- Hindi News
- Local
- Uttar pradesh
- Kanpur
- Kanpur VIP Road Protest | SP MLA Hassan Rumi Statement On Sinkhole
18 फीट गड्ढे में बैठने वाले सपा MLA का इंटरव्यू:हसन रूमी बोले- सड़क दरक रही थी; अफसरों को बताया, नहीं आए तो उतर गयाकानपुर5 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
कानपुर की जाजमऊ सरैया वीआईपी रोड पर सड़क धंसने के विरोध में समाजवादी पार्टी के विधायक हसन रूमी करीब 18 फीट गहरे गड्ढे में उतरकर 4.5 घंटे तक बैठे रहे। दैनिक भास्कर ने बातचीत कर जानने की कोशिश की आखिर विधायक गड्ढे में क्यों उतरे। विधायक के मुताबिक, गड्
.
हसन रूमी का कहना है कि गड्ढे में उतरना पहले से तय कार्यक्रम नहीं था। उन्होंने मौके पर जाने से पहले नगर आयुक्त, एक्सईएन और संबंधित अधिकारियों को फोन किया था। करीब एक घंटे इंतजार के बाद भी अधिकारी नहीं पहुंचे तो उन्होंने विरोध के तौर पर गड्ढे में उतरने का फैसला किया।
सपा विधायक मोहम्मद हसन रूमी।
पढ़िए विधायक हसन रूमी से बातचीत के सवाल-जवाब…
सवाल: आप 4.5 घंटे तक 18 फीट गहरे गड्ढे में बैठे रहे। उस दौरान क्या महसूस हुआ? जवाब- मैं गड्ढे में बैठने के इरादे से नहीं गया था। जब वहां पहुंचा, उससे पहले संबंधित विभाग के मुखिया और नगर आयुक्त को फोन किया था। मैंने कहा था कि दो दिन से गड्ढा हुआ है। क्षेत्रीय विधायक होने के नाते चाहता था कि संबंधित अधिकारी मौके पर आएं और लोगों को आश्वासन दें कि काम शुरू हो जाएगा।
जब मैं वहां पहुंचा तो करीब एक घंटे तक कोई नहीं आया। इसके बाद मैंने लोकतंत्र में मिले अधिकार का इस्तेमाल करते हुए विरोध के लिए गड्ढे में उतरने का फैसला किया।
सवाल: जब गड्ढे के अंदर पहुंचे डर नहीं लगा?
जवाब-अंदर काफी सफोकेशन था। गैस भी थी। लेकिन जब विरोध होता है तो किसी चीज से डरा नहीं जाता। मुझे लगा कि मैं जितनी देर यहां बैठा हूं और अधिकारी नहीं आ रहे हैं, इससे उनकी निष्क्रियता दिखाई दे रही है।
मुझे कई बार डर भी लगा। पीछे से सड़क धंस रही थी। दाईं तरफ का हिस्सा दरक भी रहा था। एक जगह पर बैठना मुश्किल था। मेरे साथ जो लोग थे, उनसे कहा कि आप लोग बाहर चले जाएं। अगर एक साथ सड़क कोलैप्स हो गई तो बाहर निकलने में दिक्कत होगी।
सवाल: क्या आपको अपनी जान का खतरा महसूस हुआ? जवाब- कई बार डर का अहसास हुआ। अंदर का वातावरण भयावह था। गड्ढा बहुत गहरा था। दाएं-बाएं भी गड्ढे थे। सड़क बार-बार दरक रही थी। ऑक्सीजन की कमी महसूस हो रही थी।
ऊपर वाले का करम था। मैं ईमानदारी से वहां बैठा था। मैं इसलिए बैठा था कि अपने क्षेत्र की जनता और वहां से गुजरने वाले हजारों-लाखों लोगों को परेशानी न हो। जिस रास्ते से पानी निकला, उससे मुख्य सड़क के भी क्षतिग्रस्त होने का खतरा था।
सवाल: आप गड्ढे में कब उतरे और कब बाहर निकले? जवाब- जब अधिकारियों का इंतजार करने के बाद भी कोई नहीं आया, तो करीब 12:30 से 12:35 बजे के बीच मैं गड्ढे में उतरा। करीब 4:45 से 5 बजे के बीच वहां से बाहर निकला।
सवाल: क्या अधिकारियों को पहले से पता था कि आप मौके पर पहुंच रहे हैं? जवाब- हां, लेकिन मेरा कोई प्रायोजित कार्यक्रम नहीं था। मैं ईमानदारी से संबंधित विभाग के अधिकारियों को जानकारी देकर वहां गया था। नगर आयुक्त को फोन किया, एक्सईएन को फोन किया और संबंधित अधिकारियों को भी फोन किया, लेकिन कोई जल्दी नहीं पहुंचा।
मेरी जिम्मेदारी थी कि वहां जाकर लोगों को भरोसा दिलाऊं कि सड़क और गड्ढे का काम जल्दी शुरू होगा। अगर मेरे जाने के बाद सिर्फ लीपापोती हो जाए और लोगों को आश्वासन न मिले, तो यह बेईमानी होती।
सवाल: आपने गड्ढे में उतरने का फैसला क्यों किया? जवाब- मैंने जनता से वादा किया है कि हर समस्या के लिए उनकी लड़ाई लड़ूंगा। अगर किसी समस्या के सामने डरकर भाग जाऊं कि मेरे साथ हादसा हो सकता है, तो मेरा वादा झूठा हो जाएगा। मैं जनता को यह भी बताना चाहता था कि मुख्य मार्ग तक की अनदेखी हो रही है। यह रास्ता कानपुर को जाजमऊ से जोड़ता है और यहां से बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। जब मुख्य मार्ग की यह स्थिति है तो छोटी सड़क, गली और नाली की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सवाल: नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्यमंत्री भी अधिकारियों को फटकार लगा चुके हैं। कानपुर में नगर निगम के हाल कैसे हैं? जवाब- मैंने विधानसभा में अपने अधिकारों के तहत नगर निगम के कामकाज को लेकर कई बार शिकायत की है। नियम के तहत भी मुद्दे उठाए हैं।
नगर निगम के कॉर्पोरेटरों ने भी शिकायतें की हैं। जब अपनी ही पार्टी के लोगों को लगा कि घपला, घोटाला और भ्रष्टाचार हो रहा है, तो उन्होंने भी शिकायत की। इससे विपक्ष की शिकायतों को भी कहीं न कहीं पार्टी के लोगों ने सही माना।
सवाल: सड़क की गुणवत्ता और निर्माण को लेकर आपका क्या आरोप है? जवाब- यह सड़क करीब डेढ़-दो साल पुरानी है। करीब डेढ़ महीने पहले यहां एक छोटा-सा छेद हुआ था और उससे पानी का रिसाव हो रहा था। नगर निगम के लोग आए और लीपापोती कर दी।
मेरा सवाल है कि वीआईपी रोड पर इस तरह की लीपापोती करने की हिम्मत कैसे हो जाती है? अगर किसी ऐसी सड़क पर कच्चा काम किया जाए जहां ट्रैफिक कम हो, तो शायद वह कुछ समय चल जाए। लेकिन इस मार्ग पर ऐसी लापरवाही जल्दी सामने आ जाती है।
सवाल: आपने भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। क्या कहना है? जवाब- मेरा आरोप है कि विकास के काम में जिस प्रोजेक्ट के लिए पैसा आवंटित होता है, उसका पूरा पैसा जमीन पर नहीं लगता। करीब 40% पैसा प्रोजेक्ट पर लगता है और 60% विभागीय स्तर पर और सत्ता के संरक्षण में चला जाता है। कई ठेकेदार पर कार्रवाई हुई है, कई पर होनी है।
अधूरा नहीं! पढ़िए पूरा! पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर ऐप पर
एप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करें
पूरी खबर पढ़ें ऐप परप्रीमियम मेंबरशिप है तो लॉगिन करें
Source link




