलते डॉक्टरों को तुरंत अपना फैसला बदलना पड़ा।
प्लान-B हुआ हिट, ‘जे-टिप’ वायर और स्नैर तकनीक से मिली कामयाबी
डॉ. अवधेश ने बताया कि,निराश होने के बजाय डॉक्टरों की टीम ने एक नया और इनोवेटिव तरीका (प्लान-B) निकाला। डॉक्टरों ने एओर्टा की तरफ से ‘जे-टिप टेरुमो वायर’ को छेद के पार ले जाकर लेफ्ट पल्मोनरी आर्टरी में रोका। इसके बाद वीनस साइड से एक खास उपकरण (स्नैर) की मदद से उस तार को पकड़ा और खींचकर रास्ता बना लिया।
इस अनोखी तकनीक और बेहतर तालमेल की बदौलत डॉक्टरों ने 16 mm की पीडीए डिवाइस को दिल के छेद में पूरी सटीकता से फिट कर दिया। इस सफल प्रक्रिया के बाद युवती पूरी तरह सुरक्षित है। डॉक्टरों का कहना है कि सही समय पर लिया गया फैसला और टीम वर्क किसी भी मुश्किल मेडिकल केस को आसान बना सकता है।
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