- Hindi News
- Local
- Uttar pradesh
- Gorakhpur
- Gorakhpur MMMUT Space Technology Center | IN SPACe Lab Launch
MMMUT में बनेगा 6.5 करोड़ का अत्याधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी सेंटर:सैटेलाइट, रोवर और स्पेस टेस्टिंग की होगी सुविधागणेश पाण्डेय । गोरखपुर10 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी सेंटर बनाया जाएगा। जिसमें सैटेलाइट, रोवर और स्पेस टेस्टिंग की होगी सुविधा होगी।
.
विश्वविद्यालय का चयन भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) की अंतरिक्ष प्रयोगशाला योजना के तहत किया गया है।
इस योजना के अंतर्गत एमएमएमयूटी परिसर में ही अत्याधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी सेंटर स्थापित की जाएगी। यह पहल IN-SPACe के प्रमुख “क्लासरूम टू कॉसमॉस” कार्यक्रम के तहत शुरू की जा रही है। विश्वविद्यालय में बनने वाले इस अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र पर करीब 6.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
यह केंद्र पूर्वी उत्तर प्रदेश में अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक से जुड़े शोध, प्रयोग और नवाचार के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होगा। तीन प्रमुख सुविधाएं होंगी विकसित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र में तीन अत्याधुनिक और एकीकृत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें सैटेलाइट सिस्टम्स प्रयोगशाला, स्पेस रोबोटिक्स प्रयोगशाला और स्पेस एनवायरमेंट टेस्टिंग सुविधा शामिल हैं। इन प्रयोगशालाओं में विद्यार्थी और शोधार्थी केवल किताबों के माध्यम से अंतरिक्ष तकनीक नहीं पढ़ेंगे, बल्कि उन्हें उपग्रहों, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को तैयार करने और उनका परीक्षण करने का व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा। सैटेलाइट और क्यूबसैट पर होगा काम इस केंद्र में छोटे उपग्रहों और क्यूबसैट के विकास पर विशेष रूप से काम किया जाएगा। इसके साथ ही अंतरिक्षयान के एवियोनिक्स, उपग्रह संचार, ग्राउंड स्टेशन, उपग्रह की दिशा और स्थिति तय करने वाली प्रणालियों तथा अंतरिक्ष प्रणाली के सिमुलेशन से जुड़े कार्य भी होंगे। विद्यार्थियों को उपग्रह के डिजाइन से लेकर उसके विकास, एकीकरण और परीक्षण तक की पूरी प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलेगा। अंतरिक्ष में काम करने वाले रोबोट भी होंगे शोध का हिस्सा स्पेस रोबोटिक्स प्रयोगशाला में स्वायत्त रोबोटिक्स और ग्रहीय रोवर जैसी तकनीकों पर काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसे रोबोट और प्रणालियां विकसित करना है, जो अंतरिक्ष या दूसरे ग्रहों जैसे कठिन वातावरण में काम कर सकें। इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भविष्य की अंतरिक्ष तकनीक, रोबोटिक्स और ग्रहों की खोज से जुड़ी तकनीकों पर काम करने का अवसर मिलेगा। अंतरिक्ष जैसी परिस्थितियों में उपकरणों की होगी जांच केंद्र में विकसित होने वाली स्पेस एनवायरमेंट टेस्टिंग सुविधा भी इस परियोजना की महत्वपूर्ण कड़ी होगी। यहां अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले उपकरणों और उपग्रहों के अलग-अलग हिस्सों की जांच की जा सकेगी। इसके लिए थर्मल-वैक्यूम टेस्ट, कंपन परीक्षण, थर्मल साइक्लिंग और विद्युत-चुंबकीय हस्तक्षेप एवं विद्युत-चुंबकीय संगतता के पूर्व-अनुपालन परीक्षण जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन परीक्षणों के माध्यम से यह पता लगाया जा सकेगा कि कोई उपकरण प्रक्षेपण के दौरान होने वाले कंपन और अंतरिक्ष के अत्यधिक तापमान जैसी परिस्थितियों में ठीक तरह से काम कर पाएगा या नहीं। विद्यार्थियों से लेकर स्टार्टअप तक को मिलेगा फायदा अंतरिक्ष प्रयोगशाला का लाभ सिर्फ एमएमएमयूटी के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा। यहां विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स और क्षेत्रीय संस्थानों को अंतरिक्ष प्रणालियों पर काम करने का अवसर मिलेगा। यह केंद्र अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में नए विचारों और प्रयोगों को बढ़ावा देगा। युवा इंजीनियरों और शोधार्थियों को किसी अंतरिक्ष परियोजना के पूरे विकास चक्र को करीब से समझने का मौका मिलेगा। यानी किसी तकनीक की शुरुआती अवधारणा तैयार करने से लेकर उसका प्रोटोटाइप बनाने, एकीकरण, परीक्षण और अंतिम सत्यापन तक की प्रक्रिया को प्रयोगशाला में सीखा और समझा जा सकेगा। परियोजना की कमान डॉ. विजय कुमार वर्मा के हाथों में इस महत्वपूर्ण परियोजना का नेतृत्व एमएमएमयूटी के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विजय कुमार वर्मा प्रधान अन्वेषक (PI) के रूप में कर रहे हैं। डॉ. वर्मा को उपग्रह प्रणालियों, अंतरिक्षयान एवियोनिक्स, स्पेस रोबोटिक्स, डॉकिंग सिस्टम, चंद्र रोवर संचालन और अंतरिक्ष-ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक्स का व्यापक अनुभव है। वह पहले इसरो के यू. आर. राव सैटेलाइट सेंटर, बेंगलुरु में वैज्ञानिक/अभियंता-एसई के रूप में भी काम कर चुके हैं। परियोजना में सूचना प्रौद्योगिकी एवं कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ऑडिथन सिवरामन सह-प्रधान अन्वेषक (Co-PI) हैं। उन्हें रिमोट सेंसिंग, जीएनएसएस, इमेज प्रोसेसिंग, सैटेलाइट डेटा हैंडलिंग, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित संचार प्रणालियों का अनुभव है। उनकी विशेषज्ञता से उपग्रह पेलोड, नेविगेशन, ग्राउंड सिस्टम और सैटेलाइट डेटा से जुड़े विभिन्न कार्यों में मदद मिलेगी। पूर्वी यूपी के युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर एमएमएमयूटी में अंतरिक्ष प्रयोगशाला की स्थापना से पूर्वी उत्तर प्रदेश में अंतरिक्ष तकनीक से जुड़े अनुसंधान और प्रशिक्षण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में बहुविषयी शोध, उद्योग और विश्वविद्यालय के बीच सहयोग, स्टार्टअप विकास, तकनीकी कौशल और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा। विशेष रूप से इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए यह एक बड़ा अवसर होगा, क्योंकि उन्हें अत्याधुनिक अंतरिक्ष तकनीक पर सीधे काम करने और वास्तविक परियोजनाओं का अनुभव हासिल करने का मौका मिलेगा। गोरखपुर के लिए भी बड़ी उपलब्धि एमएमएमयूटी में अंतरिक्ष प्रयोगशाला की स्थापना को गोरखपुर के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे शहर की पहचान शिक्षा और तकनीकी संस्थानों के साथ-साथ अंतरिक्ष विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी मजबूत हो सकती है। विश्वविद्यालय ने इस उपलब्धि के लिए कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा के नेतृत्व, मार्गदर्शन और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़ी पहलों को लगातार दिए जा रहे सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया है। विश्वविद्यालय की ओर से इस परियोजना से जुड़े सभी संकाय सदस्यों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और परियोजना दल को बधाई दी गई है।
अधूरा नहीं! पढ़िए पूरा! पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर ऐप पर
एप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करें
पूरी खबर पढ़ें ऐप परप्रीमियम मेंबरशिप है तो लॉगिन करें
Source link




