- Hindi News
- Local
- Uttar pradesh
- Prayagraj
- Allahabad HC Stays Bijnor DM Order On Goga Navmi Mela | Court Ruling
डीएम जिले में ‘सर्वशक्तिमान’ की तरह काम नहीं कर सकते:हाईकोर्ट ने ‘गोगाजी नवमी’ मेले पर बिजनौर डीएम का आदेश निलंबित कियाप्रयागराज3 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिजनौर के जिलाधिकारी द्वारा पारंपरिक वार्षिक ‘जाहर दीवान’ (गोगा नवमी) मेले के प्रबंधन को लेकर जारी किए गए आदेश को निलंबित किया। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश प्रथम दृष्टया अधिकार क्षेत्र से बाहर है और ऐसा लगता है कि डीएम ने अपने अधिकार
.
डीएम ऐसी शक्तियों का इस्तेमाल न करें
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिलाधिकारियों को अपने जिले में इस तरह से शक्तियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए मानो वे ‘सर्वशक्तिमान’ हों। कोर्ट ने कहा, “इस अदालत ने बार-बार जिलाधिकारियों को चेतावनी दी कि वे अपने जिले में ‘सर्वशक्तिमान’ की तरह व्यवहार न करें—यानी ऐसे आदेश न दें जो उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते, बल्कि किसी अन्य जिला स्तरीय अधिकारी या न्यायाधीश के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। यह मामला भी प्रथम दृष्टया अधिकार क्षेत्र के अतिक्रमण का एक और उदाहरण है।”
क्या है मामला जानिये
गौरतलब है कि डीएम के इस आदेश के तहत पारंपरिक मेले का प्रबंधन ‘गांव सभा’ को सौंप दिया गया और राजस्व अधिकारियों की 3 सदस्यीय समिति के जरिए मेले से होने वाली कमाई भी गांव सभा को दी गई। यह आदेश 29 अगस्त, 2025 को जारी किया गया, जब आईएएस अधिकारी जसजीत कौर बिजनौर की जिलाधिकारी थीं। अगले ही महीने उनका तबादला हो गया और उनकी जगह आईएएस अधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने ले ली, जो अब जिले के डीएम हैं। इस आदेश को चुनौती देते हुए ‘सार्वजनिक आर्य इंटर कॉलेज’ की प्रबंधन समिति और एक अन्य पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट ने कहा फैसला खिलाफ है
हाईकोर्ट ने गौर किया कि याचिकाकर्ताओं ने पहले ही गांव सभा और कुछ विरोधी पक्षों के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया, जो पारंपरिक मेला आयोजित करने के उनके अधिकार पर सवाल उठा रहे थे। यह मुकदमा, जिसमें याचिकाकर्ताओं के प्लॉट नंबर 981 और 997 पर मेला आयोजित करने के अधिकार में किसी भी तरह की रुकावट को रोकने के लिए आदेश मांगा गया, 2 दिसंबर 1997 को बिजनौर के दूसरे अतिरिक्त सिविल जज (सीनियर डिवीजन) द्वारा याचिकाकर्ताओं के पक्ष में तय किया गया। यह मामला 1982 के मूल मुकदमे (ओरिजिनल सूट) से जुड़ा था।
हाईकोर्ट ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट का आदेश “सिविल कोर्ट के उस फैसले के बिल्कुल खिलाफ है, जो याचिकाकर्ताओं के पक्ष में और गांव सभा (तथा अन्य पक्षों) के खिलाफ दिया गया।” कोर्ट ने यह भी कहा कि हालांकि इस आदेश को एक ‘अंतरिम व्यवस्था’ (अस्थायी इंतजाम) के रूप में पेश किया गया, लेकिन इसमें शक्तियों का इतना व्यापक इस्तेमाल किया गया, जो किसी ट्रस्ट के प्रबंधन के लिए योजना बनाने वाले सिविल कोर्ट के अधिकारों जैसा ही था। बेंच ने माना कि प्रथम दृष्टया यह आदेश बिना किसी अधिकार क्षेत्र या कानूनी अधिकार के दिया गया। इसलिए हाईकोर्ट ने रिट याचिका को स्वीकार कर लिया और राज्य के प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया। प्रतिवादी संख्या 6 को नोटिस जारी किया गया, जिसका जवाब 17 नवंबर 2026 तक देना होगा।
अधूरा नहीं! पढ़िए पूरा! पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर ऐप पर
एप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करें
पूरी खबर पढ़ें ऐप परप्रीमियम मेंबरशिप है तो लॉगिन करें
Source link




