2 करोड़ में बनी हनुमान अंश ने कमाए 42 करोड़:बंटवारा 1947-आवारापन 2 को हटाकर इसे स्क्रीन दी, 50 साल पहले जय संतोषी मां के साथ यही हुआ

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2 करोड़ में बनी हनुमान अंश ने कमाए 42 करोड़:बंटवारा 1947-आवारापन 2 को हटाकर इसे स्क्रीन दी, 50 साल पहले जय संतोषी मां के साथ यही हुआ2 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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फिल्म 7 अगस्त को रिलीज हुई है। - Dainik Bhaskarफिल्म 7 अगस्त को रिलीज हुई है।

इन दिनों तीन बड़ी फिल्में आवारापन 2, टॉक्सिक और बंटवारा 1947 सिनेमाघरों में हैं। तीनों ही फिल्मों में बड़ी स्टारकास्ट है, किसी में सनी देओल, किसी में केजीएफ स्टार यश और एक में इमरान हाशमी। बॉक्स ऑफिस क्लेश में आवारापन 2 और टॉक्सिक आगे निकल गईं और बंटवारा 1947 पीछे रह गई। इसी बीच एक लड़की का सिनेमाघरों में खड़े रोते हुए वीडियो वायरल हो गया। हर किसी ने माना की लड़की इन तीनों में से कोई एक फिल्म की टिकट न मिलने से भावुक हो गई। लेकिन पूछे जाने पर उसने कहा- मैं फिल्म हनुमान अंश देखने आई थी, लेकिन टिकट नहीं मिले।

हैरानी की बात है कि जहां टॉक्सिक जैसी 500-1000 करोड़ में बनी फिल्मों के सिनेमाघर खाली पड़े हैं, वहां महज 2 करोड़ में बनी हनुमान अंश हाउसफुल कैसे हुई।

इस फिल्म के हीरो का न तो इससे पहले किसी ने नाम सुना और न ही डायरेक्टर का। फिल्म का न तो भव्य प्रमोशन किया गया और न ही इसके फर्स्ट लुक, टीजर और ट्रेलर की कोई खबर थी। इन्हें फिल्म के ही सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट किया गया।

नीम करोली बाबा पर बनी ये फिल्म शुरुआती 2 हफ्तों तक कोई कमाई नहीं कर सकी, लेकिन चौथे हफ्ते कुछ ऐसा हुआ कि टॉक्सिक जैसी बड़ी फिल्म से क्लैश के बावजूद इसने 800 प्रतिशत मुनाफा कमाते हुए 42 करोड़ का कलेक्शन कर लिया।

बड़ी-बड़ी फिल्में हटाकर अब इसे स्क्रीन्स दी जा रही हैं। टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर भी इसकी बुकिंग ज्यादा हैं।

कम बजट की इस फिल्म की सक्सेस से कई बड़े सवाल खड़े होते हैं।

पहला सवाल- आखिर फिल्म ने बिना प्रमोशन ऐसी कमाई कैसे की।

दूसरा सवाल- फिल्म दर्शकों को इतना पसंद क्यों आ रही है।

तीसरा सवाल- फिल्म ने बड़ी फिल्मों को टक्कर कैसे दी।

जानिए सभी सवालों के जवाब और ट्रेड एक्सपर्ट से जानिए क्या है इस कामयाबी की वजह-

50 साल पहले जय संतोषी मां के साथ भी ऐसा ही हुआ था, शोले से थी टक्कर

आज से 50 साल पहले 15 अगस्त 1975 को अमिताभ बच्चन-धर्मेंद्र की फिल्म शोले रिलीज हुई। बड़े बजट, बड़ी स्टारकास्टिंग और बड़े डायरेक्टर रमेश सिप्पी की इस फिल्म पर हर किसी की नजरें थीं। कोई बड़ा फिल्ममेकर इस फिल्म के आसपास अपनी फिल्में रिलीज नहीं करना चाहता था। लेकिन इस फिल्म के साथ ही 25 लाख में बनी धार्मिक फिल्म जय संतोषी मां रिलीज की गई। फिल्म में कोई टॉप एक्टर नहीं था, इसके बावजूद फिल्म ऐसी चली कि इसने 5 करोड़ रुपए का ऐतिहासिक बॉक्स ऑफिस कलेक्शन किया।

जहां-जहां फिल्म ‘जय संतोषी मां’ रिलीज हुई, वहां-वहां ‘शोले’ की कमाई पर असर पड़ा। लोग चप्पल उतारकर सिनेमाघरों में जाते और स्क्रीन की आरती उतारते थे। जल्द ही ये हिंदी सिनेमा की सबसे कामयाब अध्यात्मिक फिल्मों में शामिल हो गई। इसके गाने, मैं तो आरती उतारूं रे संतोषी माता की और जय संतोषी मां आज भी सुने जाते हैं।

सवाल- कैसे छोटे बजट की फिल्म ने कमाए 42 करोड़ रुपए

ट्रेड एक्सपर्ट तरण आदर्श ने फिल्म की कमाई पर कहा- ‘अगर आप कलेक्शन देखेंगे तो पहले दिन से लेकर अब तक, खासकर थर्ड वीक और चौथे वीकेंड में वो ऐतिहासिक है। ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है।’

‘कंटेंट तो है ही, लेकिन ‘वर्ड ऑफ माउथ’ से फिल्म को फायदा मिला। अगर नेगेटिव पब्लिसिटी होती है, तो दूसरे-तीसरे दिन फिल्म पर असर दिखता है, लेकिन अगर रिव्यू पॉजिटिव हैं, तो फिल्म चल जाती है। यही हनुमान अंश के साथ हुआ। दूसरे वीक में ये फिल्म उतरने वाली थी। सिर्फ 40 लाख का कलेक्शन था। पहले हफ्ते भी कुछ खास कलेक्शन नहीं था।’

सवाल- बड़ी फिल्मों से क्लैश के बावजूद हनुमान अंश को स्क्रीन्स कैसे मिलीं?

7 अगस्त को जब फिल्म हनुमान अंश रिलीज हुई, तो इसे चुनिंदा स्क्रीन्स मिलीं। 14 अगस्त को आवारावन 2 और बंटवारा 1947 आने से फिल्म की स्क्रीन्स और कम हो गईं। फिल्म की कमाई भी खास नहीं हो रही थी, तो इसे सिनेमाघरों से हटाया जाने लगा। लेकिन फिल्म अब भी कई सिनेमाघरों में है। इसकी वजह क्या थी, सवाल पूछे जाने पर तरण आदर्श कहते हैं, ‘फिल्म के प्रोड्यूसर्स ने डिस्ट्रीब्यूटर्स से रिक्वेस्ट की कि कैसे भी हमारी फिल्म थर्ड वीक में चलाओ। डिस्ट्रीब्यूटर्स ने कहा कि टॉक्सिक आ रही है, फिल्म वैसे भी उतार दी जाएगी। लेकिन प्रोड्यूसर्स ने कहा- प्लीज इसे कैसे भी चलाइए।’

फिल्म के तीन बड़े चेहरों के बारे में-

डायरेक्टर- विशाल चतुर्वेदी

फिल्म हनुमान अंश को 42 साल के विशाल चतुर्वेदी ने बनाया है। ये उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म है। फिल्मों में करियर शुरू करने से पहले विशाल एक डॉक्टर थे। ये उनके निर्देशन की दूसरी फिल्म है, इससे पहले उन्होंने 2012 की वॉर्निंग डायरेक्ट की थी। वह टीवी सीरीज और फिल्मों के डायलॉग राइटर के तौर पर काम कर चुके हैं।

विशाल चतुर्वेदी।विशाल चतुर्वेदी।

एक्टर- शोभिनव सत्या

एक्टर शोभिनव सत्या ने हनुमान अंश में नीम करोली बाबा का किरदार निभाया है। उन्होंने FTII, पुणे से पढ़ाई की है। एक्टिंग के साथ वह असिस्टेंट डायरेक्टर, सेकंड यूनिट डायरेक्टर, स्क्रिप्ट और कंटिन्यूटी विभाग में काम कर चुके हैं। उन्होंने ‘महापौर’, ‘CID’, ‘रागिनी एमएमएस’ और ‘हैप्पीली एवर आफ्टर’ जैसे प्रोजेक्ट्स में काम किया है।

शोभिनव सत्या।शोभिनव सत्या।

एक्टर- चंदन के.आनंद

चंदन आनंद ने फिल्म में लीड रोल निभाया है। इससे पहले वो कई फिल्मों और टीवी शोज में साइड रोल कर चुके हैं। वह आलू चाट, पार्च्ड, लव आज कल, गुंजन सक्सेना, फाइटर, होमबाउंड जैसी फिल्मों के अलावा टीवी शो बैरिस्टर बाबू, ये प्यार न होगा कम, मीत जैसे दर्जनों शोज कर चुके हैं।

चंदन के. आनंद।चंदन के. आनंद।

फिल्म की कामयाबी में सोशल मीडिया का अहम रोल

फिल्म से जुड़े वीडियोज लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। फिल्म के कई सीन, नीम करोली बाबा के असल वीडियोज से हुबहू मेल खाते हैं, इसके वीडियोज लगातार सामने आ रहे हैं।

सिनेमाघरों से फैंस के वीडियो भी चर्चा में हैं, जिसमें वह भावुक होते और स्क्रीन के सामने हाथ जोड़े नजर आ रहे हैं। हाउसफुल शोज दिखाए जाने से भी दर्शकों के मन में फिल्म को लेकर उत्सुकता है।

फिल्म एक ऐसे सब्जेक्ट पर बनी, जिसमें लोगों की रुचि, लेकिन जानकारी सीमित

ये फिल्म नीम करोली बाबा की जिंदगी पर बनी है। उनके भक्त दुनियाभर में हैं। उनके कैंची धाम आश्रम में सालाना हजारों लोग पहुंचते हैं। उनकी जिंदगी पर अब तक कई बुक लिखी गई हैं और डॉक्यूमेंट्री बनी हैं, हालांकि ज्यादातर इंग्लिश में हैं, जिसे आम जनता कम ही जानती है।

फिल्म की सादगी और फैक्ट्स

फिल्म हनुमान अंश को बेहद सादगी से फैक्चुअल बनाया गया है। फिल्म को पसंद किए जाने का एक कारण ये भी है कि इसे कमर्शियली नहीं बनाया गया है। डायरेक्टर ने खुद एक इंटरव्यू में दावा किया है कि इस फिल्म को जानकारी मात्र के लिए बनाया गया है, न कि मुनाफे के लिए। एक वजह यह भी है कि फिल्म को भक्तों और दर्शकों का प्यार मिल रहा है।

फिल्म का धार्मिक जुड़ाव, एक्टर ने संत की तरह जिए कई महीने

जिस समय ये फिल्म बननी शुरू हुई थी, तब फिल्ममेकर्स प्रेमानंद महाराज के पास गए थे। उन्होंने प्रेमानंद महाराज से फिल्म पर सुझाव मांगा था। जिस पर उन्हें सलाह दी गई कि एक्टर्स को संतों की तरह जीना चाहिए। सावधानी से जीवन यापन करना चाहिए और शाकाहारी खाना चाहिए। फिल्म के लीड एक्टर्स ने इसका पालन किया।

नीम करोली बाबा के बारे में पढ़िए-

नीम करौली बाबा को उनके भक्त महाराज जी कहते थे। उनका असली नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा बताया जाता है। वे भगवान हनुमान के भक्त थे।

नीम करौली बाबा से जुड़े चर्चित किस्से-

ट्रेन से उतरे तो आगे नहीं बढ़ी ट्रेनः कहा जाता है कि वे एक बार ट्रेन में बिना टिकट बैठ गए। उन्हें नीचे उतार दिया गया तो ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। बाद में उन्हें वापस बुलाया गया और ट्रेन चल पड़ी। यह एक भक्तिपरक कथा है, जिसका स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण स्पष्ट नहीं है।

नीम करोली बाबा से मिलने पहुंचे थे स्टीव जॉब्सः 1974 में 19 साल के स्टीव जॉब्स भारत आए थे। उनका मकसद पर्यटन नहीं बल्कि आध्यात्मिक खोज था। वे अपने दोस्त डैन कोटके के साथ भारत आए और नीम करौली बाबा से मिलने के लिए कैंची धाम पहुंचे। लेकिन यहां उन्हें पता चला कि बाबा का सितंबर 1973 में निधन हो चुका था।

जॉब्स फिर भी भारत में करीब सात महीने रहे। उन्होंने भारत की आध्यात्मिक परंपराओं को करीब से समझने की कोशिश की। बाद में उन्होंने इस यात्रा को अपने जीवन पर गहरा असर डालने वाला अनुभव माना।

मार्क जुकरबर्ग भी मिलने पहुंचे थेः 2015 में फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग भारत आए और कैंची धाम गए। उन्होंने बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया था कि जब फेसबुक मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तब स्टीव जॉब्स ने उन्हें भारत जाकर उस मंदिर/आश्रम को देखने की सलाह दी थी, जहां वे स्वयं कभी गए थे।

हॉलीवुड एक्ट्रेस थीं नीम करोली बाबा से प्रेरितः हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स ने भी नीम करौली बाबा से प्रभावित होने की बात कही है। उनके अनुसार, उन्होंने बाबा की एक तस्वीर देखी और उन्हें उनके प्रति एक गहरा आकर्षण महसूस हुआ।

अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्पर्ट ने लिखी बुकः अमेरिकी मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्पर्ट भारत आए और नीम करौली बाबा के शिष्य बने। बाबा ने उन्हें राम दास नाम दिया। इसके बाद राम दास अमेरिका लौटे और उन्होंने पश्चिमी दुनिया में बाबा की शिक्षाओं और भारतीय आध्यात्मिक विचारों को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। उनकी प्रसिद्ध किताब ‘बी हेयर नाऊ’ ने लाखों लोगों को ध्यान, योग और भारतीय आध्यात्मिक विचारों से परिचित कराया।

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