इतना गर्म कैसे हो गया यूपी का बांदा जिला? | 🇮🇳 LatestLY हिन्दी

इतना गर्म कैसे हो गया यूपी का बांदा जिला?

उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका यूं तो गर्मी और सूखे की खबरों को लेकर अक्सर चर्चा में रहता है लेकिन इसी इलाके का एक जिला बांदा, पिछले कुछ साल से देश के सबसे गर्म जिलों में शामिल होने का रिकॉर्ड बनाता जा रहा है.

देश

Deutsche Welle|

A+
A-

इतना गर्म कैसे हो गया यूपी का बांदा जिला?

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका यूं तो गर्मी और सूखे की खबरों को लेकर अक्सर चर्चा में रहता है लेकिन इसी इलाके का एक जिला बांदा, पिछले कुछ साल से देश के सबसे गर्म जिलों में शामिल होने का रिकॉर्ड बनाता जा रहा है.उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर बुंदेलखंड के बांदा जिले में इस साल गर्मी में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तक पहुंच गया. पिछले कई दिनों तक यहां का तापमान 47-48 डिग्री ही बना रहा. तापमान के असर के चलते शहरी और ग्रामीण इलाकों में दोपहर में बिल्कुल सन्नाटा पसर जाता है और भीड़ सिर्फ अस्पतालों में दिखती है जहां मौसम की मार नहीं झेल पाने वाले लोग बीमार होकर पहुंच रहे हैं.

भारतीय मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट में 48 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ बांदा कई दिनों तक लगातार देश का सबसे गर्म जिला बना रहा और यह तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री ज्यादा था. हालांकि बांदा के आस-पास के जिलों मसलन, प्रयागराज, झांसी, कानपुर का भी हाल लगभग ऐसा ही था.

यही नहीं, बीते 21 मई को तो बांदा में तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और इस तापमान के साथ वह ना सिर्फ भारत का बल्कि उस हफ्ते दुनिया के सबसे गर्म शहरों में भी शामिल हो गया. राजस्थान के चुरू को पीछे छोड़ते हुए बांदा ग्लोबल हीट मैप पर आ गया. मौसम विभाग ने बांदा और दक्षिणी यूपी के कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया. पिछले हफ्ते कुछ बूंदाबांदी के साथ स्थिति में कुछ सुधार जरूर हुआ लेकिन बांदा में यह तापमान अभी भी 40 डिग्री से ऊपर ही बना हुआ है. यहां तक कि रात में भी लोगों को राहत नहीं मिल रही है.

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने दोपहर 12 बजे से लेकर शाम चार बजे तक लोगों को घरों में रहने की एडवाइजरी जारी की है.

बांदा की भौगोलिक स्थिति

बांदा उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में स्थित है जिसका ज्यादातर हिस्सा पठारी है. राजस्थान और सिंध के रेगिस्तानों से आने वाली सूखी और गर्म हवाएं, जिन्हें लू कहते हैं, इस इलाके को गर्म कर देती हैं. बुंदेलखंड की स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि जिन पश्चिमी विक्षोभों ने इस महीने उत्तर भारत के दूसरे हिस्सों को थोड़ी ठंडक भी दी, उनका भी असर यहां नहीं देखने को मिला.

बांदा की भौगोलिक स्थिति की बात करें तो यह पथरीले और ऊंचे इलाके पर बसा है, जहां जमीन के नीचे कठोर ग्रेनाइट पत्थर की चट्टानें हैं. यह पथरीली जमीन दिन भर सूरज की तेज गर्मी और लपटों को अपने अंदर सोख लेती है और फिर रात के समय उसी गर्मी को वापस हवा में बिखेरने लगती है. इस वजह से यहां रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल पाती.

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्लोब पर बांदा की स्थिति ऐसी है जहां गर्मियों में सूरज ठीक सिर के ऊपर होता है और उसकी किरणें बिल्कुल सीधी पड़ती हैं. ऐसे में साफ आसमान, पथरीली जमीन, ग्रेनाइट की चट्टानें और पानी की कमी जैसी स्थितियां मिलकर यहां ऐसी गर्मी बिखेरती हैं, मानो आग बरस रही हो.

अवैध खनन का बोलबाला

हालांकि सिर्फ भौगोलिक स्थिति ही इस इलाके को करीब पचास डिग्री सेल्सियस तापमान प्रदान करने के लिए जिम्मेदार नहीं है बल्कि स्थानीय लोग भी इसे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रखे हैं. पूरे बुंदेलखंड में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और भूजल लगभग खत्म होने की वजह से मिट्टी में नमी लगभग गायब है. रही सही कसर पत्थर और बालू के लिए होने वाला अंधाधुंध खनन इस आग में घी का काम कर रहा है. इन सब वजहों से पर्यावरण तेजी से बदल रहा है.

बांदा के निवासी और पर्यावरण कार्यकर्ता आशीष सागर बताते हैं, “बांदा की जीवनरेखा कही जाने वाली केन नदी से जिस तरह अंधाधुंध बालू निकाली जा रही है और पेड़-पौधे खत्म होते जा रहे हैं, उसकी वजह से गर्मी लगातार बढ़ रही है. बांदा जिले में इस वक्त बीस से ज्यादा लाल मौरम यानी बालू का उत्खनन करने वाली खदानों का संचालन हो रहा है. इस खनन का विस्तार सिर्फ केन नदी तक नहीं है बल्कि यमुना, रंज और बाघेन नदियों तक है.”

अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से बांदा और बुंदेलखंड के दूसरे जिले पहले भी गरम रहते रहे हैं, लेकिन ऐसी जानलेवा स्थितियां पिछले कुछ सालों में बनती गई है. यहां प्राकृतिक स्थितियों की वजह से गर्मी भले ही पड़ती रही हो लेकिन तापमान को नियंत्रित करने के तमाम तरीके प्रकृति में ही मौजूद थे. अब उन्हीं चीजों को कुछ लोग अपने लाभ के लालच में नष्ट कर रहे हैं. जिसका नतीजा ना सिर्फ बांदा के लोगों को बल्कि आस-पास के लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है.

महिला किसान नेता और पर्यावरण कार्यकर्ता उषा निषाद कहती हैं कि अवैध खनन के खिलाफ तमाम शिकायतें होती रहती हैं लेकिन कोई लगाम नहीं लगती. डीडब्ल्यू से बातचीत में उषा निषाद कहती हैं, “हम लोगों ने चित्रकूटधाम मंडल के मंडलायुक्त से मिलकर इसकी लिखित शिकायत की है. यहां तक कि हम लोग नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल में और मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी कर चुके हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ.”

भीषण गर्मी की आर्थिक मार

इस भीषण गर्मी के चलते फसलें तो तबाह होती ही हैं गर्मी की वजह से दिन भर लोग घरों के बाहर भी नहीं निकलते. इसका सबसे ज्यादा नुकसान किसानों और गरीबों को होता है. सुषमा देवी बांदा जिले की रहने वाली हैं. अपने परिवार के साथ गर्मी के मौसम में कच्चे आम का रस यानी पना और गन्ने का जूस बेचती हैं. डीडब्ल्यू से बातचीत में वो कहती हैं, “किसानों और मजदूरों पर तो गर्मी की मार पड़ ही रही है. हमारी तरह के छोटे दुकानदार हैं, वो भी परेशान हैं. दिन में लोग बाहर निकलते ही नहीं. दस बजे से पहले ही अपना काम निपटा लेते हैं. वैसे ज्यादातर लोग तो दूसरे शहरों में जाकर नौकरी या व्यापार कर रहे हैं. यहां रोजगार का कोई साधन वैसे भी नहीं है, ऊपर से ये गर्मी और जान ले रही है.”

इस गर्मी की मार ना सिर्फ इंसानों पर बल्कि पशुओं पर भी पड़ रही है. इस तपती धूप में इन बेजुबान जानवरों को न तो कहीं चरने के लिए घास मिलती है और न ही पीने का पानी. नतीजा यह होता है कि हर साल मई और जून के महीने में सैकड़ों गाय-बैल लू और प्यास के कारण तड़प-तड़प कर दम तोड़ देते हैं. सिर्फ पालतू या आवारा ही नहीं, बल्कि जंगलों में पानी के छोटे-मोटे गड्ढे और सोते सूख जाने से जंगली जानवर और पक्षी भी भारी तादाद में मर रहे हैं.

पेड़ों की अंधाधुंध कटाई

ना सिर्फ अवैध खनन बल्कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने भी यहां के मौसम को बदहाल किया है. एक ओर हजारों की संख्या में पुराने और घने पेड़ काटे जा रहे हैं तो दूसरी ओर खानापूर्ति के लिए करोड़ों पौधे रोपने का रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है, लेकिन धरातल पर वो पौधे कहीं नहीं दिखते.

आशीष सागर कहते हैं, “सरकार ने बुंदेलखंड में रिकॉर्ड तोड़ हरित क्रांति की है, लेकिन सिर्फ कागजों में. राज्य सरकार एक ही दिन में सर्वाधिक पौधारोपण का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड छह बार बना चुकी है. इस हिसाब से करोड़ों पौधे लगाए गए, लेकिन जमीन पर कितने मौजूद हैं, यह बड़ा सवाल है. वहीं सड़कों के चौड़ीकरण की वजह से पूरे बुंदेलखंड में बड़े पैमाने पर पुराने पेड़ों को काटा गया है. उदाहरण के तौर पर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के निर्माण में ही करीब दो लाख पुराने पीपल, महुआ, शीशम, और नीम जैसे छायादार पेड़ काट दिए गए.”

प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का यही नतीजा है कि बांदा का वन क्षेत्र काफी सिकुड़ गया है. मौजूदा समय में बांदा जिले में सिर्फ 3 फीसदी ग्रीन कवर यानी हरियाली बची है. जबकि पड़ोसी जिले चित्रकूट में स्थिति काफी अच्छी है और गर्मी की मार भी वहां कम पड़ती है जबकि भौगोलिक स्थिति दोनों जगह की एक जैसी है. चित्रकूट में ग्रीन कवर 18 फीसदी है. पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, पेड़ों की इस भारी कमी के कारण जमीन के अंदर की प्राकृतिक नमी लगभग पूरी तरह खत्म हो चुकी है. पेड़ों की कमी के कारण यहां ‘अल्बीडो इफेक्ट’ काफी बढ़ गया है, जिससे धूप जमीन के भीतर अवशोषित नहीं हो पा रही है और वापस लौटकर वातावरण को और ज्यादा गर्म कर रही है.

पर्यावरणविदों के मुताबिक, जानलेवा गर्मी से बचने के लिए तालाब और कुओं जैसे स्थानीय जलस्रोतों को पुनर्जीवित करना होगा. वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर और पर्यावरणविद अजय कुमार कहते हैं, “सिर्फ पौधारोपण नहीं, बल्कि उनका संरक्षण भी जरूरी है. छायादार प्रजातियां, स्थानीय प्रजातियां और हरित पट्टियां मदद कर सकती हैं. जरूरी होने पर यदि पुराने पेड़ काटने भी पड़ें तो उस अनुपात में नए पेड़ लगाए भी जाने चाहिए. सिर्फ पौधे लगा देने से कागजी कार्रवाई पूरी हो सकती है, प्रकृति और इंसान की जरूरतें नहीं.”




Source link

dp

Related Posts

हरदोई में ट्रैक्टर को लेकर विवाद, भीम आर्मी का प्रदर्शन:जिलाध्यक्ष ने लगाया पुलिस पर अभद्रता का आरोप

Hindi News Local Uttar pradesh Hardoi Hardoi Controversy | Bhim Army Protest Against Police Over Tractor Issue हरदोई में ट्रैक्टर को लेकर विवाद, भीम आर्मी का प्रदर्शन:जिलाध्यक्ष ने लगाया पुलिस…

छात्र को थप्पड़ मारा तो साथियों संग शिक्षक को पीटा:बुलंदशहर के कॉलेज जाते समय बस स्टैंड पर किया हमला, बुलंदशहर रेफर

Hindi News Local Uttar pradesh Bulandshahar Jhangirabad Jahangirabad Teacher Assaulted | Satyadev College Student Attack छात्र को थप्पड़ मारा तो साथियों संग शिक्षक को पीटा:बुलंदशहर के कॉलेज जाते समय बस…

You Missed

Texas Democrat James Talarico faces grilling from voters at town hall in tight Senate race

  • By dp
  • October 15, 2026
  • 3 views
Texas Democrat James Talarico faces grilling from voters at town hall in tight Senate race

हरदोई में ट्रैक्टर को लेकर विवाद, भीम आर्मी का प्रदर्शन:जिलाध्यक्ष ने लगाया पुलिस पर अभद्रता का आरोप

  • By dp
  • October 15, 2026
  • 3 views
हरदोई में ट्रैक्टर को लेकर विवाद, भीम आर्मी का प्रदर्शन:जिलाध्यक्ष ने लगाया पुलिस पर अभद्रता का आरोप

Elina Svitolina vs. Hanyu Guo prediction, odds, picks for WTA Wuhan Open 2026

  • By dp
  • October 15, 2026
  • 5 views
Elina Svitolina vs. Hanyu Guo prediction, odds, picks for WTA Wuhan Open 2026

छात्र को थप्पड़ मारा तो साथियों संग शिक्षक को पीटा:बुलंदशहर के कॉलेज जाते समय बस स्टैंड पर किया हमला, बुलंदशहर रेफर

  • By dp
  • October 15, 2026
  • 5 views
छात्र को थप्पड़ मारा तो साथियों संग शिक्षक को पीटा:बुलंदशहर के कॉलेज जाते समय बस स्टैंड पर किया हमला, बुलंदशहर रेफर

Florence Pugh Calls This Edenic Destination the “Eighth Wonder of the World”

  • By dp
  • October 15, 2026
  • 7 views
Florence Pugh Calls This Edenic Destination the “Eighth Wonder of the World”

BHU अस्पताल के छोटी गेट पर मारपीट:सुरक्षाकर्मी का मोबाइल टूटा,युवक को सड़क पर गिराकर मारते दिखे

  • By dp
  • October 15, 2026
  • 7 views
BHU अस्पताल के छोटी गेट पर मारपीट:सुरक्षाकर्मी का मोबाइल टूटा,युवक को सड़क पर गिराकर मारते दिखे