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आमिर खान सिलक्यारा टनल हादसे पर बनाएंगे फिल्म:कबीर खान करेंगे डायरेक्ट, ऑस्ट्रेलिया में लिखी स्क्रिप्ट; 17 दिन तक फंसे थे 41 मजदूरमेलबर्न, उत्तरकाशी12 घंटे पहले
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उत्तरकाशी की सिलक्यारा टनल और आमिर खान की फाइल फोटो।
आमिर खान की नई फिल्म ‘सिलक्यारा 41’ की स्क्रिप्ट ऑस्ट्रेलिया में लिखी जा चुकी है। आमिर खान ने एक दिन पहले 2023 में उत्तरकाशी की सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग में 17 दिनों तक फंसे 41 मजदूरों के रेस्क्यू ऑपरेशन पर फिल्म बनाने की घोषणा की थी।
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फिल्म का निर्देशन कबीर खान करेंगे। शुरुआती प्री-प्रोडक्शन का काम ऑस्ट्रेलिया में होगा। फिल्म का निर्माण आमिर खान प्रोडक्शंस, ऑस्ट्रेलिया की माइंड ब्लोइंग फिल्म्स और कबीर खान फिल्म्स मिलकर करेंगे।
एक दिन पहले ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में IFFM के दौरान आमिर खान ने ‘सिलक्यारा 41’ की घोषणा की।
ऑस्ट्रेलिया में हनीमून पर किया ऐलान
आमिर खान ने 5 जुलाई को अपनी गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट से शादी की। शादी के बाद हनीमून के लिए आमिर खान ऑस्ट्रेलिया में हैं। आमिर खान के बेटे आजाद और गौरी स्प्रैट के बेटे क्विन भी उनके साथ हैं।
इसी दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक अहम सिनेमाई सहयोग के तहत आमिर खान प्रोडक्शंस ने मेलबर्न स्थित प्रोडक्शन हाउस माइंड ब्लोइंग फिल्म्स के साथ मिलकर ‘सिलक्यारा 41’ बनाने की घोषणा की है।
मेलबर्न के इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (IFFM) ने शुक्रवार को अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर फिल्म की आधिकारिक घोषणा की।
शादी के बाद ऑस्ट्रेलिया में हनीमून के लिए रवाना होते आमिर खान।
फिल्म की कहानी भी ऑस्ट्रेलिया में लिखी
फिल्म में अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरंग विशेषज्ञ और ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य के प्रोफेसर अर्नोल्ड डिक्स की भूमिका को भी प्रमुखता से दिखाया जाएगा। फिल्म ऑस्ट्रेलियाई लेखक एंड्रयू अनास्टासियोस ने लिखी है।
निर्माताओं ने कहा, ‘सिलक्यारा 41′ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि साहस, धैर्य, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानवीय जज्बे का उत्सव है। भारत और ऑस्ट्रेलिया की दोस्ती के नए अध्याय में यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब लोग एक साझा उद्देश्य के लिए साथ आते हैं, तो असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।’
वहीं, निर्देशक कबीर खान की पिछली फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ थी, जो 2024 में रिलीज हुई थी और इसमें कार्तिक आर्यन मुख्य भूमिका में नजर आए थे। फिल्म 2023 में उत्तरकाशी की सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों के ऐतिहासिक बचाव अभियान पर आधारित होगी।
यह फिल्म उस घटना को बड़े पर्दे पर लाएगी, जब सुरंग का एक हिस्सा ढहने के बाद 41 मजदूर 17 दिनों तक अंदर फंसे रहे थे। भारतीय एजेंसियों, सेना, NDRF, SDRF और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों से सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।
उत्तरकाशी में चार धाम प्रोजेक्ट के तहत बन रही सिल्कयारी टनल।
अब पढ़िए कैसे पूरा हुआ था ऑपरेशन
12 नवंबर 2023
पूरे देश में दीवाली मनाने की तैयारियां चल रहीं थी, लेकिन तभी सुबह के करीब साढ़े 5 बजे उत्तरकाशी में बन रही सिलक्यारा-बड़कोट टनल के अंदर अचानक एक हिस्सा ढह गया। चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत बन रही इस सुरंग के सिलक्यारा छोर से करीब 200 मीटर अंदर मलबा भर गया और उसके दूसरी तरफ काम कर रहे 41 मजदूर फंस गए।
कुछ ही मिनटों में यह स्पष्ट हो गया कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं है। सुरंग के अंदर जमा मलबा, कमजोर भूगर्भीय संरचना और सीमित पहुंच ने स्थिति को बेहद मुश्किल बना दिया था। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन, NHIDCL, SDRF, NDRF, पुलिस और अन्य एजेंसियां सक्रिय हो गईं।
शुरुआती घंटों में सबसे बड़ी चिंता यह थी कि मजदूर जीवित हैं या नहीं। राहत की पहली खबर तब मिली जब सुरंग के अंदर से संकेत मिले कि सभी मजदूर सुरक्षित हैं। इसके बाद पूरा फोकस उन्हें भोजन, पानी, ऑक्सीजन और दवाइयां पहुंचाने पर केंद्रित हो गया।
जब मजदूर अंदर फंसे तो किसी को नहीं लगा था कि वो बच पाएंगे।
हादसे के अगले दिन पहुंचे सीएम धामी
इस हादसे के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इसे राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता घोषित किया। अगले ही दिन वह सिलक्यारा पहुंचे और मौके पर चल रहे रेस्क्यू कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर संसाधनों की कमी नहीं आने दी जाएगी।
रेस्क्यू अभियान के दौरान सीएम लगातार उत्तरकाशी, देहरादून और दिल्ली के बीच समन्वय बनाए रहे। केंद्र सरकार से लगातार संपर्क रखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अभियान की जानकारी लेते रहे और जरूरी संसाधन तुरंत मुहैया कराने के निर्देश दे दिए गए।
ये घटना इतनी बड़ी थी कि उत्तरकाशी से लेकर दिल्ली तक पूरा प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया। राज्य सरकार ने चिकित्सा सुविधाओं से लेकर लॉजिस्टिक सपोर्ट तक हर व्यवस्था पहले से तैयार रखी।मजदूरों के बाहर आने से पहले ही 41 एम्बुलेंस तैयार रखी गईं।
चिन्यालीसौड़ में विशेष चिकित्सा वार्ड बनाया गया। एम्स ऋषिकेश को अलर्ट मोड पर रखा गया। परिवारों के रहने, खाने और नियमित जानकारी की व्यवस्था भी प्रशासन ने संभाली।
सुरंग के बाहर इंतजार, अंदर उम्मीद
इस पूरे रेस्क्यू अभियान का सबसे मानवीय पक्ष उन 41 मजदूरों की कहानी थी, जो सुरंग के भीतर फंसे थे। शुरुआत में संकरी पाइपलाइन के जरिए ऑक्सीजन पहुंचाई गई। बाद में खाना, दवाइयां, सूखे मेवे और अन्य जरूरी सामान भेजा जाने लगा। मजदूरों से कॉन्टेक्ट होने के बाद मजदूरों को बताया गया कि बाहर हजारों लोग उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास कर रहे हैं।
कुछ दिनों बाद कैमरे के जरिए पहली बार उनकी तस्वीरें सामने आईं। इन तस्वीरों ने पूरे देश को राहत दी। मजदूरों को मोबाइल फोन, चार्जिंग व्यवस्था और टाइपपास के लिए कुछ गेम्स भी दिए गए ताकि उनका मोटिवेशन बना रहे। विशेषज्ञ लगातार उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने का प्रयास करते रहे।
ये है वो पहली तस्वीर जब दुनिया को पता लगा कि अंदर फंसे मजदूर जिंदा हैं और वो ठीक हैं।
इस समय ऐसा भी आया जब मशीनें हार मानने लगीं
रेस्क्यू का पहला बड़ा चरण मलबे के बीच से पाइप डालकर रास्ता बनाने का था। इसके लिए भारी क्षमता वाली ऑगर मशीनें लगाई गईं। मशीनों ने कई मीटर तक ड्रिलिंग की, लेकिन सुरंग के अंदर मौजूद स्टील, सरिया और अन्य बाधाओं के कारण काम बार-बार प्रभावित होता रहा।
कई बार ऐसा लगा कि ऑपरेशन लंबा खिंच सकता है। मशीनों के फंसने और तकनीकी समस्याओं ने बचावकर्मियों की चिंता बढ़ा दी। लेकिन यहीं उत्तराखंड और केंद्र सरकार की बहु-एजेंसी रणनीति काम आई। एक योजना रुकती तो दूसरी सक्रिय कर दी जाती। हॉरिजॉन्टल ड्रिलिंग के साथ-साथ वर्टिकल ड्रिलिंग और वैकल्पिक रास्तों पर भी एक साथ काम जारी रखा गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी टीमों ने दिन-रात काम किया। मशीनें खराब हुईं, लेकिन बचावकर्मियों के हौसले में कोई कमी नहीं आई और वे लगातार अभियान में जुटे रहे।
आखिरी 10 मीटर और रैट-होल माइनर्स की एंट्री
जब भारी मशीनें आखिरी चरणों में उम्मीदों के मुताबिक काम नहीं कर पाईं और ये ऑपरेशन लंबा खिंचता रहा तब सीएम धामी ने एक असाधारण फैसले के लिए हामी भरी। इसमें मशीन नहीं बल्कि रैट-होल माइनर्स को बुलाया गया। बेहद संकरी जगहों में हाथों से खुदाई करने में माहिर इन विशेषज्ञों ने अभियान की दिशा बदल दी।
उन्होंने पाइप के अंदर घुसकर मलबे को हाथों से हटाना शुरू किया। यह काम जोखिम भरा था, लेकिन यही वह कदम था जिसने सफलता का रास्ता खोला। घंटों की मेहनत के बाद अंतिम बाधा हटाई गई और 28 नवंबर 2023 को वह क्षण आया जिसका पूरा देश इंतजार कर रहा था।
यही मॉडल BRICS मंच तक भी पहुंचा
इस साल जून के पहले हफ्ते ओडिशा के पुरी में आयोजित BRICS DRR बैठक में जब उत्तराखंड का मॉडल दुनिया के सामने रखा गया तो सिल्क्यारा रेस्क्यू को सबसे अहम उदाहरण के तौर पर पेश किया गया। प्रतिनिधियों को बताया गया कि कैसे उत्तरकाशी की सुरंग में 41 मजदूरों के फंसने के बाद राज्य और केंद्र की कई टीमों ने मिलकर 17 दिन तक लगातार काम किया और सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
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