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भास्कर इंटरव्यूईशा सिंह ‘जूही मुई’ में ऑटिस्टिक किरदार निभा रहीं:प्रियंका चोपड़ा के ‘बर्फी’ वाले किरदार से तुलना पर बोलीं- वो मेरा ड्रीम रोल था2 घंटे पहलेलेखक: आशीष तिवारी
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शो ‘जूही मुई’ 29 जून से शुरू हुआ है। यह शो सोमवार से शुक्रवार रात 9:30 बजे कलर्स चैनल और जियोसिनेमा पर प्रसारित हो रहा है।
एक्ट्रेस ईशा सिंह कलर्स टीवी के नए शो ‘जूही मुई’ में नजर आ रही हैं। इस शो में वह पहली बार एक ऑटिस्टिक लड़की का किरदार निभा रही हैं। ऑटिस्टिक उस व्यक्ति को कहा जाता है, जो ऑटिज्म से ग्रसित होता है। ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं है, बल्कि मस्तिष्क के विकास से जुड़ी एक विशेष स्थिति है। इसके कारण व्यक्ति का दुनिया को देखने, समझने और दूसरों से बातचीत करने का तरीका आम लोगों से अलग होता है।
हाल ही में दैनिक भास्कर से खास बातचीत में ईशा सिंह ने अपने किरदार, उसकी तैयारी, ऑटिज्म को लेकर जागरूकता और शो से जुड़ी कई बातें शेयर कीं…
सवाल: शो ‘जूही मुई’ में आपका जो किरदार है, उसकी तैयारी किस तरह की?
जवाब: इस किरदार के लिए मैंने बहुत मेहनत की है। काफी समय बाद इतने ऑडिशन दिए। पहले घर से वीडियो भेजा, फिर ऑफिस में ऑडिशन, उसके बाद मॉक शूट और कई राउंड हुए। इस रोल के लिए मैंने वर्कशॉप कीं, ऑटिस्टिक लोगों से मिली, उनके इंटरव्यू देखे और काफी रिसर्च की। मेरी कोशिश यही है कि जिन लोगों को मैं रिप्रेजेंट कर रही हूं, उनकी भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
सवाल: ऑटिज्म जैसे विषय पर टीवी शो करना कितना जरूरी है?
जवाब: मेरी पूरी कोशिश है कि इस शो के जरिए लोग ऑटिज्म को समझें। आज भी टीवी की पहुंच देश के हर कोने तक है। बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके पास ओटीटी की रीच नहीं है। अगर हम अपने शो के माध्यम से लोगों में जागरूकता फैला सकें तो इससे अच्छी बात क्या होगी।
लोग अक्सर बिना समझे किसी बच्चे को ‘पागल’ कह देते हैं, जबकि वे कई बार हमसे ज्यादा सेंसिटिव और समझदार होते हैं। उन्हें बदलने की नहीं, समझने की जरूरत है। अगर मैं 0.2 प्रतिशत लोगों की सोच भी बदल पाऊं तो मुझे लगेगा कि मैंने कुछ अच्छा किया।
सवाल: ईशा और जूही में आपको सबसे बड़ी समानता क्या लगती है?
जवाब: हम दोनों बहुत इमोशनल हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि मैं अपने इमोशंस जाहिर कर देती हूं, लेकिन जूही ऐसा नहीं कर पाती। वहीं, जूही छोटी-छोटी चीजें बहुत गहराई से नोटिस करती है। उससे मैंने ज्यादा सेंसिटिव और दयालु होना सीखा है।
शो में ईशा सिंह ‘जूही सूरी’ नाम की एक ऑटिस्टिक लड़की का किरदार निभा रही हैं।
सवाल: क्या यह किरदार आपके करियर का माइलस्टोन साबित होगा?
जवाब: बिल्कुल। यह किरदार मेरे लिए हमेशा खास रहेगा। मुझे नहीं पता शो कितना बड़ा हिट होगा, लेकिन जूही हमेशा मेरे दिल के करीब रहेगी। यह कोई टिपिकल हीरोइन नहीं है। अगर लोग उसके इमोशंस को समझेंगे तो उससे प्यार करने लगेंगे।
सवाल: आपके ज्यादातर शोज किसी न किसी सामाजिक मुद्दे पर रहे हैं?
जवाब: मैं खुद को बहुत लकी मानती हूं। मेरा पहला शो ‘इश्क का रंग सफेद’ विधवा पुनर्विवाह पर था, वहीं ‘इश्क सुभान अल्लाह’ ट्रिपल तलाक पर और अब ऑटिज्म जैसे विषय पर काम कर रही हूं। अगर मेरे काम के जरिए समाज तक कोई अच्छा मैसेज पहुंच रहा है तो इससे बड़ी बात मेरे लिए नहीं हो सकती।
सवाल: इतने चैलेंजिंग किरदार को निभाना कितना मुश्किल होता है?
जवाब: यह मेंटली काफी थका देता है। 12 घंटे शूटिंग के बाद आप किरदार से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाते, लेकिन शूट खत्म होने के बाद मैं सबके साथ हंसती हूं, बातें करती हूं और फिर अगले दिन दोबारा जूही बन जाती हूं।
सवाल: आपके किरदार की तुलना प्रियंका चोपड़ा के ‘बर्फी’ वाले किरदार से होगी। इसे कैसे देखती हैं?
जवाब: प्रियंका चोपड़ा मेरी पसंदीदा एक्ट्रेस हैं। तुलना हो या न हो, इससे फर्क नहीं पड़ता। उनका किरदार मेरे ड्रीम रोल्स में से एक रहा है। जूही और उनका किरदार अलग हैं, लेकिन मुझे खुशी है कि मुझे भी ऐसा रोल निभाने का मौका मिला।
फिल्म ‘बर्फी!’ में प्रियंका चोपड़ा ऑटिज्म से प्रभावित झिलमिल चटर्जी के रोल में नजर आई थीं।
सवाल: इस किरदार के लिए आपने किस तरह की रिसर्च की?
जवाब: मैं अलग-अलग स्पेक्ट्रम के ऑटिस्टिक लोगों से मिली। उन्हें ऑब्जर्व किया और उन्हीं से बहुत-सी बातें सीखीं।
सवाल: इस शो को लेकर सबसे खास प्रतिक्रिया किसकी मिली?
जवाब: कई माताओं और एनजीओ के मैसेज आए। उन्होंने कहा कि पहली बार कोई शो उनके बच्चों को समझने की कोशिश कर रहा है। एक मां ने लिखा कि लोग उनके ऑटिस्टिक बच्चे को बीमारी समझते हैं। अगर हमारा शो यह सोच बदल सके तो इससे बड़ी खुशी मेरे लिए नहीं होगी।
सवाल: शो की तुलना एक K ड्रामा शो से की जा रही है। इस पर क्या कहेंगी?
जवाब: मैंने सबसे पहले वह शो भी नहीं देखा था। मैंने जो रिसर्च की थी, वह काफी इंडियनाइज्ड थी। मेरा सवाल सिर्फ इतना है कि भारत में ऑटिज्म पर जागरूकता फैलाने वाले कितने शो हैं? आज भी बहुत से लोगों को पता नहीं है कि ऑटिज्म क्या होता है।
अगर हमारा शो लोगों तक यह मैसेज पहुंचा सके और उनकी सोच में थोड़ा भी बदलाव ला सके, तो इससे अच्छी बात क्या होगी। इसलिए पहले शो को देखिए। सिर्फ तुलना या आलोचना करने के बजाय उसके मैसेज को भी समझिए।
दक्षिण कोरिया के टीवी शो ‘एक्स्ट्राऑर्डिनरी अटॉर्नी वू’ की कहानी वू यंग-वू नाम की एक ऑटिस्टिक वकील के इर्द-गिर्द घूमती है।
सवाल: सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और जजमेंट को कैसे संभालती हैं?
जवाब: आज के समय में किसी को जज करना बहुत आसान हो गया है। मेरे बारे में भी अच्छी और बुरी दोनों तरह की बातें होती हैं, लेकिन मैं सिर्फ पॉजिटिव चीजों पर ध्यान देती हूं और अपना काम करती रहती हूं।
सवाल: शो को लेकर परिवार का क्या रिएक्शन रहा?
जवाब: मेरी मां ने तो मेरे बिना ही पहला एपिसोड देख लिया। मेरे भाई ने कहा कि यह अब तक का मेरा सबसे बेहतरीन काम है। यह सुनकर मुझे सबसे ज्यादा खुशी हुई।
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