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लखनऊ- SGPGI में चेहरे की जटिल सर्जरी में बड़ी सफलता:पहली बार 3 आधुनिक तकनीकों और 3D इम्प्लांट से आंख की हड्डी की सफल सर्जरीलखनऊ3 मिनट पहले
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SGPGI में पहली बार 3 आधुनिक तकनीकों से आंख की हड्डी का सफल पुनर्निर्माण का दावा।
SGPGI के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर ने क्रैनियो-मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग ने उत्तर प्रदेश में पहली बार इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन, पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट (PSI) और ओ-आर्म इमे
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पुरानी चोट से मरीज को दिख रही थीं दो-दो तस्वीरें
मरीज के चेहरे पर पहले गंभीर चोट लगी थी, जिससे आंख की हड्डी में जटिल विकृति हो गई थी। इसके कारण उसे लगातार एक चीज दो-दो दिखाई देती थी (डिप्लोपिया), चेहरे में असमानता आ गई थी और सामान्य काम करने में भी परेशानी हो रही थी।
ऑपरेशन के दौरान मिली रियल-टाइम गाइडेंस
डॉक्टरों ने ऑपरेशन के दौरान इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन तकनीक का इस्तेमाल किया। इससे मरीज की पहले की सीटी स्कैन इमेज और ऑपरेशन के दौरान की वास्तविक स्थिति का रियल-टाइम मिलान किया गया। इससे इम्प्लांट को बिल्कुल सही स्थान पर लगाने में मदद मिली।
मरीज के लिए खास 3D इम्प्लांट तैयार किया
सर्जरी में मरीज की 3डी इमेजिंग के आधार पर विशेष रूप से तैयार पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट (PSI) का उपयोग किया गया। इससे आंख की हड्डी की संरचना को उसकी प्राकृतिक बनावट के अनुरूप दोबारा बनाया गया।
ओ-आर्म तकनीक से ऑपरेशन के दौरान ही हुई जांच
सर्जरी पूरी होने से पहले ओ-आर्म इमेजिंग की गई, जिससे ऑपरेशन थिएटर में ही इम्प्लांट की स्थिति और रिकंस्ट्रक्शन की सटीकता की पुष्टि हो गई। इससे भविष्य में दोबारा सर्जरी की जरूरत की संभावना भी कम हो गई।
उत्तर प्रदेश में पहली बार हुआ तीन तकनीकों का संयुक्त उपयोग
SGPGI के अनुसार, यह उत्तर प्रदेश का पहला मामला है जिसमें इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन, ओ-आर्म इमेजिंग और पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट का एक साथ इस्तेमाल कर सेकेंडरी ऑर्बिटल वॉल रिकंस्ट्रक्शन किया गया है। यह उपलब्धि चेहरे की गंभीर चोटों के इलाज में नया मानक स्थापित करेगी।
अब प्रदेश में ही मिलेगा अत्याधुनिक इलाज
संस्थान का कहना है कि अब चेहरे की गंभीर चोट, आंख की हड्डी की विकृति और चोट के बाद दोहरा दिखाई देने जैसी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को अत्याधुनिक पुनर्निर्माण उपचार के लिए दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत नहीं होगी।
निदेशक ने टीम को दी बधाई
SGPGI के निदेशक पद्मश्री प्रो.आरके धीमन ने इस उपलब्धि पर पूरी सर्जिकल टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह संस्थान की नवाचार, सटीकता और बेहतर मरीज देखभाल के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग से भविष्य में भी मरीजों को विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
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