- Hindi News
- Local
- Uttar pradesh
- Banda
- Banda Medical College Negligence Controversy | Child Leg Amputation Case
बांदा में 5 साल की बच्ची का पैर काटना पड़ा:पिता ने मेडिकल कॉलेज पर लगाए लापरवाही का आरोपशिवम तिवारी | बांदाकुछ ही क्षण पहले
- कॉपी लिंक
पैर में दर्द और ठंडापन की शिकायत के बाद भी नहीं मिला इलाज, बांदा में बच्ची का पैर काटना पड़ा।
बांदा में पांच साल की एक बच्ची छत से गिर गई, जिससे उसकी जांघ की हड्डी टूट गई। उसे रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान बच्ची के पैर में खून का बहाव रुक गया और पैर काला पड़ने लगा, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई।
परिजनों का आरोप है कि समय पर सही इलाज और डॉक्टर की निगरानी नहीं मिलने के कारण बच्ची के पैर में गैंग्रीन हो गया। लखनऊ में करीब 10 दिन तक इलाज की कोशिशों के बाद आखिरकार जनवरी 2026 में बच्ची का पैर काटना पड़ा।
बच्ची के पिता अनिल ने बताया कि 23 दिसंबर 2025 को उनकी पांच साल की बेटी मानवी खेलते हुए छत से गिर गई थी। शाम करीब चार बजे उसे रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। जांच में पता चला कि उसकी जांघ की हड्डी टूट गई थी।
पिता का कहना है कि डॉक्टरों ने शुरुआत में बताया था कि नस ब्लॉक नहीं है और न ही खून का थक्का जमा है। अगले दिन डॉक्टर विनीत सिंह ने बच्ची के पैर में थॉमस स्प्लिंट और पट्टी बांधने की सलाह दी। अनिल का आरोप है कि स्प्लिंट और पट्टी बांधने के बाद बच्ची लगातार दर्द से रोती रही।
24 से 26 दिसंबर के बीच उन्होंने कई बार पैर में दर्द, ठंडापन और काला पड़ने की शिकायत की। लेकिन उनकी बात पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। पिता का आरोप है कि बाद में जब पैर का रंग काला पड़ने लगा, तो उन्होंने डॉक्टर को बताया। उन्हें 29 दिसंबर को ऑपरेशन की तारीख दी गई।
पिता ने यह भी आरोप लगाया कि ऑपरेशन के लिए उनसे 35 हजार रुपये जमा कराए गए। जबकि मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन मुफ्त होने की बात कही जाती है। उनके अनुसार डॉक्टर के एक सहयोगी ने ऑपरेशन के लिए पैसे मांगे थे। हालांकि, पैसे लेने वाले व्यक्ति का नाम वह नहीं बता सके।
बांदा में परिजनों ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप।.दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔




