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बंदी के पोस्टमार्टम पैनल में जेल का डाॅक्टर शामिल:दो दिन बाद थी ड्यूटी, रोस्टर तोड़ा, जेलकर्मियों पर पीटने का लगा था आरोप,4 मिनट पहले
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हैलट अस्पताल में आसिफ की हुई थी मौत, सीने पर थे चोट के निशान
कानपुर जेल में बंदी की मौत के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। वाहन चोरी के मामले में जेल भेजे गए बंदी की इलाज के दौरान मौत के बाद उसका पोस्टमार्टम भी जेल के डॉक्टर ने ही कर दिया। जबकि बंदी के परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया था कि– जेल की
.मृतक मो. आसिफ (फाइल फोटो)
हैरान करने वाली बात तो यह है कि जिस डॉक्टर ने बंदी का पोस्टमार्टम किया, उसकी ड्यूटी तय रोस्टर के मुताबिक दो दिन बाद पोस्टमार्टम हाउस में निर्धारित थी। बंदी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सेप्टिसीमिया से मौत की पुष्टि की गई थी। पोस्टमार्टम पैनल में जेल के ही डॉक्टर को शामिल किए जाने पर अब सवाल उठ रहे हैं।
29 अगस्त को कानपुर जेल ट्रांसफर किया गया था
चौबेपुर पुलिस ने दरियागंज गांव के आसिफ को वाहन चोरी के मामले में बीते 5 अगस्त को कानपुर देहात की माती जेल भेजा था। वहां से उसे 29 अगस्त को कानपुर जेल ट्रांसफर किया गया था। परिजनों का आरोप था कि जेल की रसोई में आटा गूंथने से मना करने पर कर्मचारियों ने आसिफ के साथ मारपीट की थी। जिससे उसकी हालत बिगड़ गई थी।
20 सितंबर को आसिफ के सीने में तेज दर्द होने पर जेल प्रशासन ने उसे पहले उर्सला अस्पताल में भर्ती कराया था। दो दिन बाद अस्पताल प्रशासन ने आसिफ के फेफड़ों में पानी भरने की बात कहते हुए गंभीर हालत में उसे हैलट रेफर कर दिया गया था। करीब एक माह इलाज के बाद 23 अक्टूबर को आसिफ की मौत हो गई।
पहले से पैनल में मौजूद डॉक्टर की बदली ड्यूटी
इसके बाद 23 अक्टूबर को पैनल और वीडियोग्राफी की निगरानी में शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम पैनल में पहले तो डा.जेपी गुप्ता और डा. विवेक विलियम दुबे की ड्यूटी लगी थी, लेकिन उनकी आनन–फानन में डा. जेपी गुप्ता की ड्यूटी बिल्हौर कैंप में लगा दी गई। जिसके बाद पैनल में जेल के डाक्टर समीर नारायण को भी शामिल किया गया था।
25 अक्टूबर को थी ड्यूटी, 23 को ही पहुंचे
जबकि परिजनों ने जेल के कर्मचारियों पर ही बेटे को पीटने का आरोप लगाया था। ऐसे में पोस्टमार्टम प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने पर सवाल उठने लगे। जेल मैनुअल के अनुसार जेल के डा.समीर नारायण की ड्यूटी नहीं लगनी चाहिए थी।
जांच में सामने आया कि सीएमओ कार्यालय से जारी होने वाले रोस्टर के मुताबिक डा.समीर की ड्यूटी 25 अक्टूबर को थी, लेकिन उन्होंने निर्धारित रोस्टर के विपरीत दो दिन पहले ही आकर आसिफ का पोस्टमार्टम कर दिया।
डॉ. समीर नारायण ने ही आसिफ को किया था रेफर
जेल सूत्रों के मुताबिक जिस दिन आसिफ की तबीयत बिगड़ी थी, उस दिन आनन–फानन में डॉक्टर समीर नारायण को जांच के लिए बुलाया गया था। डॉ समीर ने आसिफ की जांच की थी और उन्हीं की सलाह पर आसिफ को उर्सला रेफर किया गया था।
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