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वाराणसी में निकला 8-मोहर्रम का कदीमी जुलूस:अंजुमन हैदरी ने किया नौहाख्वानी वा मातम, बिस्मिल्लाह खां बजाते थे चांदी की शहनाईवाराणसी11 मिनट पहले
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दालमंडी स्थित चाहमामा से उठा 8 मोहर्रम का जुलूस।
वाराणसी के दालमंडी स्थित चाहमान इलाके के ख्वाजा नब्बू साहब के इमामबाड़े से कदीमी तुरबत का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस कार्यक्रम संयोजक मुनाजिर हुसैन मंजू के दिशा निर्देशन में निकाला गया। यह जुलूस इमाम हुसैन के बहादुर भाई हजरत अब्बास की याद में निकाला
.
अब्बास मुर्तजा शम्सी ने पढ़ी मजलिस
जुलूस उठने से पूर्व अब्बास मुर्तजा शम्सी ने मजलिस को खिताब फ़रमाया। उन्होंने बताया अब्बास इमाम हुसैन के बहादुर भाई थे और उनकी एक आवाज से पूरा यजीदी लश्कर कांपता था। जब वो अपनी भतीजी सकीना के लिए पानी लेने नहर ए फोरात पर पानी लेने गए थे। जहां से लौटते हुआ यजीदी लश्कर ने उन्हें शहीद कर दिया।
बेदर्दी से किया शहीद
अब्बास मुर्तजा शम्सी ने पढ़ा इमाम हुसैन ने कहा था कि मेरे भाई अब्बास के जाने से मेरी कमर टूट गई। यह सुनकर वहां मौजूद लोग जारो कतार रोने लगे। उन्होंने बताया कि अब्बास के दोनों बाजू काट दिए गए और पानी की मशक में तीर मार दिया गया ताकि पानी इमाम हुसैन के खेमों में न जा सके।
लियाकत अली और साथियों ने पढ़ी सवारी
जुलूस उठने पर लियाकत अली खां व उनके साथियों ने सवारी शुरू की- ‘जब हाथ कलम हो गए सक्काए हरम के, और अर्शे बरी हिल गया गिरने से अलम के।’ जुलूस चाहमामा होते हुए दालमंडी स्थित हकीम साहब के अज़ाख़ाने पर पहुंचा। जहां से अंजुमन हैदरी चौक बनारस ने नौहाख्वानी शुरू करी -अब्बास क्या तराई में सोते हो चैन से।’ जिसमें शराफत हुसैन, लियाकत अली खां, साहब ज़ैदी, शफाअत हुसैन शोफी, मज़ाहिर हुसैन, राजा व शानू ने नौहाख्वानी की l
इन रास्तों से गुजरा जुलूस
जुलूस दालमंडी, खजूर वाली मस्जिद, नई सड़क, फाटक शेख सलीम, काली महल, पितरकुंड, मुस्लिम स्कुल होते हुए लल्लापूरा स्थित फ़ातमान पहुंचा l फ़ातमान से जुलूस पुनः वापस मुस्लिम स्कुल, लाहंगपूरा , रांगे की ताज़िया, औरंगाबाद, नई सड़क कपड़ा मंडी, कोदई चौकी, सर्राफा बाजार, टेढ़ी नीम, बांस फाटक, कोतवालपूरा, कुंजीगरटोला, चौक, दालमंडी, चाहमामा होते हुए वापस ख्वाजा नब्बू साहब के इमामबाङे में समाप्त हुआ l
बिस्मिल्लाह खां बजाते थे मातमी धुन
कार्यक्रम संयोजक मुनाजिर हुसैन मंजू ने बताया इसी जुलूस में उस्ताद बिस्मिल्लाह खां शहनाई पर आंसुओं का नजराना पेश करते थे।उनकी मातमी धुन सुनने के लिए सैकड़ों की संख्याएं में विदेशी मौके पर मौजूद रहते थे। उनकी परंपरा का निर्वहन उस्ताद फतेह अली खान और उनके साथियों ने किया।
कमिश्नर और डीएम का किया धन्यवाद
इस दौरान कार्यक्रम संयोजक मुनाजिर हुसैन मंजू ने पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार का दालमंडी में जुलूस के पहले करवाई गई साफ सफाई की व्यवस्था के लिए धन्यवाद दिया।
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