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भास्कर एनालिसिसयूपी चुनाव से पहले UGC विवाद सुलझाएगी भाजपा:संघ ने सर्कुलर को बताया ‘असंतुलित’; विनोद तावड़े ने बदलाव के दिए संकेतलखनऊ17 मिनट पहलेलेखक: सचिन मुद्गल
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यूपी विधानसभा चुनाव में UGC चुनावी मुद्दा बन सकता है। इसके संकेत विधान परिषद (MLC) की स्नातक सीटों के मतपत्रों से मिले। पोस्टल बैलेट पर भाजपा उम्मीदवारों को वोट देने के बजाय उनके नाम के आगे ‘UGC Roll Back’ लिखकर बैलेट बॉक्स में डाल दिए गए।
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लिखा- UGC के नियम वापस लो, फिर बात करो।
ऐसे हजारों बैलेट पेपर चुनाव आयोग ने खारिज माने। लेकिन, पढ़े-लिखे युवाओं के इन तेवरों ने भाजपा को सख्त संदेश दिया कि विधानसभा चुनाव में अगड़े वर्ग के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है।
इसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के शीर्ष नेता हरकत में आ गए। पहले इंदौर में संघ की कार्यकारिणी बैठक में इस सर्कुलर को ‘असंतुलित’ बता दिया गया। ‘सामाजिक एकता’ के लिए खतरा मानते हुए सख्त कदम उठाने के लिए कहा गया।
वहीं, भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने चुनाव से पहले इस विवाद का स्थायी समाधान निकालने के लिए कहा। सवाल उठता है कि यूपी समेत 5 राज्यों के चुनाव से पहले भाजपा UGC के ‘इक्विटी रेगुलेशन 2026’ का समाधान कैसे निकालेगी? पढ़िए रिपोर्ट…
ये आंकड़े MLC की पांचों स्नातक सीटों के हैं।
भाजपा के सोर्स कहते हैं कि केंद्र सरकार ने काम भी शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि सरकार इस विवाद को 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सुलझाने के लिए 4 स्टेप पर विचार कर सकती है।
- पहला – सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी के जरिए पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू कराया जाए। जिससे अगड़ा, पिछड़ा और दलित वर्ग तीनों के हित संतुलित रह सकें।
- दूसरा – केंद्र सरकार अपने स्तर पर UGC के इस विवादित सर्कुलर को वापस लेने का आदेश जारी कर दे।
- तीसरा – अदालत में सुनवाई के दौरान सरकार नए नियमों को व्यावहारिक रूप से कठिन मानकर निरस्त होने दे।
- चौथा – UGC एक नया सर्कुलर जारी करे, जिसमें विवादित और असंतुलित प्रावधानों को पूरी तरह हटा दिया जाए।
भाजपा विधायक ने कहा- UGC का विरोध करना सवर्णों का हक
UGC पर हालिया बवाल 1 नवंबर को दिखा, जब प्रयागराज के परेड ग्राउंड में सवर्ण-ब्राह्मण सम्मेलन में UGC के मुद्दे को लेकर काफी हंगामा हुआ। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य कार्यक्रम में पहुंचे।
मंच पर संबोधन के दौरान सवर्ण समाज के 2 युवाओं ने UGC नियमों के विरोध में आवाज उठाई। केशव से इस मुद्दे पर पार्टी का रुख साफ करने को कहा। डिप्टी सीएम ने दोनों युवाओं को समझा-बुझाकर शांत कराया और मंच से भाषण जारी रखा।
हालांकि, मामला यहीं शांत नहीं हुआ। कार्यक्रम में मौजूद भाजपा पार्षद विनय मिश्रा ने विरोध दर्ज करा रहे उन युवाओं के साथ कहासुनी की और उन्हें थप्पड़ मार दिया। इस घटना के बाद सम्मेलन में मौजूद लोगों और युवाओं के बीच भारी आक्रोश फैल गया।
अपनी ही पार्टी के पार्षद की इस हरकत और UGC के विरोध पर इलाहाबाद उत्तर सीट से भाजपा विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी ने प्रतिक्रिया दी।
हर्षवर्धन बाजपेयी ने अपनी ही पार्टी के पार्षद विनय मिश्रा के व्यवहार की आलोचना की।
‘छात्र संवाद’ करके भाजपा नाराजगी दूर कर रही
भाजपा ने अपनी युवा विंग भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा (भाजयुमो) को मैदान में उतार दिया है। भाजयुमो यूपी के 294 विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ‘छात्र संवाद’ कर रही है।
‘लोकतंत्र बनाम अराजकता’ पर चर्चा की जा रही है। आने वाले वक्त में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के बड़े चेहरे यूनिवर्सिटी और कॉलेज कैंपस में युवाओं से बात करने पहुंचेंगे। जिससे युवाओं के बीच पार्टी की पकड़ पहले जैसी मजबूत बनी रह सके।
संघ ने माना- UGC के नए नियम ‘एकता’ के लिए खतरा
इंदौर में 2 नवंबर से शुरू हुई संघ की तीन दिवसीय ‘अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल’ की बैठक में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से मिले फीडबैक पर पदाधिकारियों ने हैरानी जताई। फीडबैक से पता चला कि UGC नियमों से समाज का एक बड़ा हिस्सा नाराज है। MLC चुनाव के बाद विधानसभा चुनावों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
संघ ने अपनी बैठक में 3 बातों पर जोर दिया-
1. सरकार भविष्य में जो भी कदम उठाए, वह पूरी तरह से संतुलित और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने वाला हो। 2. UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है। इसलिए सरकार को कानूनी और सामाजिक दोनों पहलुओं को ध्यान में रखना होगा। 3. किसी भी नए नियम या सर्कुलर से समाज की एकजुटता और आपसी भाईचारा टूटने से बचाना होगा।
बैठक से 2 दिन पहले संघ ने एक प्रेस ब्रीफिंग की थी। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने UGC सर्कुलर असंतुलित बताया। उन्होंने कहा था-
“संघ ने इस विषय पर संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी थी। इसके बाद सरकार और यूजीसी ने इस पर संज्ञान लिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस नियमावली पर रोक लगा रखी है। आगे जो भी निर्णय हो, वह पूरी तरह संतुलित होना चाहिए। जिससे समाज मजबूत रहे।”
31 अक्टूबर को सुनील आंबेकर ने इंदौर में कहा था कि सामाजिक एकता किसी एक सर्कुलर की वजह से प्रभावित न हो।
तावड़े ने समाधान के संकेत दिए
30-31 अक्टूबर को लखनऊ में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हुई थी। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने कहा था- चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही UGC को लेकर उपजे विवाद का पूरी तरह से निपटारा कर दिया जाएगा।
UGC मुद्दे को लेकर सवर्ण मतदाताओं में जो भ्रम है, पार्टी उसे दूर करेगी। पार्टी अपने वोटर्स के बीच जाकर उनसे बातचीत करेगी।
अब नाराजगी समझिए-
देश के विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए UGC ने 13 जनवरी, 2026 को नए नियम जारी किए थे। विरोध के बाद 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक भी लगा दी थी।
अगड़ी जाति की चिंताएं
- सर्कुलर की धारा 3(c) में जातिगत उत्पीड़न की परिभाषा में केवल SC, ST और OBC छात्रों को शामिल किया गया था। सवर्ण समाज का मानना है कि उत्पीड़न किसी भी वर्ग के छात्र के साथ हो सकता है, इसलिए नियमों में सामान्य वर्ग को भी सुरक्षा मिलनी चाहिए।
- नियमों में शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। अगड़े वर्ग के छात्रों को डर था कि बिना सही जांच के उन पर झूठी कार्रवाई हो सकती है। बचाव के लिए कोई मजबूत प्रावधान नहीं है।
- नियमों की वजह से शैक्षणिक संस्थानों में सामान्य वर्ग के छात्रों को स्वाभाविक रूप से संभावित दोषी के रूप में देखा जा सकता है। जिससे सामाजिक ताना-बाना प्रभावित होगा।
पिछड़ी जाति का तर्क
- पिछड़े, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के छात्रों का तर्क है कि उच्च शैक्षणिक संस्थानों में उन्हें अक्सर जातिगत भेदभाव, ताने और असमान व्यवहार का सामना करना पड़ता है।
- सख्त कानूनी प्रावधान और इक्विटी कमेटियों के बिना कैंपस में समानता और निष्पक्ष माहौल नहीं बनाया जा सकता।
- यह सर्कुलर उन्हें पढ़ाई के दौरान किसी भी प्रकार की प्रताड़ना या भेदभाव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने और न्याय पाने का ठोस जरिया प्रदान करता है।
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