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वायरल-आश्रम ढहने के 40 घंटे बाद भी नहीं मिला व्यक्ति:मलबे में दबे होने की आशंका, तेज बहाव से नहीं हट सका मलबा, सेना से मांगी गई मददप्रयागराज | अभिषेक सिंह2 घंटे पहले
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प्रयागराज में गंगा नदी के बीच बना संत बजरंग दास का तीन मंजिला आश्रम ढहे हुए करीब 40 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन हादसे में लापता 40 वर्षीय शिष्य हरीश सिंह का अभी तक पता नहीं चल सका है। NDRF और जल पुलिस की टीमें लगातार उसकी तलाश में जुटी हैं। घटनास्थल से लेकर नदी में करीब 3 से 4 किलोमीटर के दायरे में खोज अभियान चलाया गया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली है। आशंका है कि शिष्य हरीश सिंह मलबे के नीचे दबे सकता है। मलबे को अभी तक हटाया नहीं जा सका है, पुलिस के मुताबिक दलदल और बहाव तेज होने से मलबा नहीं हट सका।
तेज बहाव के कारण नहीं हटाया जा सका मलबा
हादसे के बाद से ही बचाव टीमें लापता व्यक्ति की तलाश कर रही हैं। घटनास्थल पर गंगा का बहाव तेज होने के कारण मलबा हटाने में परेशानी हो रही है। इसी वजह से आश्रम के मलबे के नीचे दबे व्यक्ति तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। बचाव दल नदी में आसपास के इलाकों में भी लगातार तलाश कर रहे हैं।
2 तस्वीरें देखिए…
आश्रम ढहने से उसमें रखा सामान नदी में बह गया।
ये संत बजरंग दास हैं। बाढ़ के दौरान आश्रम के ऊपर जाने के लिए सीढ़ी लगाई गई थी।
शुक्रवार शाम 7 बजे हुआ था हादसा
शुक्रवार शाम करीब 7 बजे संत बजरंग दास का तीन मंजिला आश्रम अचानक ढहकर गंगा नदी में समा गया था। हादसे के समय तीन शिष्य आश्रम में सामान लेने गए थे। इनमें दो शिष्य मलबे में दबकर घायल हो गए, जबकि 40 वर्षीय हरीश सिंह लापता हो गया। पुलिस और NDRF की टीम ने दोनों घायल शिष्यों को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया था। इसके बाद से हरीश सिंह की तलाश जारी है।
20 साल पहले गंगा की रेती पर बनवाया था आश्रम
संत बजरंग दास करीब 5 दशक से साधना कर रहे हैं। करीब 20 साल पहले प्रयागराज के झूंसी क्षेत्र में बदरा सनौटी गांव के सामने गंगा की रेती पर आश्रम बनवाया था। गंगा का जलस्तर बढ़ने और जमीन का कटान होने से आश्रम की नींव कमजोर हो गई थी। खतरे को देखते हुए बजरंगदास आश्रम छोड़कर मोटरबोट में रहने लगे थे।
यह तस्वीर पुरानी है। आश्रम को कटान से बचाने के लिए प्रशासन ने इंतजाम किए थे।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था आश्रम
करीब 70 वर्षीय संत बजरंग दास ‘मचान वाले बाबा’ के नाम से मशहूर हैं। गंगा नदी के बीच करीब 50 फीट ऊंचाई पर बना उनका आश्रम सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। संत इसी आश्रम में रहते थे। हालांकि, बीते दिनों गंगा में बाढ़ आने के बाद प्रशासन ने उन्हें वहां से दूसरी जगह शिफ्ट करा दिया था। इसके बावजूद आश्रम में सामान लेने पहुंचे उनके शिष्य हादसे का शिकार हो गए।
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