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20 मामलों में दो जमानतदार स्वीकार करने की मांग खारिज:अदालत में अर्जी दिए बगैर हाईकोर्ट में आने पर हस्तक्षेप से इंकारप्रयागराज36 मिनट पहले
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजमगढ़ जिले के विभिन्न थानों में दर्ज 20 आपराधिक मामलों में विचारण अदालत को दो जमानतदार और व्यक्तिगत बॉन्ड स्वीकार करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकलपीठ ने मोहम्मद
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याचिकाकर्ता मोहम्मद कलीम खान को आजमगढ़ जिले के जयनपुर, गंभीरपुर, जहानागंज, कप्तानगंज, अतरौलिया, अहरौला, महमूरगंज, सराय मीर, टेहबरपुर, खंधरापुर, देवगांव, फूलपुर और रानी की सराय थानों में दर्ज कुल 20 मामलों में पहले ही जमानत मिल चुकी थी। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
20 मामलों के दो जमानत कैसे
याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि निचली अदालत को निर्देश दिया जाए कि वह सभी 20 मामलों में दो ही जमानतदार और व्यक्तिगत बॉन्ड स्वीकार करे, ताकि अलग-अलग मामलों के लिए अलग-अलग जमानतदार पेश न करने पड़ें।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता से स्पष्ट पूछा कि क्या याचिकाकर्ता ने कभी इन मामलों में जमानत बॉन्ड दाखिल करने का प्रयास किया था, और क्या अधीनस्थअदालत ने अलग-अलग मामलों के लिए अलग जमानतदार मांगने पर इन्कार किया था। इस पर अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता ने वास्तव में किसी भी मामले में जमानत बॉन्ड दाखिल करने का प्रयास ही नहीं किया, और अधीनस्थ अदालत की ओर से भी कोई स्पष्ट इन्कार रिकॉर्ड पर नहीं है।
इस पर कोर्ट ने पाया कि चूंकि याचिकाकर्ता ने कभी जमानत बॉन्ड दाखिल करने का प्रयास ही नहीं किया, इसलिए उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और मामले में कार्रवाई का कोई आधार नहीं बनता।
कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी
कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को छूट होगी कि वह सुप्रीम कोर्ट के हनी निशाद उर्फ मोहम्मद इमरान उर्फ विक्की बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले (29 अक्टूबर 2018 को निर्णीत विशेष अनुमति याचिका में दिए गए फैसले के आलोक में सभी 20 मामलों में दो जमानतदार और व्यक्तिगत बॉन्ड स्वीकार करने के लिए नए सिरे से आवेदन दाखिल करे। जिस पर अदालत निर्णय लेगी।
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