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उद्यमियों के निकास द्वार के लिए प्रयास शुरू:समिति ने निरीक्षण किया; बोक्टा चौराहे पर गोलंबर बनाकर देंगे रास्तागोरखपुर2 मिनट पहले
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गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GIDA) के सेक्टर 13 व 15 में फैक्ट्रियां संचालित करने वाले उद्यमियों एवं वहां काम करने वाले हजारों कामगारों को निकलने का रास्ता देने पर मंथन शुरू हो गया है। पहले जिला स्तरीय, उसके बाद मंडल स्तरीय उद्योग बंधु की बैठकों
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सोमवार को संपन्न मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक में उद्यमी काफी आक्रोशित नजर आए थे। उनका आक्रोश GIDA से निकासी का रास्ता न होने को लेकर था। उद्यमियों ने कहा था कि सेक्टर 13 व सेक्टर 15 में हजारों लोग काम करते हैं। वहां जाने के लिए 3 प्रवेश द्वार बनाए गए हैं लेकिन एक भी एग्जिट द्वार नहीं है। हम वहां जाते तो हैं लेकिन निकलने का रास्ता नहीं है। जान जोखिम में डालकर सड़क पर उल्टी दिशा से आना पड़ता है। कमिश्नर ने इस समस्या को हल कराने का आश्वासन दिया था। इधर डीएम ने इसको लेकर एक कमेटी गठित कर दी थी।
उद्यमियों के लिए निकास रास्ते का हल निकालने के लिए गठित कमेटी में एडीएम प्रशासन वैभव शर्मा, एसपी ट्रैफिक अमित श्रीवास्तव, अपर मुख्य कार्यकालक अधिकारी गीडा रामप्रकाश, एसडीएम सहजनवा, गीडा के सहायक महाप्रबंधक सिविल विवेक वर्मा, एनएचएआई के अधिशासी अभियंता चिन्मय दूबे, चैंबर आफ इंडस्ट्रीज की ओर से नामित सदस्य कमलेश सिंह एवं आकाश जालान शामिल हैं। इन अधिकारियों ने मंगलवार को GIDA पहुंचकर निकास मार्ग के लिए संभावनाएं तलाशीं। इस दौरान NHAI के परियोजना निदेशक भी मौजूद थे।
टीम ने एक-एक कर सभी संभानवाएं तलाशीं लेकिन समाधान के लिए बस एक ही रास्ता नजर आया कि बोक्टा चौराहे पर बड़ा गोलंबर बनाया जाए और वहीं से उद्यमियों को एग्जिट दिया जाए। इस बात पर NHAI के अधिकारी भी सहमत नजर आए। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की रोड सेफ्टी ऑडिट टीम यहां आकर जांच करेगी, उसके बाद गोलंबर बनाने पर फैसला हो जाएगा। इससे पहले भी बोक्टा में गोलंबर बनाने को लेकर पहल हुई थी लेकिन कतिपय कारणों से गोलंबर नहीं बन पाया था। चैंबर आफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह ने बताया कि प्रशासन एवं गीडा प्रबंधन ने उद्यमियों की समस्या को गंभीरता से लिया है। आज टीम जांच करने भी आयी थी। विकल्प तलाशे गए हैं। उम्मीद है कि हल निकल आएगा।
जानिए कितनी फैक्ट्रियां हैं इन सेक्टरों में
गोरखपुर से GIDA की ओर जाने पर गोरखपुर-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग के बायीं ओर सारी औद्योगिक इकाइयां हैं। कालेसर जीरो प्वाइंट से लेकर सहजनवा के आगे मुरारी इंटर कालेज तक लगभग 6 किलोमीटर में कोई कट नहीं है। चैंबर आफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह ने कहा कि सेक्टर 13 व 15 मिलाकर 400 से अधिक औद्योगिक इकाइयां संचालित होती हैं। उद्यमियों ने कहा कि यहां हजारों वर्कर काम करते हैं। फैक्ट्रियों तक जाने का रास्ता तो है लेकिन वहां से निकलने का नहीं। ऐसे में उद्यमियों के साथ वर्कर भी परेशान होते हैं।
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