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हाथरस में कॉलोनाइजर पर शिकंजा कसने की तैयारी:सरकारी जमीन पर कब्जा कर बसाई कॉलोनी, अन्य कॉलोनियों की भी होगील जांचहाथरस5 मिनट पहले
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हाथरस में स्थानीय प्रशासन ने ग्लोरी गार्डन कॉलोनी के कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। सरकारी और सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे के आरोप में कॉलोनाइजर मनोज यादव और मैसर्स वसुंधरा एस्टेट्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। यह मुकदमा नगर पालिका के नजूल निरीक्षक यशुराज शर्मा ने दर्ज कराया था।
जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित जांच कमेटी ने स्थलीय निरीक्षण और राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद यह कार्रवाई की। जांच में पाया गया कि ग्लोरी गार्डन कॉलोनी के निर्माण में बड़े पैमाने पर सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति को घेरा गया है। कॉलोनाइजर ने इन भूमियों के स्वरूप को बदलकर उन पर पक्की पटरी और इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछा दी थीं। गाटा संख्या 447 (0.121 हेक्टेयर) जो अभिलेखों में नाली के रूप में दर्ज थी, और गाटा संख्या 500 (0.135 हेक्टेयर) जो नाली व रास्ते के लिए अंकित थी, उनका अतिक्रमण किया गया। इसी तरह, गाटा संख्या 502 (0.069 हेक्टेयर) जो पोखर में दर्ज थी, उसे भी बदला गया।
इसके अतिरिक्त, गाटा संख्या 503 (0.055 हेक्टेयर) और 581, जो रास्तों के रूप में दर्ज थीं, उन्हें भी कॉलोनी के विकास में उपयोग किया गया। सभी सरकारी जमीनों को ग्लोरी गार्डन कॉलोनी की चहारदीवारी के भीतर शामिल कर निजी उपयोग में ले लिया गया था। कॉलोनी के निर्माण के बाद भी किसी सक्षम स्तर से आवश्यक वैधानिक विनियमन या अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई थी।
कोतवाली हाथरस गेट में मनोज यादव, मैसर्स वसुंधरा एस्टेट्स और उनके सहयोगियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। सूत्रों की माने तो इस कॉलोनाइजर के खिलाफ तो मुकदमा दर्ज कर दिया गया है लेकिन अब साथ में कुछ तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी एक्शन हो सकता है जिन्होंने इस कॉलोनाइजर की कॉलोनी बसाने में मदद की। इस जमीन को कब्जा मुक्त करने के लिए प्रशासन बुलडोजर एक्शन भी ले सकता है। प्रशासन अब इस कॉलोनाइजर द्वारा शहर में बसाई गई अन्य कॉलोनियों की भी गोपनीय जांच कर रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं वे भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके तो नहीं बनाई गई हैं।
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