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धरना स्थल से TGT-PGT अभ्यर्थियों को पुलिस ने उठाया:रात 2 बजे हुई कार्रवाई,एंबुलेंस में भरकर अलग-अलग दिशा में ले गएप्रयागराज7 मिनट पहले
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प्रयागराज में टीजीटी पीजीटी के आंदोलनरत प्रतियोगी छात्रों के प्रस्तावित ‘महाधरने’ से ठीक पहले बुधवार रात दो बजे पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। सिविल लाइंस स्थित धरना स्थल पर कई दिनों से डटे अभ्यर्थियों को पुलिस ने जबरन उठा लिया। इस दौरान छात्रों और पुलिस
.धरना दे रहे छात्रों को पुलिस ने बलपूर्वक हटाया।
2 बजे रात पुलिस एक्शन
महाधरने की तैयारियों के बीच पुलिस ने धरना स्थल पर छापा मारकर प्रदर्शनकारियों को हटाया। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए एंबुलेंस का उपयोग किया गया और उन्हें अलग अलग दिशाओं में ले जाया गया। कार्रवाई के दौरान पूरा क्षेत्र भारी पुलिस बल की निगरानी में रहा।
अभ्यर्थियों को एंबुलेंस में भरकर ले जाया गया।
टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का कैंडल मार्च
युवा मंच के बैनर तले अनशन पर बैठे टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों ने बुधवार को कैंडल मार्च निकाला। उनकी मुख्य मांग है कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक एवं इंटर कॉलेजों में रिक्त पदों पर पुरानी नियमावली और पुराने परीक्षा पैटर्न के आधार पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि 16 सितंबर 2025 को नियमावली में किए गए बदलाव से यूपी के लगभग सात लाख अभ्यर्थी प्रभावित होंगे।
60 हजार शिक्षक भर्ती की मांग पर महाधरना
डीएलएड अध्यक्ष रजत सिंह के मुताबिक, प्रतियोगी छात्र पिछले पांच दिनों से 60 हजार शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर अनवरत धरने पर हैं। पुलिस की कार्रवाई के बावजूद, बृहस्पतिवार को पूरे प्रदेश से प्रतियोगी छात्रों के धरना स्थल पर पहुंचकर ‘महाधरना’ करने की योजना है।
छात्र संगठनों और नेताओं की प्रतिक्रिया
आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने धरना स्थल पर ‘जेन-जी राइजिंग’ अभियान के तहत युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी में शिक्षा को सुनियोजित तरीके से बर्बाद किया जा रहा है और छात्रसंघ चुनावों पर रोक व छात्र दमन आम बात बन गई है। जेएनयूएसयू के सह-सचिव दानिश ने आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि जेएनयू से लेकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय तक छात्रों के दमन का तरीका एक जैसा है।
नए नियमों से हुए प्रमुख बदलाव जिन पर विरोध
PGT (प्रवक्ता) में B.Ed अनिवार्य: पुरानी नियमावली में प्रवक्ता पद के लिए B.Ed की बाध्यता नहीं थी। नई नियमावली में इसे अनिवार्य करने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के उन छात्रों को झटका लगा है जो सिर्फ पोस्ट ग्रेजुएशन के आधार पर तैयारी कर रहे थे।
कला विषय से प्राविधिक कला बाहर: पिछले 105 वर्षों से प्राविधिक कला (Technical Art) के आधार पर कला शिक्षक बनने का अवसर मिलता था, जिसे हटाकर B.Ed अनिवार्य कर दिया गया है।
हिंदी में संस्कृत की नई बाध्यता: नए नियमों में इंटरमीडिएट में संस्कृत अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि पहले इंटर अथवा स्नातक में से किसी एक स्तर पर संस्कृत होने पर छात्र पात्र होते थे।
संगीत व गृह विज्ञान: संगीत में ‘प्रभाकर’ के साथ B.Ed अनिवार्य किया गया है तथा गृह विज्ञान में भी B.Ed की अनिवार्यता थोप दी गई है।
शारीरिक शिक्षा व सामाजिक विज्ञान: शारीरिक शिक्षा में C.P.Ed धारकों को बाहर कर दिया गया है। वहीं सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में ‘एकल विषय’ (Single Subject) से डिग्री लेकर तैयारी कर रहे छात्रों के अवसर भी छिन गए हैं।
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