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कभी होटल में काम करते थे पंकज त्रिपाठी:मनोज बाजपेयी की चप्पल रख ली थी, प्रदर्शन के चलते 7 दिन जेल में भी बिताए थे6 घंटे पहले
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पंकज त्रिपाठी का जन्म बिहार के गोपालगंज जिले के बेलसंड गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था।
दिग्गज अभिनेता पंकज त्रिपाठी का आज 50वां जन्मदिन है। पंकज त्रिपाठी उन कलाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के अपनी अलग पहचान बनाई। बिहार के गोपालगंज जिले के बेलसंड गांव से निकलकर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा तक पहुंचे पंकज ने फिल्मों में छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत की और वर्तमान समय के हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित अभिनेताओं में से एक हैं।
पंकज की जिंदगी से जुड़ा एक इमोशनल किस्सा अभिनेता मनोज बाजपेयी से भी जुड़ा है। जब पंकज ने मनोज की चप्पल अपने पास रख ली थी।
दरअसल, फिल्मों में पहचान बनाने से पहले पंकज त्रिपाठी पटना के होटल मौर्य की किचन में सुपरवाइजर के तौर पर काम करते थे। वह होटल में काम करने के साथ-साथ थिएटर भी किया करते थे।
पंकज ने कपिल शर्मा के शो में बताया था कि वो मनोज बाजपेयी के बहुत बड़े फैन थे। उन्हें जब पता चला कि मनोज बाजपेयी होटल में रुके हुए हैं, तो उन्होंने होटल के स्टाफ से कहा था कि मनोज बाजपेयी के रूम से कोई भी ऑर्डर आए तो सीधे उनको बताना।
जब मनोज के कमरे से ऑर्डर आया तब पंकज ने होटल में मौजूद ढेर सारे सेबों में से सबसे अच्छे सेब चुनवाए और उन्हें अच्छी तरह पैक करवाकर एक्टर के कमरे में भेजा था।
पंकज त्रिपाठी और मनोज बाजपेयी ने एक साथ मुख्य रूप से फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर (2012) में काम किया है।
इसके साथ ही उन्होंने वेटर से कह दिया था कि मनोज जी से कहना कि एक लड़का उनसे मिलना चाहता है और वह थिएटर करता है।
इसके बाद पंकज खुद मनोज के कमरे में पहुंचे। उन्होंने मनोज को प्रणाम किया, पैर छुए और बताया कि वह भी थिएटर करते हैं। कुछ देर उनसे मिलने के बाद पंकज वहां से वापस आ गए।
मनोज की चप्पल होटल में छूट गई थी
पंकज ने बताया था कि अगले दिन सुबह मनोज बाजपेयी होटल से चेकआउट करके एयरपोर्ट के लिए निकल गए।
हालांकि, मनोज की एक हवाई चप्पल होटल के कमरे में छूट गई। जिसके बाद हाउसकीपिंग के कर्मचारी ने पंकज से कहा, “तुम्हारे मनोज बाजपेयी चप्पल छोड़ गए हैं।”
यह सुनते ही पंकज ने कहा कि चप्पल हाउसकीपिंग में जमा मत करो, उन्हें दे दो।
इसके पीछे की वजह बताते हुए पंकज ने कहा था, “एकलव्य की तरह अगर मैं इनके खड़ाऊं में अपना पैर डाल लूंगा…”
यह कहते-कहते पंकज शो में भावुक हो गए थे। उनकी आंखों से आंसू निकल आए थे।
पंकज की जिंदगी में एक नहीं, दो जन्मतिथियां
पंकज त्रिपाठी की जन्मतिथि को लेकर भी एक दिलचस्प किस्सा है। दस्तावेजों और कई आधिकारिक प्रोफाइल में उनकी जन्मतिथि 5 सितंबर 1976 दर्ज है। हालांकि, पंकज ने खुद बताया था कि उनका जन्म वास्तव में 28 सितंबर 1976 को हुआ था।
उन्होंने बताया था कि बचपन में स्कूल में नामांकन के दौरान उनके भाई से जन्मतिथि पूछी गई थी। भाई को सही तारीख याद नहीं थी, इसलिए 5 सितंबर दर्ज हो गया। जिसके चलते यही तारीख उनकी जन्मतिथि बन गई।
पंकज त्रिपाठी ने 7 दिन जेल में बिताए थे
कॉलेज के दिनों में पंकज त्रिपाठी का सामना जेल से भी हुआ था। साल 1993 में वह छात्र राजनीति से जुड़े थे और एक आंदोलन के दौरान उन्हें पटना की बेऊर जेल में करीब सात दिन बिताने पड़े।
दरअसल, मधुबनी में छात्रों पर हुई गोलीबारी के विरोध में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ प्रदर्शन किया था। जिसके चलते उन्हें राजनीतिक कैदी के रूप में जेल में रहना पड़ा था।
पटना में कॉलेज के दिनों में पंकज त्रिपाठी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े हुए थे।
जेल में बिताए इन सात दिनों ने पंकज की सोच पर गहरा असर डाला। इसी दौरान उन्हें किताबें पढ़ने का शौक लगा। जेल में बंद अलग-अलग लोगों और उनके स्वभाव को करीब से देखने का मौका मिला, जिसे बाद में उन्होंने अपने अभिनय और किरदारों को समझने में भी इस्तेमाल किया।
एक नजर पंकज त्रिपाठी के करियर पर
पंकज त्रिपाठी को फिल्मों में शुरुआती दौर में छोटे किरदार मिले। ‘रन’ और ‘ओमकारा’ जैसी कई फिल्मों में नजर आने के बाद उन्हें 2012 में आई अनुराग कश्यप की ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से पहचान मिली। फिल्म में उनका सुल्तान कुरैशी का किरदार दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ।
पंकज त्रिपाठी ने साल 2004 में आई फिल्म ‘रन’ से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी, जिसमें उनका बहुत छोटा सा रोल था।
इसके बाद पंकज ने फुकरे, मसान, निल बट्टे सन्नाटा, बरेली की बर्फी, न्यूटन और स्त्री जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।
OTT पर सेक्रेड गेम्स, मिर्जापुर और क्रिमिनल जस्टिस जैसी सीरीज ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया।
मिमी में उनके अभिनय के लिए पंकज त्रिपाठी को 69वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार मिला था।
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