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क्या अंदरूनी राजनीति का शिकार हो रही बसपा?:गोरखपुर में 7 महीने में 5 जिलाध्यक्ष बदल दिए; पिछले वाले 13 दिन में हटेगोरखपुर9 मिनट पहले
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किसी भी राजनीतिक दल में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति काफी सोच-समझकर होती है। लेकिन गोरखपुर जैसे जिले में बसपा ने कुछ ऐसा किया है कि इसका जवाब उसके किसी पदाधिकारी के पास नहीं है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में गोरखपुर ऐसा जिला रहा है, जहां पार्टी ने काफी बेहतर प्र
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अब यहां जिलाध्यक्ष की तलाश ही पूरी नहीं हो पा रही है। पिछले 7 महीने में पार्टी ने यहां 5 जिलाध्यक्ष बदल दिए हैं। पिछले वाले जिलाध्यक्ष केवल 13 दिनों में हटा दिए गए। बार-बार हो रहे इस परिवर्तन को अंदरूनी राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 4 अगस्त को जिलाध्यक्ष बनाए गए ऋषि कपूर को हटाकर पार्टी ने 17 अगस्त को जयकार प्रसाद को नया जिलाध्यक्ष बनाया है। आए दिन हो रहा यह परिवर्तन अब बसपा के पदाधिकारियों को भी नहीं सुहा रहा है, कार्यकर्ता तो पहले से कन्फ्यूज हैं। जब तक कार्यकर्ता अपने जिलाध्यक्ष का नाम याद करते हैं, तब तक पार्टी हाईकमान नया लेकर आ जाता है। जिलाध्यक्ष बेहतर करने के दावे करते हैं लेकिन जब अगले दिन सोकर उठते हैं तो कुर्सी बदल गई होती है।
मुख्य मंडल कोआर्डिनेटर के बदलने से बदले हालात
बसपा सूत्रों की मानें तो मुख्य मंडल कोआर्डिनेटर घनश्याम चंद्र खरवार का क्षेत्र बदलने के बाद ही जिले में बदलाव के कयास लगाए जा रहे थे। पिछले जिलाध्यक्ष ऋषि कपूर उनके करीबी माने जाते हैं। ऋषि कपूर को अब मंडल जोन प्रभारी बनाया गया है। बलिया के मदन राम गोरखपुर के नए मुख्य मंडल कोआर्डिनेटर बनाए गए हैं। उनके साथ आजमगढ़ की डा. इंदू चौधरी को भी जिम्मेदारी दी गई है।
पहले जानिए कब क्या हुआ
दो बार जिलाध्यक्ष रहे घनश्याम राही को 20 जनवरी 2026 को तीसरा बार बसपा की कमान सौंपी गई थी। लेकिन 7 दिन बाद ही उनकी जिम्मेदारी बदल दी गई। 27 जनवरी को जिले में पहली बार किसी निषाद नेता को जिलाध्यक्ष बनाया गया। शुरू से बसपा से जुड़े हरि प्रकाश निषाद को जब कमान मिली तो वह जिले से लेकर बूथ स्तर तक की कमेटियों को मजबूत करने में जुट गए। लेकिन 12 जून को दोपहर में उन्हें भी बदल दिया गया।
गोरखपुर में कभी बसपा का बेहतर प्रदर्शन होता था।
उन्हें मंडल स्तर पर ओबीसी भाईचारा समिति को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी दे दी गई। इसी दिन पूर्व जिलाध्यक्ष संतोष कुमार जिज्ञासु को एक बार फिर जिम्मेदारी दी गई है। दो महीने के भीतर ही संतोष कुमार जिज्ञासु को मुख्य मंडल कोआर्डिनेटर बना दिया गया और 4 अगस्त को पूर्व जिलाध्यक्ष ऋषि कपूर को दूसरी बार जिलाध्यक्ष की कमान सौंपी गई। लेकिन 17 अगस्त को उन्हें भी हटा दिया गया और जयकार प्रसाद को नई जिम्मेदारी दी गई। अब देखना है कि इनका कार्यकाल कितना लंबा होता है।
निष्कासन के बाद पार्टी ज्वाइन करते ही जिलाध्यक्ष बने थे जिज्ञासु संतोष कुमार जिज्ञासु 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के जिलाध्यक्ष थे। 2023 में नगर निकाय चुनावों के दौरान भी वही जिलाध्यक्ष थे। लेकिन घघसरा नगर पंचायत में पार्टी प्रत्याशी के विरोध में प्रचार करने के आरोप में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। 12 जून 2026 को उन्हें दोबारा पार्टी ज्वाइन कराया गया और उसी दिन उन्हें जिलाध्यक्ष बनाने की घोषणा भी हो गई थी।
जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
वरिष्ठ पत्रकार डीबीबी मिश्र बताते हैं कि किसी भी राजनीतिक दल में इतनी जल्दी-जल्दी जिलाध्यक्ष नहीं बदलते, जितनी जल्दीबाजी बसपा में मची है। पार्टी की सेकेंड लाइन को इसे देखना चाहिए। बार-बार कुछ चेहरों पर ही दांव लगाया जा रहा है।
जिलाध्यक्ष, जिले का सबसे बड़ा पद है और इसपर सोच-समझकर तैनाती की जानी चाहिए। 7 महीने में 5 बार जिलाध्यक्ष के पद पर बदलाव अपरिपक्व निर्णय की ओर इशारा करता है। हालांकि पार्टी में बदलाव आए दिन चलता रहा है। लेकिन चुनाव के नजदीक ऐसा करना उचित नहीं है। आमतौर पर दलित वर्ग से ही जिलाध्यक्ष बनता रहा है। संगठन को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि जिलाध्यक्ष को न्यूनतम 2 साल का कार्यकाल दिया जाना चाहिए।
जिलाध्यक्ष बनाए गए नेताओं के बारे में जानिए
घनश्याम राही घनश्याम राही एससी वर्ग से आते हैं। शुरू से बसपा से जुड़े हैं। उन्होंने जोनल कोआर्डिनेटर की भूमिका भी निभायी है। युवावस्था में ही पहली बार जिलाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी मिली। वह पिपराइच नगर पंचायत से सभासद भी रह चुके हैं। पहली बार 5 साल के लिए जिलाध्यक्ष बने। दूसरी बार पार्टी ने 6 महीने के लिए जिलाध्यक्ष बनाया तो तीसरी बार 7 दिन के लिए जिलाध्यक्ष बने। वह पूरी तरह राजनीति में सक्रिय हैं। वर्तमान में मंडल प्रभारी के रूप में गोरखपुर जिले में काम देखते हैं।
हरि प्रकाश निषाद हरि प्रकाश निषाद पिपराइच विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले हैं। शुरू से बसपा से जुड़े हैं। छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे। पिपराइच क्षेत्र से ही जिला पंचायत सदस्य रहे। उसके बाद बसपा में जोनल कोआर्डिनेटर, चीफ जोनल कोआर्डिनेटर, मुख्य मंडल प्रभारी के रूप में सेवा दे चुके हैं। वह पहले निषाद जिलाध्यक्ष रहे हैं। वर्तमान में पिछड़ा वर्ग भाई चारा समिति की जिम्मेदारी देख रहे हैं। हरि प्रकाश भी मूल रूप से राजनीति करते हैं।
गोरखपुर की जिम्मेदारी देख रहे मुख्य मंडल प्रभारी की घनश्याम चंद खरवार की जिम्मेदारी भी बदल गई है।
संतोष कुमार जिज्ञासु
संतोष कुमार जिज्ञासु सहजनवा क्षेत्र के घघसरा नगर पंचायत के निवासी हैं। वह अभी अविवाहित हैं। 2023 में उन्होंने अपनी बहन को सभासद का चुनाव भी जिताया है। इसी चुनाव में अध्यक्ष पद पर बसपा के प्रत्याशी के विरोध में प्रचार करने का आरोप था। प्रत्याशी ने ही इसकी शिकायत की थी, जिसके बाद पार्टी से उन्हें बाहर कर दिया गया था। 12 जून 2026 को दोबारा उनकी वापसी हुई और उसी दिन जिलाध्यक्ष बना दिया गया था।
ऋषि कपूर
ऋषि कपूर मूल रूप से गोरखपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत की थी। उसके बाद बसपा में शामिल हो गए। बसपा में लगातार बने हुए हैं और 2023 में उन्हें जिलाध्यक्ष बनाया गया। 2024 का लोकसभा चुनाव उनकी ही देखरेख में हुआ। अब उन्हें दूसरी बार जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी 4 अगस्त को दी गई थी लेकिन 13 दिन बाद उनका दायित्व बदल दिया गया।
बार-बार जिलाध्यक्ष बदलने से बसपा कार्यकर्ताओं में भी निराशा है।
जयकार प्रसाद जयकार प्रसाद को नया जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इससे पहले वह बांसगांव विधानसभा के अध्यक्ष थे। 39 वर्षीय जयकार के राजनीतिक जीवन की शुरूआत बूथ अध्यक्ष के रूप में हुई थी। वह सेक्टर प्रभारी, विधानसभा प्रभारी, विधानसभा महामंत्री, जिला प्रभारी के पदों पर भी काम कर चुके हैं। मूल रूप से बांसगांव ब्लाक के मड़ई टोला के रहने वाले जयकार प्रसाद 2007 से बसपा में हैं। उनका कहना है कि पार्टी को एक बार फिर सत्ता में लाने के लिए जीतोड़ मेहनत करेंगे।
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