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विवेकानंद की साधना से जुड़ा पवहारी बाबा आश्रम बदहाल:गाजीपुर में 65-70 लाख से हुआ था सुंदरीकरण, सोलर लाइटें 1-2 महीने में बंद; सड़क धंसीविपिन सिंह यादव | गाजीपुर3 मिनट पहले
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गाजीपुर में जिस पवहारी बाबा आश्रम में स्वामी विवेकानंद ने करीब चार महीने बिताए, आज वही आध्यात्मिक स्थल उपेक्षा और बदहाली से जूझ रहा है। नगर पालिका के वार्ड नंबर-1 में स्थित आश्रम परिसर की पार्क की सड़क टूटकर धंस चुकी है। चारों तरफ गंदगी और झाड़-झंखाड़ है। बाउंड्री वॉल में दरारें हैं और गंगा की ओर जाने वाली पुरानी सीढ़ियां भी जर्जर हो चुकी हैं।
आश्रम के संरक्षक अमित तिवारी के मुताबिक, करीब 5 से 7 साल पहले आध्यात्मिक पर्यटन से जुड़े विभाग से आश्रम के सुंदरीकरण के लिए करीब 65 से 70 लाख रुपए का फंड आया था। इससे पार्क विकसित करने, आने-जाने के लिए सड़क बनाने और करीब 20 सोलर लाइटें लगाने का काम हुआ।
उनका दावा है कि सोलर लाइटें लगने के बाद महज एक-दो महीने तक ही चलीं। इसके बाद एक-एक करके सभी बंद हो गईं। अब पार्क की सड़क टूट चुकी है और परिसर में नियमित साफ-सफाई भी नहीं हो रही है।
समस्याओं की जानकारी संबंधित अधिकारियों और काम कराने वाले ठेकेदार को कई बार दी गई।
विवेकानंद की साधना से जुड़ा है आश्रम
पवहारी बाबा आश्रम का महत्व धार्मिक स्थल के साथ स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पड़ाव के तौर पर भी बताया जाता है। आश्रम से जुड़े लोगों के अनुसार, जनवरी 1890 में स्वामी विवेकानंद गाजीपुर पहुंचे थे। यहां उन्होंने अपने मित्र गगनचंद चटर्जी के गोराबाजार स्थित घर पर प्रवास किया।
बताया जाता है कि वह सुबह करीब 4 बजे उठकर पवहारी बाबा के आश्रम पहुंचते थे। गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के बाद आश्रम परिसर में स्थित अशोक वृक्ष के नीचे बैठकर पवहारी बाबा से मिलने की प्रतीक्षा करते थे। शाम करीब 7 बजे वह वापस गोराबाजार स्थित अपने मित्र के घर लौट जाते थे। कई दिनों तक उनका यही क्रम चलता रहा।
करीब चार महीने रहे थे विवेकानंद, अशोक वृक्ष आज भी मौजूद
आश्रम के संरक्षक अमित तिवारी के मुताबिक, स्वामी विवेकानंद ने यहां करीब चार महीने प्रवास किया था। इसी दौरान वह पवहारी बाबा के संपर्क और उनके आध्यात्मिक व्यक्तित्व से प्रभावित हुए। आश्रम परिसर में मौजूद पुराना अशोक वृक्ष आज भी उस दौर की स्मृति से जुड़ा हुआ है।
गाजीपुर में इससे पुराना पेड़ मिलना मुश्किल है। इसी वृक्ष के नीचे स्वामी विवेकानंद बैठकर पवहारी बाबा की प्रतीक्षा करते थे।
300 साल पुराने अशोक वृक्ष के नीचे उगी झाड़ियां
अमित तिवारी का दावा है कि परिसर में मौजूद अशोक का पेड़ करीब 300 साल पुराना है। उनके मुताबिक, गाजीपुर में इससे पुराना पेड़ मिलना मुश्किल है। इसी वृक्ष के नीचे स्वामी विवेकानंद बैठकर पवहारी बाबा की प्रतीक्षा करते थे।
आज संरक्षण के अभाव में पेड़ के आसपास बना चौतरा क्षतिग्रस्त है और चारों तरफ झाड़-झंखाड़ उग आए हैं। ऐतिहासिक महत्व वाले इस स्थान पर पर्याप्त साफ-सफाई भी नहीं है। यहां आने वाले लोगों को इसके इतिहास और विवेकानंद से जुड़े प्रसंगों की जानकारी देने के लिए भी कोई खास इंतजाम नहीं है।
सड़क टूटी, बाउंड्री में दरार; गंगा की सीढ़ियां भी जर्जर
आश्रम में हुए सुंदरीकरण के काम के बाद अब इसकी स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। पार्क तक पहुंचने वाली सड़क जगह-जगह टूटकर धंस गई है। पार्क में गंदगी फैली है और सोलर लाइटें बंद पड़ी हैं। बाउंड्री वॉल में दरारें दिखाई दे रही हैं। गंगा स्नान के लिए पवहारी बाबा से जुड़ी पुरानी सीढ़ियां भी जर्जर हो चुकी हैं।
अमित तिवारी के अनुसार, इन समस्याओं की जानकारी संबंधित अधिकारियों और काम कराने वाले ठेकेदार को कई बार दी गई। ठेकेदार की ओर से जल्द समस्या दूर कराने का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन उनके मुताबिक आज तक स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं आया।
भाजपा से लेकर सपा-कांग्रेस नेताओं की भी रही आवाजाही
आश्रम का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होने के साथ राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ाव भी रहा है। अमित तिवारी के अनुसार, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी यहां पहुंचे थे। इसके अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और जनप्रतिनिधि भी समय-समय पर आश्रम में आते रहे हैं।
उनका कहना है कि इसके बावजूद आश्रम की मूलभूत सुविधाओं और संरक्षण पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। उनका दावा है कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के परिवार की भी इस स्थान से आस्था जुड़ी है और उनके घर के शुभ कार्यों की शुरुआत यहां पूजा-अर्चना से होने की परंपरा रही है। समाजवादी पार्टी के कई नेता और विधायक भी चुनाव से पहले यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते रहे हैं।
साधु-संतों और भिक्षुओं के ठहरने की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं
आश्रम से जुड़े लोगों के मुताबिक, यहां आने वाले साधु-संतों और भिक्षुओं के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि यहां आने वाले भिक्षुक जब आश्रम से भिक्षा लेकर जाते हैं, तभी उनकी भिक्षा पूरी मानी जाती है। रात में आने वाले लोगों के ठहरने के लिए परिसर में धर्मशाला या पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से उन्हें परेशानी होती है।
अमित तिवारी का कहना है कि नगर पालिका का पहला वार्ड इसी क्षेत्र से शुरू होता है और इसी वजह से इसे पवहारी बाबा वार्ड के नाम से भी जाना जाता है। इसके बावजूद साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
कार्नवालिस के मकबरे के पास, लेकिन आश्रम उपेक्षित
गाजीपुर की आध्यात्मिक विरासत में पवहारी बाबा आश्रम का अलग स्थान है। आश्रम के आसपास ही लॉर्ड कार्नवालिस का मकबरा भी स्थित है, जिसे संरक्षित स्मारक के तौर पर विकसित करने और पर्यटन की दृष्टि से सुविधाएं बढ़ाने के प्रयास किए जाते रहे हैं।
आश्रम से जुड़े लोगों का सवाल है कि जिस स्थान का संबंध पवहारी बाबा और स्वामी विवेकानंद जैसी आध्यात्मिक विभूतियों से रहा हो, उसके संरक्षण और विकास को भी उतनी ही गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा।
आज आश्रम परिसर में बंद पड़ी सोलर लाइटें, टूटती सड़क, जर्जर चौतरा, दरकती बाउंड्री और फैली गंदगी उस विरासत की स्थिति दिखा रही हैं, जिसे संरक्षण की जरूरत है। मामला सिर्फ पार्क या सड़क की बदहाली का नहीं, बल्कि उस आध्यात्मिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का भी है, जिसके साथ स्वामी विवेकानंद के गाजीपुर प्रवास की स्मृतियां जुड़ी हैं।
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