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- Kanpur Sikh History Exhibition: 1984 Pain Vs. Post 2014 Respect
कानपुर में सिखों के दर्द और सम्मान की प्रदर्शनी:‘1984 का जख्म बनाम 2014 के बाद का सम्मान’; वीर बाल दिवस की उठी थी मांगदीपेंद्र द्विवेदी | कानपुरकुछ ही क्षण पहले
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कानपुर के रतनलाल नगर स्थित आर.आर. ग्रैंड होटल में सिख वेलफेयर सोसाइटी की ओर से एक विशेष तुलनात्मक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में एक ओर वर्ष 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार और उसके बाद हुए सिख विरोधी दंगों से जुड़े दस्तावेज, तस्वीरें और तथ्य प्रदर्शित किए गए, वहीं दूसरी ओर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सिख समाज के सम्मान और विरासत से जुड़े फैसलों को भी दर्शाया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने वर्चुअल माध्यम से किया।
किताबों और तस्वीरों के जरिए सामने रखा गया 1984 का इतिहास
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आर.पी. सिंह ने पूर्व रॉ अधिकारी जी.बी.एस. सिद्धू की पुस्तक “द खालिस्तान कॉन्सपिरेसी” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सिख समाज ने देश और धर्म की रक्षा के लिए हमेशा महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन तत्कालीन परिस्थितियों और नीतियों के कारण पूरे समुदाय को कठिन दौर से गुजरना पड़ा। प्रदर्शनी में उस समय के घटनाक्रम से जुड़े दस्तावेज, दुर्लभ तस्वीरें और ऐतिहासिक तथ्य प्रदर्शित किए गए, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
‘वीर बाल दिवस’ से करतारपुर कॉरिडोर तक के फैसले भी बने आकर्षण
सिख वेलफेयर सोसाइटी के प्रदेश अध्यक्ष गुरविंदर सिंह छाबड़ा ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य इतिहास के विभिन्न पहलुओं को समाज के सामने रखना है। उन्होंने कहा कि कानपुर से उठी साहिबजादों की शहादत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने की मांग को स्वीकार करते हुए 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ घोषित किया गया। इसके अलावा करतारपुर कॉरिडोर की शुरुआत, अफगानिस्तान से श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों को भारत लाने की पहल तथा गुरु गोबिंद सिंह, गुरु नानक देव और गुरु तेग बहादुर के प्रकाश पर्वों को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने जैसे निर्णयों को भी प्रदर्शनी में स्थान दिया गया।
यूपी के सभी जिलों और फिर देशभर में ले जाई जाएगी प्रदर्शनी
आयोजकों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के सिख प्रतिनिधि इस कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़े। संस्था का लक्ष्य इस प्रदर्शनी को कानपुर तक सीमित न रखकर प्रदेश के सभी जिलों और बाद में देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाना है, ताकि नई पीढ़ी इतिहास और सिख समाज के योगदान से परिचित हो सके। कार्यक्रम में विधायक सुरेंद्र मैथानी, मनप्रीत सिंह भट्टी, रिंपी बिंद्रा, गगनदीप सिंह, जसमीत सिंह सहित सिख समाज के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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