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संभल हिंसा में आरोपियों के मुकदमे की कार्यवाही पर रोक:हाईकार्ट ने दी राहत, कहा- अगली सुनवाई तक कोई कार्रवाई न करेंप्रयागराज4 घंटे पहले
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल हिंसा प्रकरण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में आरोपियों को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति वाणी रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि प्रथम
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यह आदेश विशेष वाद संख्या 89/2025 से संबंधित याचिका पर पारित किया गया। याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 528 के तहत दाखिल की गई थी, जिसमें संभल के कोतवाली थाना क्षेत्र में दर्ज केस क्राइम संख्या 337/2024 की पूरी कार्यवाही, संज्ञान आदेश तथा आरोप तय करने कीख कार्यवाही को निरस्त करने की मांग की गई है।
जानिये कोर्ट में क्या दलीलें दीं
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 24 नवंबर 2024 को दर्ज एफआईआर में 21 नामजद और 800 से 900 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था। उनका आरोप है कि यह मुकदमा झूठे और मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर दर्ज किया गया तथा इसका उद्देश्य केवल आरोपियों को परेशान करना था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं के नाम केवल कुछ वायरल वीडियो के आधार पर सामने आए हैं, जबकि उनकी पहचान और कथित घटना में संलिप्तता साबित करने के लिए कोई ठोस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह भी बताया कि इसी मामले के सह-आरोपी शाने आलम, शुएब, मोहम्मद आमिर और शुजाउद्दीन उर्फ सज्जू ने पहले हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उस याचिका पर 13 मई 2026 को पारित आदेश में अदालत ने उनके खिलाफ भी आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। इसी आधार पर वर्तमान याचिकाकर्ताओं ने समान राहत की मांग की।
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अपर शासकीय अधिवक्ता को नोटिस स्वीकार करने का निर्देश दिया तथा दूसरे पक्षकार को भी नोटिस जारी किया। अदालत ने विपक्षी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है, जबकि याचिकाकर्ताओं को उसके बाद एक सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी गई है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। तब तक संबंधित विशेष मामले में याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध किसी भी प्रकार की आगे की न्यायिक कार्यवाही नहीं की जाएगी।
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