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गोंडा में घाघरा नदी का तेजी से घट रहा जलस्तर:तीन गांव अभी भी बाढ़ से प्रभावित, तटीय इलाकों में नदी की कटान तेजगोंडा4 मिनट पहले
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गोंडा में घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच सोमवार को इसमें कमी दर्ज की गई। जलस्तर घटने से तटीय इलाकों के ग्रामीणों को थोड़ी राहत मिली है, हालांकि नवाबगंज क्षेत्र के कई निचले इलाकों में अभी भी बाढ़ का पानी जमा है। सोमवार सुबह 10:30 बजे घाघरा नदी खतरे के निशान से 34 सेंटीमीटर नीचे बह रही थी। पिछले 24 घंटे में जलस्तर में 12 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, सोमवार सुबह 10:30 बजे नदी में करीब 2.82 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। जलस्तर कम होने के साथ तटीय इलाकों में घरों और मुख्य मार्गों से बाढ़ का पानी धीरे-धीरे निकल रहा है। हालांकि नवाबगंज क्षेत्र के दत्त नगर, बाणी माझा, ब्योन्दा माझा और साखीपुर जैसे निचले इलाके अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं।
पानी घटने तक गांवों में बनी रहेगी मुश्किल
निचले इलाकों के ग्रामीणों का कहना है कि कई गांवों में लंबे समय से पानी भरा हुआ है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर इन गांवों के चारों ओर पानी जमा हो जाता है, जिससे लोगों को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी होती है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं और पानी पूरी तरह कम होने के बाद ही घर लौटने की तैयारी में हैं। पशुओं के चारे की समस्या भी ग्रामीणों के सामने बनी हुई है।
जलस्तर घटा तो तेज हुई कटान
बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही तटीय इलाकों में घाघरा नदी की कटान तेज हो गई है। नवाबगंज और करनैलगंज तहसील क्षेत्र के कई इलाकों में सोमवार सुबह से नदी खेतों और जमीनों को काट रही है। कटान के कारण किसानों की जमीन और फसल नदी में समा रही है। इससे ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है।
कटान की वजह से अस्थायी फूस के मकानों के आसपास भी खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटान इसी तरह जारी रही तो कई घर भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
नुकसान का सर्वे करा रहा प्रशासन
जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ और कटान से हुए नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। प्रभावित किसानों की जमीन और फसल के नुकसान का आकलन किया जा रहा है। ग्रामीणों ने नदी में समा रही जमीन और फसल के बदले आर्थिक मुआवजा दिए जाने की मांग की है। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रख रही हैं।
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