- Hindi News
- Local
- Uttar pradesh
- Kanpur dehat
- Kanpur Dehat Grain Procurement Shifted To Mandis | Farmer Challenges
8 खरीद केंद्र मंडियों में शिफ्ट:कानपुर देहात में किसानों की बढ़ेंगी मुश्किलें, अधिकारियों के कार्यक्षेत्र भी बदलेकानपुर देहात1 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
कानपुर देहात में ज्वार, बाजरा, मक्का और धान की सरकारी खरीद शुरू होने से पहले बड़ा बदलाव किया गया है। जिले में किराए की जगहों पर संचालित आठ क्रय केंद्रों को अब मंडियों में शिफ्ट कर दिया गया है। अधिकारियों का दावा है कि इससे अनाज को सुरक्षित रखने, बिचौलियों पर अंकुश लगाने और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी। लेकिन इस फैसले के बाद किसानों के सामने अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय करने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
क्रय केंद्रों की जगह बदलने के साथ ही विभागीय अधिकारियों और केंद्र प्रभारियों के कार्यक्षेत्र में भी फेरबदल किया गया है। अकबरपुर उपमंडी में तैनात एसएमआई महेश कुमार को पुखरायां मंडी भेजा गया है, जबकि पुखरायां में तैनात एसएमआई दीपक को अकबरपुर मंडी की जिम्मेदारी दी गई है।
जिठरौली केंद्र प्रभारी रहे एमआई संजय और जैनपुर केंद्र प्रभारी रहे एमआई योगेश को पुखरायां मंडी भेजा गया है। वहीं, गजनेर केंद्र प्रभारी रहे सुभाष को अकबरपुर मंडी में तैनात किया गया है। डेरापुर के फत्तेपुर में संचालित क्रय केंद्र को झींझक मंडी में शिफ्ट किया गया है।
जिला खाद्य विपणन अधिकारी देवेंद्र सिंह के मुताबिक, मंडियों में पर्याप्त और निर्धारित जगह होने से अनाज के भीगने और अन्य नुकसान की आशंका कम होगी। पहले अलग-अलग स्थानों पर खरीद के दौरान विवाद और सड़कों पर जाम की स्थिति भी बनती थी। विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था में खरीद को पारदर्शी बनाने के लिए अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। किसानों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और केंद्रों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रही हैं।
हालांकि, इस बदलाव का दूसरा पहलू किसानों की परेशानी से जुड़ा है। जिन किसानों को पहले अपने क्षेत्र के नजदीक उपज बेचने की सुविधा थी, उन्हें अब मंडियों तक कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है। डेरापुर के फत्तेपुर से झींझक मंडी की दूरी करीब 25 किलोमीटर बताई जा रही है।
कुछ किसानों को मंडी पहुंचने के लिए 40 से 45 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ सकता है। इससे परिवहन खर्च और समय दोनों बढ़ेंगे। वहीं, अलग-अलग केंद्रों पर बंटने वाली भीड़ अब मंडियों में एक साथ जुटने से तौल में दबाव बढ़ने की आशंका भी है। फिलहाल विभाग इसे किसानों की सुविधा और पारदर्शिता से जुड़ा फैसला बता रहा है, लेकिन असली तस्वीर खरीद शुरू होने के बाद साफ होगी कि व्यवस्था से किसानों को राहत मिलती है या उनकी मुश्किलें बढ़ती हैं।
.दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔




