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वॉटर कूलर में कटिया मारकर होती थी सप्लाई:स्थानीय दुकानदारों ने विरोध किया, पार्षद ने दी थी FIR करने की धमकीवाराणसी40 मिनट पहले
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वाराणसी के चेतगंज स्थित कालीमहल तिराहे पर सरकारी वॉटर कूलर में करंट लगने से मंटू मोदनवाल की मौत के बाद बिजली सप्लाई व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
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आसपास के दुकानदारों का आरोप है कि वॉटर कूलर के लिए अलग से बिजली कनेक्शन नहीं लिया गया था, बल्कि कटिया मारकर बिजली की सप्लाई की जा रही थी। दुकानदारों के मुताबिक, बारिश और जलभराव के बाद कूलर में करंट उतर गया।
दुकानदारों ने कहा कि हमने वॉटर कूलर लगाने का विरोध किया था। तब पार्षद एफआईआर करने की धमकी दी थी। जिस इलाके में यह हादसा हुआ, वहां आसपास की गलियों में भी बिजली के तार जगह-जगह लटके हुए हैं।
बारिश के दौरान पानी भरने पर करंट का खतरा बना रहता है। हादसे वाली जगह के पास स्कूल भी है, जहां के बच्चे वॉटर कूलर से पानी लेने आते थे।
लोगों ने किया था वॉटर कूलर लगाने का विरोध
इसी मंदिर के पास लगा था वॉटर कूलर
स्थानीय दुकानदार सोनू यादव ने बताया कि वॉटर कूलर लगाए जाने के समय स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था। करीब दो महीने पहले स्थानीय सभासद अमरेश गुप्ता ने सरकारी वॉटर कूलर लगवाया था। जब हमने विरोध किया तो कहा गया कि अगर वॉटर कूलर लगाने से रोका गया तो उनके खिलाफ FIR दर्ज करा दी जाएगी।
सोनू यादव ने बताया कि कूलर कुछ समय पहले लगाया गया था और बाद में हादसे के बाद उसे रात में हटा दिया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि आसपास के स्कूलों के बच्चे भी वहां पानी पीने के लिए आते थे। कई बार एक साथ बड़ी संख्या में बच्चे वहां पहुंचते थे। दुकानदारों का कहना है कि यदि वहां बड़ा हादसा हो जाता तो कई बच्चे इसकी चपेट में आ सकते थे।
कटिया मारकर चलाया जा रहा था वॉटर कूलर
पास के दुकानदार नदीम ने बताया कि वॉटर कूलर में बिजली सप्लाई की व्यवस्था को लेकर लापरवाही बरती गई। उनके अनुसार, कूलर के लिए अलग से बिजली कनेक्शन नहीं लिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि पास से बिजली के तार में कटिया मारकर कूलर चलाया जा रहा था। कूलर में न तो मीटर था और न ही बिजली की सप्लाई के लिए अलग से सुरक्षित बोर्ड लगाया गया था।
नदीम ने बताया कि मशीन में लोहे का इस्तेमाल था और बारिश के दौरान पानी जमा होने के बाद उसमें करंट उतर गया। उनका कहना है कि यदि बिजली कनेक्शन और बोर्ड की उचित व्यवस्था की गई होती तो हादसा रोका जा सकता था।
करंट लगने के बाद ट्रैफिक और जलभराव में फंसा परिवार
मृतक की बहन ने बताया कि करंट लगने के बाद मंटू को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिवार निकला, लेकिन रास्ते में जलभराव और ट्रैफिक के कारण काफी समय लग गया।
उन्होंने बताया कि बीएचयू तक पहुंचने में करीब एक से डेढ़ घंटे लग गए। कई रास्तों पर पानी भरा हुआ था, जिससे एंबुलेंस और वाहनों की आवाजाही प्रभावित थी।
परिवार के अनुसार, समय पर इलाज मिल पाता तो शायद स्थिति अलग होती, लेकिन इस बारे में वे निश्चित रूप से कुछ नहीं कह सकते। बाद में उन्हें दूसरे अस्पतालों में भी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह पहले ही गंभीर स्थिति में पहुंच चुके थे।
परिवार की मांग- मुआवजा नहीं, नौकरी दें
मृतक के बड़े भाई विनोद मदनवाल ने कहा कि मंटू के छोटे-छोटे बच्चे हैं और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके ऊपर थी। अब उनके न रहने के बाद परिवार के सामने बच्चों की परवरिश का संकट है।
परिवार की मांग है कि मृतक के बच्चों और परिवार के भविष्य को देखते हुए सरकार मुआवजे के साथ परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे।
दुकान के टीन से सटकर जा रही है 440 वोल्ट की तार
कालीमहल की गलियों में जगह-जगह लटक रहे बिजली के तार
हादसे के बाद इलाके की बिजली व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। कालीमहल तिराहे और आसपास की गलियों में कई जगह बिजली के तार नीचे की ओर लटके हुए दिखाई देते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान इलाके में पानी भर जाता है। ऐसे में लटकते और नीचे तक आए बिजली के तारों को लेकर लोगों में करंट फैलने का डर बना रहता है।
नगर निगम स्ट्रीट लाइट के स्वीच में भरा पानी
बारिश में जलभराव, पानी में करंट उतरने का खतरा
स्थानीय दुकानदारों के मुताबिक, कालीमहल तिराहे के आसपास बारिश होने पर पानी भर जाता है। ऐसे में बिजली के तार और अव्यवस्थित बिजली कनेक्शन हादसे की वजह बन सकते हैं।
लोगों का कहना है कि मंटू की मौत के बाद इलाके में बिजली के तारों और कनेक्शन की जांच कराई जानी चाहिए, ताकि दोबारा किसी को इस तरह करंट का शिकार न होना पड़े।
बगल में स्कूल, पानी लेने आते थे बच्चे
हादसे वाली जगह के पास स्कूल भी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, स्कूल के बच्चे वॉटर कूलर से पानी लेने के लिए वहां आते थे। कई बार एक साथ बड़ी संख्या में बच्चे पानी पीने पहुंचते थे।
स्कूल के बच्चे भी लेते थे वॉटर कूलर से पानी
दुकानदारों ने बताया कि अगर इस तरह की बिजली व्यवस्था के बीच कोई बड़ा हादसा हो जाता, तो कई बच्चे भी इसकी चपेट में आ सकते थे। अब मंटू की मौत के बाद इलाके में वॉटर कूलर और बिजली व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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