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भर्ती घोटाले में राज किशोर सिंह के साइन मिले:चेक डैम घोटाले में आया था नाम, अपनी ही पार्टी के मंत्री ने शिकायत की थीराज प्रकाश | बस्ती4 मिनट पहले
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साल- 2014 के पशुधन प्रसार भर्ती घोटाले में पूर्व कैबिनेट मंत्री राज किशोर सिंह का नाम भी सामने आ रहा है। ईओडब्लू (EOW) की जांच में उनके साइन भी पाए गए हैं। भर्ती के समय राज किशोर सिंह सपा से मंत्री थे। माना जा रहा है कि उनके ऊपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
मौजूदा समय में राज किशोर सिंह भाजपा में हैं। वो हर्रैया से चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहे हैं। इससे पहले सपा सरकार में उन पर चेक डैम घोटाले का भी आरोप लग चुका है। ये आरोप सपा से मंत्री रह चुके शिवाकांत ओझा ने लगाए थे, जिसके बाद राज किशोर सिंह को सफाई देनी पड़ गई थी। हालांकि, इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।
राज किशोर सिंह हरैया से चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहे हैं।
500 चेकडैम के निर्माण में घोटाले का आरोप लगा था 12 साल पहले राज किशोर सिंह सपा सरकार में लघु एवं सिचाई मंत्री थे। उस समय में तत्कालीन प्राविधिक शिक्षामंत्री (Minister for Technical Education) शिवाकांत ओझा ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि 500 चेक डैम के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता ठीक नहीं है।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि लघु सिंचाई विभाग द्वारा दो साल के अंदर प्रतापगढ़ में 200 करोड़ रुपए की लागत से 148 घटिया चेकडैमों का निर्माण कराया है। इसकी उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए। मामला बढ़ने पर राज किशोर सिंह ने आंकड़े जारी कर अपनी सफाई दी थी। उन्होने कहा था मेरे कार्यकाल में कोई चेकडैम घोटाला नहीं हुआ।
जांच एजेंसी के मुताबिक, भर्ती नियमों के संशोधन पर राजकिशोर सिंह के साइन थे।
पढ़िए राज किशोर सिंह घोटाले में कैसे फंसे…
परीक्षा सेंट्रलाइज करवाई, 3 स्टेप पर मिली गड़बड़ी
डीजी ईओडब्ल्यू जय नारायण सिंह ने दैनिक भास्कर को बताया कि पशुपालन विभाग ने प्रदेश के 17 मंडलों में पशुधन प्रसार अधिकारियों के 1198 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए 2 फरवरी, 2014 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। भर्ती परीक्षा की गड़बड़ी 3 लेवल पर हुई।
1. पशुधन प्रसार अधिकारी पद पर भर्ती मंडल स्तर पर अपर निदेशक ग्रेड-2 स्तर के अधिकारी से होनी थी। लेकिन, बिना शासन की अनुमति के नियम में बदलाव करके मंडलीय चयन समितियों के अधिकार खत्म कर दिए गए।
2. मंत्री स्तर से अनुमोदन लेकर परीक्षा के बाद इसे सेंट्रलाइज कर दिया गया। यानी भर्ती शुरू हुई मंडल स्तर पर, लेकिन पूरी हुई राज्य मुख्यालय स्तर पर। इसके लिए फाइल चली। जिस पर नीचे से लेकर डिप्टी डायरेक्टर, एडीशनल डायरेक्टर, डायरेक्टर और प्रमुख सचिव के साथ तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह के भी हस्ताक्षर हैं।
3. बिना शासन से अनुमति लिए नियमों में बदलाव किए गए। लिखित परीक्षा 100 नंबर के बजाए 80 नंबर की कराई गई। 20 नंबर इंटरव्यू के रखे गए। इसके बाद OMR शीट का मूल्यांकन नियमों के अनुसार नहीं किया गया और मुख्यालय स्तर पर उसमें छेड़छाड़ की गई।
मनमाने नंबर दिलाने का आरोप
डीजी ईओडब्ल्यू जय नारायण सिंह बताते हैं- भर्ती परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं (OMR शीट) चेक करने के लिए अधिकारियों ने 2 बहाने बनाए। पहला- पैसों की कमी है। दूसरा- हर जिले या मंडल स्तर पर कॉपियां जांचने में दिक्कत आ रही है। इन कारणों का हवाला देकर उन्होंने नियम बदल दिए। अलग-अलग जगह निष्पक्ष तरीके से कॉपियां चेक कराने के बजाय, सभी कॉपियां ‘फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट’ को दे दिया गया।
आरोप यह भी है कि संस्थान को काम सौंपने में निर्धारित नियमों का पालन नहीं हुआ और अनुबंध बैकडेट से किए गए। जांच एजेंसी को इस बात पर भी संदेह हुआ कि मूल्यांकन और अंक देने में हेरफेर करके मनमाने चयन किए गए थे।
डीजी ईओडब्ल्यू कहते हैं कि मामला पुराना होने के चलते पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त नहीं किया गया। यानी जो लोग सेटिंग से जॉब में आए थे, वो अब भी नौकरी कर रहे हैं। उनको लेकर सरकार का अभी रुख साफ नहीं है।
योगेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई, राज किशोर का मामला लंबित
राजकिशोर के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने सबूत जुटा लिए हैं। इसके बाद दोनों के खिलाफ केस चलाए जाने के लिए शासन से अनुमति मांगी गई। हाल ही में योगेश कुमार के खिलाफ सरकार ने स्वीकृति दे दी, लेकिन राजकिशोर का मामला लंबित रखा। अगर सरकार केस चलाने की इजाजत दे देती, तो राजकिशोर भी अरेस्ट हो जाते।
2017 के चुनाव में सपा सरकार जाने के बाद लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। इस दौरान वे हरैया से चुनाव भी लड़े, लेकिन हार गए। 2024 में राज किशोर कांग्रेस छोड़कर भाजपा के साथ चले गए।
2024 में राज किशोर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए।
हरीश द्विवेदी ने BJP ज्वॉइन कराया दरअसल, वर्तमान राष्ट्रीय मंत्री भाजपा हरीश द्विवेदी चुनाव में मैदान में थे, राज किशोर सिंह और उनके भाई बृज किशोर सिंह को उन्होने चुनाव में मदद और जीत के लिए साल- 2024 में भाजपा में शामिल कराया था, लखनऊ में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की मौजूदी में उन्हें भाजपा की सदस्यता दिलाई गई, हालांकि उन्हें संगठन में कोई पद नहीं मिला है, लेकिन हर्रैया से ही वह दोबारा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
तीन बार मंत्री रहे राज किशोर करीब 24 साल के राजनीतिक सफर में राज किशोर सपा, बसपा और कांग्रेस में कई बार आए और गए। वह बसपा और सपा सरकार में तीन बार मंत्री भी रहे। साल- 2019 के बस्ती सीट से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़े थे। उन्हें करीब 56 हजार वोट मिले थे।
चुनाव हारने के बाद राजकिशोर कांग्रेस छोड़कर साल- 2020 में दोबारा बसपा में शामिल हो गए। लेकिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से हुई उनकी मुलाकात के बाद बसपा ने राजकिशोर से निष्कासित कर दिया था।
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रिटायर्ड IAS के बाद पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी लगभग तय, भर्ती घोटाला- फाइलों में उन्हीं के साइन; मनमानी भर्ती के लिए नियम बदले
सपा सरकार में पशुधन मंत्री रहे राजकिशोर सिंह गिरफ्तार हो सकते हैं। 14 अक्टूबर को रिटायर्ड प्रमुख सचिव योगेश कुमार को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) गिरफ्तार कर चुकी है। दरअसल, साल- 2014 के 1198 पशुधन प्रसार अधिकारी के पदों पर भर्ती हुई थी। उस वक्त राजकिशोर सिंह मंत्री थे। योगेश कुमार विभाग में प्रमुख सचिव थे। दिसंबर, 2017 से ईओडब्ल्यू इस घोटाले की जांच कर रही है। पढ़ें पूरी खबर…
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