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7 घंटे में हुए 15 पोस्टमॉर्टम…नालियों में बहता रहा खून:सबने मरने से पहले परिवार से बात की, इकलौते बेटे की मौत पर मोर्चरी नहीं पहुंच सके मां-बापलखनऊ6 मिनट पहले
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लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद शव पोस्टमॉर्टम के लिए मोर्चरी पहुंचाए गए। वहां आए परिजनों ने बच्चों की पहचान की। बच्चों को खोने का गम परिवारों के चेहरे पर साफ था।
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चारों तरफ मां-बाप पोस्टमॉर्टम हाउस पर चीत्कार मारकर रोते नजर आ रहे थे। वहीं, बहती नालियों में हादसे का भयावह मंजर देखने को मिला। एक साथ जब पोस्टमॉर्टम शुरू हुआ तो नालियों में पानी की जगह खून की धार बह रही थी।
सन्नाटे वाली जगह पर रातभर रोए लोग-
पोस्टमॉर्टम हाउस पर लोग पहुंचे। कुछ लोगों को संभालना मुश्किल हो रहा था।
लोग डेडबॉडीज से लिपट-लिपटकर रोए।
एक युवती बिलख-बिलखकर रो रही थी।
पोस्टमॉर्टम हाउस में एक पिता को संभालना मुश्किल हो रहा था।
माता-पिता की तबीयत खराब, नहीं पहुंचे मोर्चरी
शादान शेख ने बताया कि अलीगंज अग्निकांड में हुए हादसे में उनके दोस्त अब्दुल रहनाम की मौत हो गई। अब्दुल बतौर आईटी टेक्निशियन काम कर रहे थे। वहां पर पिछले 8 महीने से काम पर थे। लंबे समय से नौकरी तलाशने के बाद जॉब मिली थी।
उसकी दो बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। अब्दुल के पिता पैरालाइज हैं। जब भी मिलता था काफी खुश रहता था कि उसकी जॉब लग गई है। अब्दुल के पिता पिछले आठ से बीमार हैं। उसने 18 साल की उम्र होते ही नौकरी शुरू की। साथ में पढ़ाई भी कर रहा था।
दोस्त की बॉडी देखकर रोना आ गया। घटना के बाद पिता और माता मोर्चरी तक नहीं आ सके। उसकी मां को विश्वास नहीं था कि दो घंटे पहले बात हुई ऐसा कैसे हो सकता है। वो हिम्मत नहीं जुटा सकीं। अब दोस्त तो वापस नहीं आएगा, बस सरकार से उचित सहायता मिल जाए।
शादान ने कहा- अब मेरा दोस्त वापस नहीं आएगा।
जान बचाने के लिए पीछे की तरफ भागा, लेकिन नहीं बच सका
सुखमनी के भाई ने बताया बीते सात से लखनऊ में रह रहे हैं। काम को लेकर काफी उत्सुक रहता था। सुबह जॉब पर निकला था काफी खुश था। शाम को वापस आकर घूमने चलने की बात बोली थी। अचानक से दोपहर में पिता को कॉल आई उसने बताया कि बिल्डिंग में आग लग गई है। कुछ समझ नहीं आ रहा है, अंदर की तरफ छुपकर बैठे हैं। इसके बाद से कोई बात नहीं हुई।
घटना से पहले लगभग सभी ने परिवार से बात की
मोर्चरी पर पहुंचे परिजन मीडिया से बात करने में करतराते रहे। हालांकि वीडियो में बिना आए सबकी जुबान से अंतिम समय की कहानी सुनाई दी। मोह्म्मद आम्मर के परिजनों ने बताया कि घटना से पहले अम्मार ने कॉल करके बता दिया था कि सब फंस गए। अब निकलने का रास्ता नहीं है। वहीं, आदित्य श्रीवास्तव के परिजनों ने पढ़ लिखकर अफसर बनने वालों को ही जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि सभी अधिकारी बनते ही नियम भूल जाते हैं।
जिसकी वजह से हादसे होते हैं, घटना से पहले आदित्य ने आग की जानकारी दी लेकिन इतनी भयानक होगी इसकी उम्मीद नहीं थी। वहीं अब्दुल रहमान के परिजनों ने भी यही बताया कि घटना से पहले फोन करके अंदर ही छिपने की जानकारी दी थी।
मोर्चरी की नालियों से बहता रहा खून
देर शाम ट्रामा सेंटर में डॉक्टरों द्वारा सभी को मृत घोषित करने के बाद सारे शव मोर्चरी पहुंचे। जहां 15 शवों के पोस्टमॉर्टम शुरू होते ही नाली में खून की धार बहने लगी। घटना की भयानक स्थिति को बाहर बनी नाली ने बंया किया। करीब 7 घंटे में 15 का पोस्टमॉर्टम किया गया। इसके लिए इमरजेंसी में 5 अतिरिक्त डॉक्टरों को बुलाया गया।
नाली में पानी की जगह खून तेजी से बह रहा था
घर शव पहुंचाने के लिए प्रशासन ने लगाई गाड़ियां
घटना के बाद प्रशासन ने पीड़ित परिवार को राहत देने के लिए शव वाहन फ्री कर दिया। जिसको जहां भी जाना है, उससे कोई रुपए नहीं लिया गया। लखनऊ में घर तक शव पहुंचाने के लिए पीजीआई, इंटीग्रल सहित अन्य अस्पतालों से एंबुलेंस बुलाया गया।
वहीं, जिले व राज्य के बाहर जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस को फ्री किया गया। वहीं, बाहर से आने वाले या फिर रात भर रुकने वालों के लिए केजीएमयू का ओल्ड एलुमिनाई गेस्ट हाउस खोला गया। जहां डॉक्टर अमिय अग्रवाल की निगरानी में पीड़ित परिवारों को रूकने की पूरी सुविधाएं दी गई।
पोस्टमॉर्टम के बाद रात में घर भिजवाए शव
घटना में 15 मृत लोगों के पोस्टमॉर्टम देर रात कर परिजनों को सुपुर्द किए गए। उत्तराखंड गढ़वाल के सागर की बॉडी रखी गई। जिसे परिवार तड़के ले गया। वहीं, वेस्ट बंगाल की अनामिका और सौमल्या का पोस्टमॉर्टम लोकल परिजनों के पंचनामे से हो गया। परिवार के पहुंचने के बाद उन्हें सुपुर्द किया गया।
वहीं, बाराबंकी के अम्मार, उन्नाव के सूरज व सीतापुर के आदित्य के परिजन शव लेकर रात में ही निकल गए। घटना में जायनील के परिजन देर रात तक नहीं पहुंचे थे। इसके अलावा लखनऊ के अन्य मृतकों को उनके परिजनों को सुपुर्द किया गया।
सीएमओ लखनऊ घटनास्थल से लेकर मर्चरी तक आते-जाते रहे। हर पल की जानकारी खुद लेते रहे।
घटनास्थल से लेकर मोर्चरी तक जायजा लेते रहे सीएमओ
घटना की जानकारी होते ही लखनऊ के सीएमओ मौके पहुंचे। वहां से राहत कार्य के लिए टीम और एंबुलेंस को तुरंत पहुंचने का निर्देश दिया। इसके बाद शवों के बाहर आने पर मोर्चरी पर भी बने रहे। इस दौरान हर पोस्टमॉर्टम का जायजा लिया। जो सुविधा उपलब्ध हो सकती थी, उसे मुहैया कराया।
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लखनऊ की कोचिंग में आग लगने की घटना में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 5 महिलाएं और 10 पुरुष हैं। ज्यादातर 20 से 30 साल के स्टूडेंट्स हैं। जिस बिल्डिंग में आग लगी, वह अवैध थी। इसे गिराने का आदेश 2016 में हुआ था, लेकिन दो महीने से कम समय में ही आदेश निरस्त कर दिया गया था। (पूरी खबर पढ़िए)
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