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45 डिग्री गर्मी में खुले केंद्रीय विद्यालय:परिषदीय स्कूलों में 24 जून तक छुट्टी, अभिभावकों ने उठाए सवालप्रमोद कुमार यादव | प्रयागराजकुछ ही क्षण पहले
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उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप लगातार जारी है। कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। इस बीच राज्य सरकार ने परिषदीय विद्यालयों में 24 जून तक अवकाश घोषित कर दिया है, लेकिन केंद्रीय विद्यालयों (केवी) में ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद बुधवार से नियमित कक्षाएं शुरू हो गईं। इसे लेकर अभिभावकों और शिक्षकों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 16 जून को बच्चों का स्वागत किया गया था, लेकिन उसी रात भीषण गर्मी को देखते हुए शासन ने 24 जून तक अवकाश घोषित कर दिया। इसके बाद अभिभावकों को उम्मीद थी कि केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) भी स्थानीय मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए छुट्टियां बढ़ाएगा।
हालांकि ऐसा नहीं हुआ और बुधवार से केंद्रीय विद्यालयों में नियमित शिक्षण कार्य शुरू कर दिया गया। भीषण गर्मी के बीच छात्रों को स्कूल पहुंचना पड़ा।
कम रही उपस्थिति, धूप से परेशान दिखे छात्र
गर्मी के कारण कई विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति सामान्य दिनों की तुलना में कम रही। जो छात्र स्कूल पहुंचे, वे तेज धूप और उमस से परेशान नजर आए। कई बच्चे सिर पर टोपी और हाथ में छाता लेकर स्कूल जाते दिखाई दिए।
अभिभावकों का कहना है कि वर्तमान मौसम में बच्चों को स्कूल भेजना स्वास्थ्य के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है।
शिक्षकों को भी हो रही परेशानी
भीषण गर्मी का असर केवल छात्रों पर ही नहीं, बल्कि शिक्षकों पर भी पड़ रहा है। स्कूल आने-जाने और कक्षाओं में लंबे समय तक पढ़ाने के दौरान उन्हें भी गर्मी से जूझना पड़ रहा है।
शिक्षकों का मानना है कि तापमान सामान्य होने तक विशेष व्यवस्था या समय में बदलाव पर विचार किया जाना चाहिए।
केवीएस पर स्थानीय परिस्थितियों की अनदेखी का आरोप
अभिभावकों का आरोप है कि केंद्रीय विद्यालय संगठन एक केंद्रीय संस्था होने का तर्क देकर स्थानीय मौसम की गंभीर परिस्थितियों को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार ने जब गर्मी को देखते हुए परिषदीय विद्यालयों में छुट्टी बढ़ाई है, तो केंद्रीय विद्यालयों में भी बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अभिभावकों ने मांग की है कि जब तक भीषण गर्मी और लू का असर कम नहीं हो जाता, तब तक केंद्रीय विद्यालयों में भी ग्रीष्मकालीन अवकाश बढ़ाया जाए या वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए।
उनका कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं है। ऐसे में मौसम सामान्य होने तक राहत भरे निर्णय की जरूरत है, ताकि छात्रों को गर्मी से होने वाली परेशानियों से बचाया जा सके।
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