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लखनऊ के अग्निकांड में कानपुर के दो दोस्त जिंदा जले:संयम को आज दादी की तेहरवीं में आना था, बेटे की मौत से अनजान सूरजभान की मांकानपुर6 मिनट पहले
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मृतक संयम विज व सूरजभान सिंह (फाइल फोटो)
लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने शहर के दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। गोविंद नगर निवासी 28 वर्षीय संयम विज और बर्रा-सात के 25 वर्षीय सूरजभान सिंह की हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। वह एक एनीमेशन स्टूडियो में काम करते थे। एक साथ काम करने की
.संयम के घर मौजूद गमगीन परिजन
युवकों की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मोहल्ले के लोग और दोस्त जानकारी मिलते ही लखनऊ के लिए रवाना हो गए। वहीं लोग परिवार को सांत्वना देते रहे। इसके साथ ही बर्रा सात निवासी सूरजभान की मौत की खबर परिजनों ने उनकी मां को नहीं दी।
गोविंद नगर ब्लाक-11 निवासी संयम विज के परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। महज 10 दिन पहले उनकी दादी का निधन हुआ था और मंगलवार को उनका 17 वां (तेरहवीं) होनी थी। परिवार के लोग उनका इंतजार कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही मौत की खबर पहुंच गई। संयम के मामा मोनू सेठी ने बताया कि वह दादी के निधन पर घर आया था और तेरहवीं में शामिल होने के लिए मंगलवार को फिर आना था।
माता-पिता के साथ मृतक संयम (काली शर्ट में)
इससे पहले ही ऐसी खबर आई कि जिसने सभी को स्तब्ध कर दिया। संयम के पिता पुष्पराज का करीब 15 वर्ष पहले निधन हो गया था, उनका लाटूश रोड में पुली का कारोबार था। पिता की मौत के पांच वर्ष बाद उनकी मां सोनिया ने सीमू देसाई से दूसरी शादी कर ली थी। परिवार में बड़े भाई शुभम हैं, जो गुरुग्राम में नौकरी करते हैं और अपनी पत्नी पलक के साथ वहीं रहते हैं। हादसे की खबर सुनते ही दोनों की परिवारों का रो का रो-रोकर बुरा हाल है।
वहीं बर्रा-सात निवासी सूरजभान सिंह की मौत ने भी पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। सूरजभान के पिता शिवराम का पहले ही निधन हो चुका है। वह नौकरी के सिलसिले में लखनऊ में रहते थे, लेकिन हर शनिवार घर आते और रविवार शाम वापस लौट जाते थे। उनके भतीजे करन ने बताया कि रविवार को ही वह काम पर लखनऊ गए थे लेकिन किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह उनकी अंतिम विदाई साबित होगी।
गोविंद नगर के इसी मकान में रहता था संयम
सूरजभान के परिवार में उनकी मां मीरा और छोटा भाई सम्राट हैं। घटना की सूचना मिलते ही सम्राट जो घटना के समय ऋषिकेश गए हुए थे, तुरंत ही कानपुर के लिए रवाना हो गए। परिजनों ने मां मीरा को सूरजभान के मौत के बारे में नहीं बताया ताकि कहीं उन्हें सदमा न लग जाए। दोनों युवकों की असमय मौत से उनके परिवारों के साथ-साथ पड़ोस और परिचित भी गमगीन हैं।
दोनों युवकों के परिजनों ने बताया कि वह हंसमुख,जिंदादिल और हमेशा लोगों की मदद के लिए तैयार रहते थे। एक ओर जहां घर में तेरहवीं की तैयारी थी, वहीं अब अंतिम संस्कार की तैयारी ने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया है। मंगलवार दोपहर तक पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव उनके घर पहुंचेगे।
घटना की जानकारी देते मृतक संयम के परिजन
शादी का चल रही थी तैयारी
परिजन ने बताया कि संयम की अच्छी नौकरी कर रहा था। परिजन उनकी शादी के लिए लड़की देख रहे थे। जल्द ही उसकी शादी होने की उम्मीद थी। मगर किसी को इस हादसे की उम्मीद नहीं थी।
सेंसर वाला गेट होने के कारण नहीं भाग सका भांजा
संयम के मामा सौरभ दुआ ने बताया कि भांजा जिस कॉम्प्लेक्स में काम करता था। वहां सेंसर वाले गेट लगे हुए थे। आग लगने के कारण सेंसर काम नहीं कर रहा था। जिस कारण हादसे के बाद गेट नहीं खुल सका। कई लोग गेट से बाहर निकलने का प्रयास करते रहे, लेकिन अंदर दम घुटने के कारण भांजे से कई लोगों की मौत हो गई। अगर कॉम्प्लेक्स में सेंसर वाला गेट नहीं होता या गेट खुल जाता तो इतने लोगों की मौत नहीं होती।
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