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नोएडा में रिटायर्ड कर्मचारी से 18 लाख की ठगी:आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के नाम पर डराया,डिजिटल अरेस्ट कर पैसे ट्रांसफर कराएनोएडाकुछ ही क्षण पहले
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-प्रतीकात्मक फोटो
नोएडा में साइबर अपराधियों ने दिल्ली विश्वविद्यालय से रिटायर्ड एक बुजुर्ग को जम्मू-कश्मीर में हुई आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का डर दिखाकर डिजिटल अरेस्ट कर लिया। आरोपियों ने खुद को एटीएस पुणे का अधिकारी बताया और उनके आधार कार्ड पर जारी सिम के आ
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13 जुलाई को आया था फोन
सेक्टर-77 स्थित सिविटेक संप्रीति सोसायटी निवासी बुजुर्ग ने पुलिस को बताया कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हैं। 13 जुलाई को उनके पास एक अनजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को एटीएस पुणे का अधिकारी बताया।
आरोपी ने कहा कि उनके आधार कार्ड पर जारी मोबाइल सिम का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में हुई आतंकवादी गतिविधियों में किया गया है। मामले की जांच एटीएस पुणे द्वारा किए जाने का दावा किया गया।
वॉट्सऐप कॉल पर दिखाया गिरफ्तारी वारंट
अगले दिन आरोपी ने वॉट्सऐप कॉल की। इस दौरान उसने बुजुर्ग को गिरफ्तारी का वारंट दिखाया। आरोपियों ने कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें लगातार बातचीत में उलझाए रखा। इसके बाद उन्हें विश्वास दिलाया गया कि अगर गिरफ्तारी से बचना है तो उनके बताए तरीके से ही काम करना होगा।
डर के कारण पीड़ित आरोपियों के निर्देशों का पालन करते रहे। इसी दौरान साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खातों की जानकारी ले ली और खाते में जमा रकम के बारे में भी पूछताछ की।
शालीमार जाकर 18 लाख रुपए आरटीजीएस किए
आरोपियों ने पीड़ित को एक बैंक खाते की जानकारी भेजी और उसमें 18 लाख रुपए ट्रांसफर करने को कहा। इसके बाद पीड़ित दिल्ली के शालीमार गए और अपने नैनीताल बैंक के खाते से आरटीजीएस के जरिए 18 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।
17 जुलाई को उन्हें पता चला कि फोन करने वाले किसी जांच एजेंसी के अधिकारी नहीं, बल्कि साइबर अपराधी थे। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर साइबर अपराध थाने में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक मामले की जांच की जा रही है। बैंक खातों और कॉल से जुड़े विवरण के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
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