मूवी रिव्यू – 'दायरा':पृथ्वीराज का गुस्सा, करीना का सवाल और चार लाशों का राज… कहानी में मसाला खूब, लेकिन यहां कमजोर है मूवी

  • Hindi News
  • Entertainment
  • Bollywood
  • Dayra Movie Review | Prithviraj Kareena Film Analysis & Verdict

मूवी रिव्यू – ‘दायरा’:पृथ्वीराज का गुस्सा, करीना का सवाल और चार लाशों का राज… कहानी में मसाला खूब, लेकिन यहां कमजोर है मूवी9 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी

  • कॉपी लिंक

रेटिंग: 2.5/5 अवधि: 2 घंटे 23 मिनट शैली: क्राइम थ्रिलर / इन्वेस्टिगेटिव ड्रामा निर्देशक: मेघना गुलजार मुख्य कलाकार: करीना कपूर खान, पृथ्वीराज सुकुमारन, क्षिती जोग, कनवलजीत सिंह, जितेंद्र जोशी रिलीज डेट: 18 सितंबर 2026

कुछ फिल्में आपको कुर्सी पर इसलिए बैठाए रखती हैं क्योंकि आपको जानना होता है कि आगे क्या होगा। ‘दायरा’ शुरुआत में बिल्कुल यही काम करती है। एक लड़की की निर्मम हत्या, पुलिस का तेजी से आरोपियों तक पहुंचना, फिर उनका एनकाउंटर और उसके बाद उठता बड़ा सवाल क्या यह सच में न्याय था या कानून को किनारे रखकर किया गया फैसला?

मेघना गुलजार की यह फिल्म 2019 के हैदराबाद रेप-मर्डर केस और उसके बाद हुए पुलिस एनकाउंटर से प्रेरित है। फिल्म ने वास्तविक घटना को हूबहू दोहराने के बजाय काल्पनिक नामों और परिस्थितियों के साथ अपनी कहानी गढ़ी है और यहीं से फिल्म दिलचस्प हो जाती है, क्योंकि यह आपको किसी एक पक्ष की तरफ आराम से बैठने नहीं देती।

लेकिन दिक्कत यह है कि जिस फिल्म की शुरुआत इतनी मजबूत हो, उससे अंत भी उतना ही दमदार चाहिए। ‘दायरा’ में शुरुआत और पहला हिस्सा जितना पकड़ता है, दूसरा हिस्सा उतना ही धीरे-धीरे हाथ से निकलता जाता है।

फिल्म की कहानी

कहानी शुरू होती है रागिनी (प्रगति मिश्रा) से, जो एक रात हाईवे के पास मुसीबत में फंस जाती है। इसके बाद वह गायब हो जाती है और अगले दिन उसका जला हुआ शव मिलता है।

रागिनी की मां पार्वती (क्षिती जोग) और भाई कबीर (भावेश बब्बानी) पुलिस से मदद मांगते हैं, लेकिन शुरुआती स्तर पर सिस्टम जिस तरह से मामले को लेता है, वही आगे की पूरी कहानी की नींव रख देता है।

मामला मीडिया में उछलता है और जांच की जिम्मेदारी डीसीपी रमन कुमार (पृथ्वीराज सुकुमारन) को मिलती है। रमन अपनी टीम के साथ चार आरोपियों को पकड़ लेता है, लेकिन अदालत तक मामला पहुंचने से पहले ही चारों एक पुलिस एनकाउंटर में मारे जाते हैं।

पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने भागने और हमला करने की कोशिश की थी। जवाबी कार्रवाई में वे मारे गए।

बस, यहीं से असली फिल्म शुरू होती है। एक तरफ जनता रमन को हीरो मान रही है। दूसरी तरफ सवाल उठ रहा है क्या यह एनकाउंटर सच में हुआ था या सब कुछ पहले से तय था?

मामले की जांच के लिए डीसीपी अजूनी कोहली (करीना कपूर खान) के नेतृत्व में विशेष जांच टीम बनाई जाती है। अजूनी का काम सिर्फ एनकाउंटर की जांच करना नहीं है, बल्कि उस पूरी कड़ी को जोड़ना है जो रागिनी के गायब होने से शुरू हुई थी।

और फिर फिल्म रमन बनाम अजूनी नहीं, बल्कि तेज न्याय बनाम सही न्याय की बहस बन जाती है।

फिल्म में एक्टिंग

पृथ्वीराज सुकुमारन

रमन कुमार के किरदार में पृथ्वीराज फिल्म की सबसे मजबूत कड़ियों में से एक हैं। उनके किरदार में पुलिस अधिकारी का रौब है, लेकिन उसके पीछे एक ऐसा आदमी भी है जो अपने फैसलों को सही मानता है।

पृथ्वीराज का अभिनय ज्यादा शोर नहीं करता। खासकर उनकी आंखों और संवाद बोलने के अंदाज में काफी वजन है।

वह रमन को पूरी तरह विलेन बनने से रोकते हैं और यही फिल्म के लिए जरूरी भी था।

करीना कपूर खान

करीना की अजूनी चमक-दमक वाली पुलिस अफसर नहीं है। वह ज्यादा शांत, व्यवस्थित और दिमाग से काम करने वाली अधिकारी है।

करीना यहां ओवर-द-टॉप अभिनय नहीं करतीं और यही उनके पक्ष में जाता है। वह सवाल पूछती हैं, लोगों को पढ़ती हैं और छोटी-छोटी विसंगतियों को पकड़ती हैं।

हालांकि, किरदार में जितनी संभावनाएं थीं, फिल्म उनका पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाती।

क्षिती जोग

रागिनी की मां पार्वती के रूप में क्षिती जोग कई जगह पूरी फिल्म पर भारी पड़ती हैं। उनका दुख चीखने-चिल्लाने से ज्यादा उनकी खामोशी में दिखाई देता है।

फिल्म के सबसे मानवीय और भावुक हिस्से उन्हीं से जुड़े हैं।

बाकी कलाकार भी अपने-अपने हिस्से को संभालते हैं और फिल्म को विश्वसनीय बनाने में मदद करते हैं।

फिल्म का निर्देशन

मेघना गुलजार को पता है कि क्राइम स्टोरी को सिर्फ अपराध की कहानी बनाकर नहीं छोड़ना है। ‘तलवार’ की तरह यहां भी वह दर्शक को जांच की प्रक्रिया के भीतर ले जाने की कोशिश करती हैं।

फिल्म का पहला हिस्सा काफी प्रभावी है। घटनाओं को धीरे-धीरे खोलने का तरीका अच्छा है और दर्शक लगातार सोचता रहता है कि आखिर सच क्या है, लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म का टेम्पो थोड़ा गिरता है।

कुछ जगहों पर कहानी जरूरत से ज्यादा समझाने लगती है और वही फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है।

फिल्म की स्टोरीलाइन

विचार बेहद मजबूत है। फिल्म का असली सवाल यह नहीं है कि रमन सही है या अजूनी। सवाल यह है कि अगर सिस्टम धीमा है तो क्या पुलिस को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार मिल जाता है? और अगर किसी अपराधी को अदालत तक पहुंचने से पहले मार दिया जाए, तो क्या वह न्याय कहलाएगा?

फिल्म इन सवालों को उठाती जरूर है, लेकिन कई जगह उन पर और गहराई से उतरने की जरूरत महसूस होती है।

फिल्म का स्क्रीनप्ले

स्क्रीनप्ले की शुरुआत काफी चुस्त है। घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ती हैं और रहस्य धीरे-धीरे खुलता है, लेकिन दूसरे हिस्से में कुछ चीजें खिंचती हुई लगती हैं। कई जगह कहानी की गति कम हो जाती है और दर्शक को लगता है कि फिल्म उसी बात को थोड़ा अलग तरीके से फिर समझा रही है।

सबसे बड़ी समस्या क्लाइमैक्स है। इतने सवाल खड़े करने के बाद फिल्म जिस तरह खत्म होती है, वह दर्शक को संतुष्ट करने के बजाय थोड़ा अधूरा छोड़ देती है। ऐसा लगता है जैसे फिल्म ने पटाखे दिखाए बहुत, लेकिन फुलझड़ी जलाकर घर चली गई।

फिल्म का तकनीकी पक्ष

कैमरा वर्क फिल्म के मूड को अच्छी तरह सपोर्ट करता है। बंद फ्रेम और क्लोज-अप्स किरदारों के तनाव को बढ़ाते हैं।

एडिटिंग पहले हिस्से में काफी प्रभावी है, हालांकि इंटरवल के बाद फिल्म थोड़ी और चुस्त हो सकती थी।

फिल्म की कमियां

सबसे बड़ी कमी है इसका कमजोर दूसरा हिस्सा। दूसरी बड़ी परेशानी है कि फिल्म जिस शानदार सवाल से शुरुआत करती है, उसका जवाब देने की कोशिश में कुछ जगह बहुत ज्यादा समझाने लगती है।

और फिर आता है क्लाइमैक्स। इतनी गंभीर कहानी के बाद दर्शक एक मजबूत टकराव और भावनात्मक payoff की उम्मीद करता है, लेकिन फिल्म वहां थोड़ी फीकी पड़ जाती है।

यही वजह है कि ‘दायरा’ अच्छी फिल्म बनने के बेहद करीब पहुंचकर भी पूरी तरह यादगार फिल्म नहीं बन पाती।

फिल्म का म्यूजिक

फिल्म का संगीत इसका सेलिंग पॉइंट नहीं है। केतन सोढ़ा का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के तनाव वाले हिस्सों को मजबूती देता है।

फिल्म में एक मुख्य गीत है, लेकिन यह ऐसा नहीं है जिसे आप सिनेमाघर से निकलते ही गुनगुनाने लगें। यहां असली काम बैकग्राउंड म्यूजिक करता है।

फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट

‘दायरा’ ऐसी फिल्म है जिसमें सवाल बहुत अच्छे हैं, कलाकार बहुत अच्छे हैं और शुरुआत भी दमदार है, लेकिन जवाब तक पहुंचते-पहुंचते फिल्म की पकड़ ढीली पड़ जाती है।

करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन अपने किरदारों को पूरी गंभीरता से निभाते हैं और मेघना गुलजार का निर्देशन कई जगह प्रभावशाली है।

लेकिन अगर आप एक ऐसी क्राइम थ्रिलर की उम्मीद लेकर जा रहे हैं जिसमें आखिरी 20 मिनट आपको सीट से चिपका दें, तो यहां थोड़ी निराशा हो सकती है।

.दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔Google Preferred Source CTA

    Source link

    dp

    Related Posts

    बरेका में सेवानिवृत्त कर्मियों का सम्मान समारोह:बैंक अधिकारियों ने निवेश और साइबर धोखाधड़ी से बचाव की जानकारी दी

    Hindi News Local Uttar pradesh Varanasi DLW Varanasi Retirement Ceremony | Bank Officials Warn On Cyber Fraud बरेका में सेवानिवृत्त कर्मियों का सम्मान समारोह:बैंक अधिकारियों ने निवेश और साइबर धोखाधड़ी…

    दीया मिर्जा का दिवाली वीडियो हटाने पर विवाद:भाजपा के ऐतराज के बाद BMC ने हटाया; एक्ट्रेस बोलीं- भलाई का जमाना नहीं रहा

    Hindi News Entertainment Bollywood BMC Removes Diya Mirza Diwali Video After BJP Controversy | Mumbai News दीया मिर्जा का दिवाली वीडियो हटाने पर विवाद:भाजपा के ऐतराज के बाद BMC ने…

    You Missed

    Selma Blair apologizes to the ‘people that I disappointed’ after plane incident arrest

    • By dp
    • November 2, 2026
    • 0 views
    Selma Blair apologizes to the ‘people that I disappointed’ after plane incident arrest

    बरेका में सेवानिवृत्त कर्मियों का सम्मान समारोह:बैंक अधिकारियों ने निवेश और साइबर धोखाधड़ी से बचाव की जानकारी दी

    • By dp
    • November 2, 2026
    • 0 views
    बरेका में सेवानिवृत्त कर्मियों का सम्मान समारोह:बैंक अधिकारियों ने निवेश और साइबर धोखाधड़ी से बचाव की जानकारी दी

    Denis Shapovalov vs. Karen Khachanov prediction, odds, picks for ATP Paris Masters 2026

    • By dp
    • November 2, 2026
    • 3 views
    Denis Shapovalov vs. Karen Khachanov prediction, odds, picks for ATP Paris Masters 2026

    दीया मिर्जा का दिवाली वीडियो हटाने पर विवाद:भाजपा के ऐतराज के बाद BMC ने हटाया; एक्ट्रेस बोलीं- भलाई का जमाना नहीं रहा

    • By dp
    • November 2, 2026
    • 3 views
    दीया मिर्जा का दिवाली वीडियो हटाने पर विवाद:भाजपा के ऐतराज के बाद BMC ने हटाया; एक्ट्रेस बोलीं- भलाई का जमाना नहीं रहा

    ‘Crystal Lake’ Hits 1.3 Billion Minutes Watched in 11 Days, Becoming Peacock’s No. 4 Scripted Debut Ever

    • By dp
    • November 2, 2026
    • 4 views
    ‘Crystal Lake’ Hits 1.3 Billion Minutes Watched in 11 Days, Becoming Peacock’s No. 4 Scripted Debut Ever

    हाथरस में युवक ने किया सुसाइड:कोल्ड स्टोरेज में करता था काम, शराब पीने का आदी था, पत्नी और बच्चे रह रहे थे अलग

    • By dp
    • November 2, 2026
    • 2 views
    हाथरस में युवक ने किया सुसाइड:कोल्ड स्टोरेज में करता था काम, शराब पीने का आदी था, पत्नी और बच्चे रह रहे थे अलग