लड़ाई सिर्फ रिंग में नहीं: जर्मनी में धुर-दक्षिणपंथ के खिलाफ मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स

लड़ाई सिर्फ रिंग में नहीं: जर्मनी में धुर-दक्षिणपंथ के खिलाफ मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स

जर्मनी के धुर-दक्षिणपंथी समूह नए लोगों की भर्ती के लिए एमएमए को औजार बना रहे हैं.

लड़ाई सिर्फ रिंग में नहीं: जर्मनी में धुर-दक्षिणपंथ के खिलाफ मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जर्मनी के धुर-दक्षिणपंथी समूह नए लोगों की भर्ती के लिए एमएमए को औजार बना रहे हैं. ऐसे में केमनित्स शहर का एक जिम विविधता और सशक्तिकरण पर आधारित मार्शल आर्ट्स प्रोग्राम के जरिए इसका मुकाबला कर रहा है.जिम के स्पीकरों पर तेज हिप-हॉप संगीत गूंज रहा है, लेकिन दस्तानों के भिड़ने और खिलाड़ियों के मैट पर गिरने की आवाजें पूरे हॉल में ज्यादा जोरदार तरीके से सुनाई देती हैं. जैसे-जैसे शाम ढलती है और दर्जन भर प्रतिभागी पसीना बहाते हैं, खिड़कियों पर नमी जमने लगती है.

एथलेटिक सोनेनबर्ग में होने वाली मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) ट्रेनिंग दूसरे जिमों जैसी ही दिखती है. लेकिन केमनित्स स्पोर्ट्स क्लब के सदस्य इसे लोकतंत्र की लड़ाई का मैदान मानते हैं.

एथलेटिक सोनेनबर्ग में मार्शल आर्ट्स कोच स्टानी कहते हैं, “इसमें राजनीतिक पहलू साफ नजर आता है. सैक्सनी में कई मार्शल आर्ट्स जिम दक्षिणपंथी लोगों द्वारा चलाए जाते हैं और एमएमए की दुनिया में भी ऐसे कई समूह हैं.”

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एथलेटिक सोनेनबर्ग का फोकस अलग-अलग लोगों को साथ लाने और उन्हें मजबूत बनाने पर है. आयोजकों को उम्मीद है कि यह ऐसे समय में अलग पहचान बना पाएगा, जब धुर-दक्षिणपंथी समूह नए लोगों को जोड़ने के लिए खासकर एमएमए जैसे खेलों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

धुर-दक्षिणपंथ और एमएमए

मार्शल आर्ट्स का संबंध अक्सर फुटबॉल में हिंसा करने वाले समूहों से जोड़ा जाता है. इससे दक्षिणपंथी समूहों को बड़ी संख्या में युवा पुरुषों तक पहुंचने का मौका मिलता है. कई युवा शुरुआत में राजनीति में दिलचस्पी नहीं रखते, लेकिन खेल उन्हें जोड़ सकता है. एमएमए का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों या पुलिस के साथ हिंसक भिड़ंत की तैयारी के लिए भी किया जाता है.

केमनित्स सैक्सनी के सबसे बड़े शहरों में से एक है. पूर्वी जर्मनी का यह राज्य लंबे समय से धुर-दक्षिणपंथी राजनीति के बढ़ने का केंद्र रहा है. ‘ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी’ पार्टी राज्य की विधानसभा में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और फिलहाल चुनावों में व्यापक अंतर से आगे चल रही है. दक्षिणपंथी विचारधारा का विस्तार हो रहा है. यह युवाओं के बीच लोकप्रियता बटोर रही है. जर्मनी में एमएमए लंबे समय से ‘द थर्ड पाथ’ जैसे दक्षिणपंथी संगठनों के लिए नए लोगों को जोड़ने का अहम जरिया रहा है. दक्षिणपंथी आयोजनों पर रोक लगाने की कोशिशों के बावजूद इसका बढ़ना नहीं थमा.

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एथलेटिक सोनेनबर्ग की सदस्य लीना ने डीडब्ल्यू से कहा, “यहां सैक्सनी में धुर-दक्षिणपंथी ताकतें लगातार मजबूत हो रही हैं. उसने खासकर एमएमए जैसे खेलों में लोगों को आकर्षित करने का प्रयास किया. पिछले कुछ सालों से यह रुझान देखने को मिल रहा है.”

स्टानी भी बताते हैं, “यह एक खुले राज जैसा है .लोगों को पता है कि कौन से जिम का संबंध पूर्व नव-नाजियों से रहा है या किन जगहों पर नाजी विचारधारा से जुड़े लोग ट्रेनिंग करते हैं. ऐसी जगहों से दूर रहना है.”

सुरक्षित और समावेशी माहौल

दक्षिणपंथी झुकाव वाले जिमों से दूर रहने के बजाय एथलेटिक सोनेनबर्ग ने कुछ अलग करने का फैसला किया. लोग यहां अलग-अलग वजहों से आते हैं. इलाके का राजनीतिक माहौल भी बड़ी भूमिका निभाता है.

एमएमए क्लास में हिस्सा ले रही लिज डीडब्ल्यू से कहती हैं, “यहां केमनित्स में दक्षिणपंथी समूह और हिंसा मौजूद हैं. आप उन्हें क्लबों के बाहर या शॉपिंग सेंटरों के पास देखते हैं और यह ठीक महसूस नहीं होता.”

वह आगे कहती हैं, “एमएमए क्लास हमें ऐसी परिस्थितियों का सामना करना सिखाती है, या कम से कम जब ऐसी स्थिति आए तो थोड़ा मजबूत महसूस कराती है. ऐसा नहीं है कि मुझे लगता है मैं लड़कों के बड़े दल से लड़ सकती हूं, पर ट्रेनिंग होने से मानसिक रूप से फर्क पड़ता है.” लिज को एथलेटिक सोनेनबर्ग का खुला और सामुदायिक माहौल भी पसंद है. इस बड़े क्लब में फुटबॉल, वॉलीबॉल और साइक्लिंग टीमें भी हैं. क्लब की शुरुआत साल 2020 में हुई थी और 2024 में यहां मार्शल आर्ट्स की क्लास शुरू की गई.

क्लब में सभी को साथ लेकर चलने को प्राथमिकता दी जाती है. यहां मिक्स-जेंडर ट्रेनिंग के साथ-साथ महिलाओं, ट्रांस और नॉन-बाइनरी सदस्यों के लिए अलग सत्र भी होते हैं. पहली बार सीखने वालों से लेकर अनुभवी खिलाड़ियों तक, यहां सभी का स्वागत है.

लिज कहती हैं, “हम यहां युवाओं को अन्य विकल्प देना चाहते हैं. अगर कोई एमएमए सीखना चाहता है, तो उसके पास सिर्फ किसी दक्षिणपंथी जिम में जाने का ही रास्ता नहीं होना चाहिए. उसे ऐसे समावेशी जिम में भी आने का मौका मिलना चाहिए, जहां हर कोई एक साथ और अलग-अलग संस्कृतियों वाले माहौल में ट्रेनिंग कर सकें.”

समावेशिता का अर्थ यह है कि जो लोग राजनीति में रुचि नहीं रखते हैं वे भी इसमें भाग ले सकें. अपनी पहली एमएमए क्लास खत्म करने के बाद एक प्रतिभागी ने कहा, “मैं सिक्योरिटी में काम करता हूं और मेरे सहकर्मी हमेशा मजाक करते हैं कि मुझे जिम जाना चाहिए. अगर मैं सिर्फ एक ही क्लास करके छोड़ दूं, तो वे मुझे बहुत चिढ़ाएंगे. ऊपर से यह काफी मजेदार भी था, इसलिए मैं जरूर फिर वापस आऊंगा.”

आयोजक इस जिम को एक राजनीतिक पहल मानते हैं. उनका मानना है कि यहां आने वाले नए लोगों को खुली और सुरक्षित जगह मिलती है, जहां वे बिना किसी डर के आ सकते हैं और उन्हें कट्टर दक्षिणपंथी लोगों के बीच जाने की चिंता नहीं करनी पड़ती.

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