- Hindi News
- Local
- Uttar pradesh
- Bijnor
- Major Danish Farooqui Tributes Veer Abdul Hamid & Dushyant Kumar | Bijnor
वीर अब्दुल हमीद की शहादत और दुष्यंत कुमार की जयंती:मेजर दानिश फारूकी ने दोनों महान हस्तियों को श्रद्धांजलि दीजहीर अहमद | बिजनौर2 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
बिजनौर के चांदपुर स्थित मेरठ नर्सिंग होम में गुरुवार दोपहर 3 बजे परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद के शहादत दिवस और मशहूर गजलकार दुष्यंत कुमार की जयंती पर ‘शौर्य और साहित्य दिवस’ मनाया गया। कार्यक्रम में मेजर दानिश फारूकी ने वीर अब्दुल हमीद और दुष्यंत कुमार के चित्रों पर फूल चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
मेजर दानिश फारूकी ने वीर अब्दुल हमीद को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश की रक्षा के लिए अदम्य साहस और बहादुरी दिखाई। उनका सर्वोच्च बलिदान भारतीय सेना के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। उनका जीवन देश के नागरिकों और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। देश की सुरक्षा के लिए उनका समर्पण और शहादत राष्ट्र को हमेशा गौरवान्वित करती रहेगी।
उन्होंने कहा कि वीर अब्दुल हमीद की बहादुरी हमें सिखाती है कि देश की रक्षा और सम्मान सबसे ऊपर है। मुश्किल परिस्थितियों में भी उन्होंने जिस साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया, वह भारतीय सैनिक की मजबूत भावना को दर्शाता है।
दुष्यंत कुमार को याद करते हुए मेजर दानिश फारूकी ने कहा कि उन्होंने अपनी कविताओं और गजलों के माध्यम से आम आदमी के दुख, समाज की बुराइयों और व्यवस्था की कमियों को बेबाकी से सामने रखा। उनकी रचनाओं में समाज की वास्तविक तस्वीर दिखाई देती है। उनकी शायरी आज भी लोगों को सोचने, सवाल उठाने और बदलाव के लिए आवाज बुलंद करने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि वीर अब्दुल हमीद की बहादुरी और दुष्यंत कुमार की कलम, दोनों ही देश और समाज को दिशा देने वाली प्रेरणादायक विरासत हैं। एक ने अपनी वीरता से देश की रक्षा की, तो दूसरे ने अपनी लेखनी से समाज की आवाज को मजबूत किया।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी दोनों महान हस्तियों के चित्रों पर फूल चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनके जीवन, संघर्ष, विचारों और योगदान को याद किया गया। मेजर दानिश फारूकी ने दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध पंक्तियां भी सुनाईं—
“हो गई है पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।”
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने वीर अब्दुल हमीद के राष्ट्रप्रेम, साहस और बलिदान तथा दुष्यंत कुमार की सामाजिक चेतना और साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
.दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔



