कटऑफ के बाद पात्रता प्रमाणपत्र नहीं दिया जा सकता:हाईकोर्ट का फैसला : भर्ती विज्ञापन में नकारात्मक शर्त पर

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कटऑफ के बाद पात्रता प्रमाणपत्र नहीं दिया जा सकता:हाईकोर्ट का फैसला : भर्ती विज्ञापन में नकारात्मक शर्त परप्रयागराज3 घंटे पहले

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले पर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा यदि भर्ती विज्ञापन या उससे संबंधित नोटिस में दस्तावेज अपलोड करने की स्पष्ट अंतिम तिथि तय की गई हो और यह भी कहा गया हो कि समय सीमा तक दस्तावेज जमा नहीं करने

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जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में यह दलील अभ्यर्थी की मदद नहीं कर सकती कि पात्रता वास्तव में पहले से मौजूद थी और केवल उसका प्रमाण बाद में पेश किया गया। जब भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेज जमा करने की समय-सीमा के साथ स्पष्ट नकारात्मक शर्त जुड़ी हो, तो समय बढ़ाने या देरी को माफ करने की गुंजाइश नहीं रहती।

जानिये क्या है पूरा मामला

मामला उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से 6 जनवरी 2022 को जारी विज्ञापन संख्या 2-परीक्षा/2022 के तहत कॉस्मेटोलॉजी ट्रेड में इंस्ट्रक्टर पद की भर्ती से जुड़ा था। इस पद के लिए उम्मीदवार के पास बेसिक कॉस्मेटोलॉजी में तीन साल का अनुभव होना जरूरी था। यह अनुभव संबंधित पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद का होना चाहिए। परीक्षा में देरी के बाद आयोग ने 3 फरवरी 2023 को इसी विज्ञापन के तहत नोटिस जारी किया। इसमें सभी अभ्यर्थियों को 28 फरवरी 2023 की मध्यरात्रि तक अपने दस्तावेज अपलोड करने का निर्देश दिया गया। कई अनुभव प्रमाणपत्र होने की स्थिति में उन्हें एक ही पीडीएफ में अपलोड करना था। नोटिस में साफ कहा गया कि जो अभ्यर्थी तय समय तक दस्तावेज अपलोड नहीं करेगा, उसे शॉर्टलिस्टिंग के लिए पात्र नहीं माना जाएगा और बाद में दस्तावेज जमा करने का कोई और अवसर नहीं दिया जाएगा।

आयोग ने स्वीकार नहीं किया, फंसा पेंच

अपीलकर्ता ने 8 जनवरी 2015 को अपनी योग्यता हासिल की थी। उसने 19 सितंबर 2017 का एक अनुभव प्रमाणपत्र अपलोड किया, जिसमें 1 सितंबर 2014 से 31 अगस्त 2017 तक का अनुभव दर्ज था। हालांकि, नियमों के अनुसार इसमें केवल दो साल सात महीने का ही अनुभव मान्य था और तीन साल की आवश्यक अवधि में पांच महीने की कमी रह गई। अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में सफल रही और दस्तावेज सत्यापन के दौरान भी उसके प्रमाणपत्रों पर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई। इसके बाद उसका चयन अस्थायी रूप से कर लिया गया। बाद में पांच महीने के अनुभव की कमी सामने आने पर उसने उसी संस्थान द्वारा 10 जनवरी 2022 को जारी दूसरा अनुभव प्रमाणपत्र पेश किया। आयोग ने यह कहते हुए उसे स्वीकार नहीं किया कि दूसरा प्रमाणपत्र तय अंतिम तिथि तक पहले प्रमाणपत्र के साथ अपलोड नहीं किया गया।

रिट याचिका हुई थी खारिज

इसके खिलाफ दायर रिट याचिका को 26 नवंबर 2025 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट में अंतर-न्यायालय अपील दाखिल की। अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि आयोग ने कभी यह विवाद नहीं किया कि उसके पास आवश्यक अनुभव है। दूसरा प्रमाणपत्र केवल अनजाने में अपलोड नहीं हो पाया। यह भी कहा गया कि दूसरा प्रमाणपत्र 28 फरवरी 2023 की कटऑफ तिथि से काफी पहले, 10 जनवरी 2022 को जारी हो चुका है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले दिव्या बनाम भारत संघ पर भरोसा करते हुए कहा कि जहां भर्ती प्रक्रिया में स्पष्ट नकारात्मक शर्त हो, वहां बाद में दस्तावेज जमा कर किसी कमी को दूर नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने क्या कहा जानिये

हाईकोर्ट ने कहा कि मूल भर्ती विज्ञापन में भले ही ऐसी नकारात्मक शर्त नहीं थी, लेकिन 3 फरवरी 2023 के नोटिस में यह शर्त स्पष्ट रूप से शामिल कर दी गई। चूंकि अभ्यर्थी ने उस नोटिस को चुनौती नहीं दी, इसलिए उसे मूल विज्ञापन का हिस्सा मानकर पढ़ा जाना होगा। पीठ ने कहा कि दिव्या मामले में भी नकारात्मक शर्त मौजूद थी और सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में बाद में दस्तावेज दाखिल करने की कोई कानूनी गुंजाइश नहीं है। ऐसी शर्त केवल निर्देशात्मक नहीं, बल्कि अनिवार्य होती है। कोर्ट ने कहा कि 28 फरवरी 2023 तक दूसरा अनुभव प्रमाणपत्र अपलोड करना अनिवार्य था। ऐसा नहीं करने पर अपीलकर्ता ने शॉर्टलिस्ट होने और चयन का अपना अधिकार खो दिया।

इस दलील को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया कि आयोग ने आपत्ति देर से उठाई। कोर्ट ने कहा कि चयन केवल अस्थायी था और जब आवश्यक पात्रता पूरी नहीं होती, तब केवल समानता या न्यायसंगत आधार पर राहत देने का अधिकार भी नहीं बचता। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह सवाल खुला छोड़ दिया कि यदि प्रमाणपत्र जारी करने वाले तीसरे पक्ष की गलती के कारण दस्तावेज में कमी रह गई हो, तो क्या ऐसी स्थिति में अदालत अपने विवेकाधीन अधिकार का इस्तेमाल कर राहत दे सकती है। फिलहाल, इस मामले में हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के फैसले में कोई त्रुटि नहीं पाई और अपील खारिज की।

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