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संभल कोर्ट में हिंसा के मुकदमों की सुनवाई पूरी:30 जुलाई को विवेचक के बयान होंगे, जल्दी गावाह भी किए जाएंगे तलबसनी गुप्ता, संभल2 मिनट पहले
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संभल हिंसा मामले में जिला न्यायालय में सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब जल्द ही गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इस मामले में मुख्य आरोपी मुल्ला अफरोज, वारिस और गुलाम जेल में बंद हैं। इन तीनों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की गई है। आरोप है कि ये भारत के सबसे बड़े वाहन ऑटो लिफ्टर फरार गैंगस्टर शारिक साठा के गुर्गे हैं। इन पर सर्वे के दौरान भीड़ को हथियार मुहैया कराने और चार युवकों की मौत का आरोप है।
जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने मंगलवार को बताया कि जनपद न्यायालय में सुनवाई पूरी हो चुकी है। गवाहों को जल्द से जल्द न्यायालय में परीक्षित किया जाएगा। न्यायालय भी इस मामले में गवाहों के बयान शीघ्र पूरे कराने का पक्षधर है। मुकदमा अपराध संख्या 338 और 306 में मुल्ला अफरोज, गुलाम और वारिस तीनों अभियुक्त हैं। जबकि, मुकदमा अपराध संख्या 339 और 340 में गुलाम और मुल्ला अफरोज आरोपी हैं।
इन दोनों पत्रावलियों में गवाही लगभग पूरी हो चुकी है। विवेचक की गवाही न्यायालय में अंकित की जा रही है, जिसके लिए 30 जुलाई की तारीख तय की गई है। मुकदमा अपराध संख्या 340 में विवेचक के बयान दर्ज किए जाएंगे।
राहुल दीक्षित ने यह भी बताया कि जामा मस्जिद के सदर जफर अली पर सुनियोजित तरीके से दंगा भड़काने का आरोप है। उनके खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया जा चुका है। संभल के सांसद जियाउर्रहमान बर्क भी इसी आरोप में आरोपी हैं। हालांकि, उच्च न्यायालय ने फिलहाल इन दोनों के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा रखी है।
राहुल दीक्षित ने स्पष्ट किया कि यदि जफर अली किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल होकर राजनीतिक लाभ लेना चाहें और कार्रवाई रुकवाने का प्रयास करें, तो ऐसा संभव नहीं होगा। जिला न्यायालय में पत्रावलियां पूर्ण होने के बाद, अभियोजन पक्ष उच्च न्यायालय में पैरवी करेगा। आरोप पत्र के अनुसार साक्ष्य पूर्ण कराने का प्रयास किया जाएगा। मामले में सुनवाई तेजी से चल रही है और इसे और गति दी जाएगी, ताकि पत्रावलियां जल्द से जल्द पूर्ण हो सकें।
24 नवंबर 2024 को संभल में हिंसा भड़क गई थी।
ये है पूरा मामला
आपको बता दें कि 19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष की ओर से संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट चंदौसी में पेश किया गया। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन शाम को पहले चरण का सर्वे हुआ और दूसरे चरण का सर्वे 24 नवंबर 2024 को किया गया, इस दौरान हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। सर्वे को बाधित करते हुए हिंसा भड़क गई, पुलिस पर पथराव-फायरिंग की गई, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, चर्चित ASP अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर सहित 29 पुलिसकर्मी घायल हुए।
संभल कोतवाली एवं थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क एवं सपा विधायक इक़बाल महमूद के बेटे सुहैल इक़बाल सहित कई लोगों को नामजद करते 2750 से अधिक लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया, हालांकि चार्जशीट में साक्ष्यों के आधार पर विधायक पुत्र का नाम निकाल दिया गया।
तस्वीर में सबसे पहले नजर आ रहा आरोपी वारिस है, उसके बगल में मुल्ला अफरोज और गुलाम नजर आ रहा है। तीनों मुरादाबाद जेल में बंद हैं।
हिंसा के बाद 158 को भेजा गया था जेल
जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट सहित 158 अभियुक्तों को जेल भेजा गया, जिसमें 3 महिलाएं और संभल हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता फरार गैंगस्टर शारिक साठा के तीन गुर्गे मुल्ला अफरोज, वारिस एवं गुलाम भी शामिल है। मुल्ला अफरोज पर अक्टूबर 2025 में रासुका लगी, इसके बाद अब वारिस और गुलाम पर भी रासुका की कार्रवाई की गई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जफर अली को बीती 1 अगस्त 2025 को मुरादाबाद जेल से रिहा कर दिया गया था, 24 मार्च को उन्हें जेल भेजा गया था और 131 दिन के बाद जेल से बाहर आए थे। आपको बता दे कि काफी अभियुक्त की जमानत इलाहाबाद हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट से हो चुकी है।
तस्वीर में सबसे पहले सिर में गमछा बांधे नजर आ रहा आरोपी शारिक साटा है, जो अभी ये फरार है। उसके बगल में मोहम्मद अयान और मोहम्मद बिलाल है, दोनों की हिंसा में जान चली गई थी।.दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔




