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पीएचडी प्रवेश अब साल में दो बार:पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने शोधार्थियों के लिए नई व्यवस्था लागू कीअंकित श्रीवास्तव | जौनपुर1 मिनट पहले
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वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब शैक्षणिक वर्ष में दो बार पीएचडी में प्रवेश दिया जाएगा, जिससे शोधार्थियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
पीएचडी प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया पहले की तरह ही रहेगी। हालांकि, यूजीसी नेट, जेआरएफ और अन्य निर्धारित श्रेणियों के पात्र अभ्यर्थियों को प्रवेश परीक्षा से छूट मिलेगी।
केवल स्नातकोत्तर उपाधि के आधार पर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य होगा। नई प्रणाली के तहत, विभागीय शोध समिति (डीआरसी) की बैठकें वर्ष में दो बार आयोजित की जाएंगी।
प्रवेश प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में नेट, जेआरएफ और अन्य पात्र अभ्यर्थियों की डीआरसी आयोजित कर उन्हें प्रवेश दिया जाएगा। दूसरे चरण में प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों की डीआरसी होगी। इसके बाद आरडीसी, शुल्क जमा करने और शोध निर्देशक आवंटन की प्रक्रिया संपन्न की जाएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस पहल से शोध में नामांकन बढ़ेगा और विभागों में रिक्त शोध सीटों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। यह योग्य अभ्यर्थियों को समय पर शोधकार्य शुरू करने का अवसर भी प्रदान करेगा।
कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने बताया, “विश्वविद्यालय का उद्देश्य शोध गतिविधियों को गति देना और पात्र अभ्यर्थियों को समयबद्ध अवसर उपलब्ध कराना है। इसी लक्ष्य के साथ वर्ष में दो बार पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया संचालित करने की तैयारी की जा रही है, ताकि शोधार्थियों को अधिक सुविधा मिल सके।”
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